प्रेस रिव्यू: दिल्ली के पास 'भैंस काटने' को लेकर रोहिंग्या मुस्लिमों पर हमला

मुसलमान
इमेज कैप्शन, सांकेतिक तस्वीर
प्रकाशित

द संडे एक्सप्रेस की ख़बर के मुताबिक, फ़रीदाबाद ज़िले के बल्लभगढ़ इलाके के मुजेरी गांव में रोहिंग्या मुसलमानों पर बकरीद के मौके पर हमला किया गया.

आरोप है कि ये हमला बकरीद पर भैंसे को काटने को लेकर हुए विवाद के चलते हुआ. यहां रहने वाले एक रोहिंग्या मुस्लिम साकिर ने बताया, ''पहले तो स्थानीय लोगों ने हमारे बंधे हुए जानवरों को ले जाने की कोशिश की. जब हमने इंकार किया तो वो बोले कि ये बछड़े हमें बेच दो. हमने ये कहकर मना किया कि हमने इन्हें ईद पर कुर्बानी के लिए खरीदा है.''

साकिर आगे बताते हैं, ''हमने विवाद न बढ़े इसलिए कहा कि हम शनिवार को इन्हें जाकर बाजार में बेच देंगे, लेकिन तभी वो शनिवार तड़के 15-20 के झुंड में आए और हमारे साथ मारपीट की. उन्होंने हमारे कटरों को छोड़ दिया और जिसने ऐसा करने से उन्हें रोका, उसके साथ मारपीट की. महिलाओं के कपड़े तक फाड़े.''

गुरमीत

दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक, डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह ने 25 अगस्त को पंचकुला आने से पहले फ़ैसले के ख़िलाफ़ होने पर मौके से भागने की योजना बनाई थी.

अख़बार लिखता है कि गुरमीत ने हिंसा और आगज़नी के लिए क़ुर्बानी गैंग बनाया था. इस गैंग को कुछ कोड वर्ड दिए गए थे. फ़ैसला आने के बाद गुरमीत ने समर्थकों की ओर देखते हुए अंगूठा दिखाकर जो नमस्ते किया था, उसका अर्थ फ़रारी से था.

अख़बार के मुताबिक, पुलिस के हाथ इस बाबत एक ऑडियो क्लिप लगी है जिससे पता चलता है कि फ़ैसले के बाद क्या करना है उसे की वर्ड के ज़रिए बताया गया था. वे की वर्ड थे -

  • लाल बैग- सज़ा हो गई
  • पौधे बीजो- सामूहिक आत्मदाह करो
  • पौधरोपण- उपद्रव करो, दंगे शुरू करो
  • पानी सींचने- पेट्रोल डालकर आत्मदाह करो
  • कली काटना- धारधार हथियारों से लोगों को मार डालो.
  • टमाटर तोड़ना- हिंसा और आगज़नी
मोदी

जनसत्ता की खबर के मुताबिक, संपत्ति का ब्योरा देने में केंद्रीय मंत्री कोताही बरत रहे हैं. केंद्रीय कैबिनेट के 72 मंत्रियों में से इस साल सिर्फ 11 ने अपनी संपत्ति सार्वजनिक की है.

ब्योरा जारी न करने वालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हैं. मोदी सरकार ने 2014 में मंत्रियों के द्वारा संपत्ति का ब्योरा जमा करने की आखिरी तारीख हर साल की 31 अगस्त तय की थी.

इस साल ये तारीख बीत चुकी है और प्रधानमंत्री कार्यालय के पास सिर्फ 11 मंत्रियों का ब्योरा पहुंचा है.

राजन

हिंदुस्तान की खबर के मुताबिक, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने नोटबंदी के बारे में अपनी किताब 'आई डू व्हाट आई डू' में लिखा है कि उन्होंने कभी इसका समर्थन नहीं किया था.

राजन ने इस किताब में लिखा है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान कभी नोटबंदी का फ़ैसला लेने को नहीं कहा था. राजन ने कहा कि फरवरी 2016 में सरकार ने नोटबंदी पर राय मांगी थी और उन्होंने मौखिक रूप से अपनी राय सरकार को बता दी थी.

राजन ने कहा था कि नोटबंदी के फ़ैसले से अल्पकाल में होने वाले नुकसान लंबी अवधि में होने वाले फ़ायदों पर भारी पड़ेंगे.

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