कोरोना लॉकडाउन: भारत में 31 मई के बाद क्या होगा?

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- Author, सरोज सिंह
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 6 मिनट
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने कहा है कि कोविड-19 के मामलों में तेज़ी को देखते हुए लॉकडाउन को और 15 दिनों तक बढ़ाया जाना चाहिए.
उन्होंने कहा, "मैंने गृह मंत्री अमित शाह से फ़ोन पर बात की है और मुझे लगता है कि लॉकडाउन को और 15 दिनों के लिए बढ़ाया जाना चाहिए."
हालाँकि, उन्होंने कहा कि हम कुछ ढील भी चाहते हैं, जैसे कि रेस्तरां को 50 फ़ीसदी ग्राहकों के साथ खोलने की अनुमति दी जा सकती है.
भारत में लॉकडाउन-4 ख़त्म होने में बस दो दिन बचे हैं. इस बीच आगे की रणनीति क्या हो, इस पर गुरुवार को गृह मंत्री अमित शाह ने राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक भी की थी.
अब तक राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ ये चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही करते आए हैं.
उससे पहले कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गाबा ने राज्यों के मुख्य सचिवों से बात की. उनका फ़ोकस उन 13 शहरों पर था, जहाँ कोरोना के सबसे अधिक मामले सामने आ रहे हैं.
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इन सब कोशिशों के बीच चर्चा ये हो रही है कि क्या लॉकडाउन-5 आएगा? अगर लॉकडाउन-5 आएगा तो उसका स्वरूप क्या होगा?
लॉकडाउन-5 आएगा?
लॉकडाउन-4 में छूट के साथ ही देश में कोरोना संक्रमण तेज़ी से बढ़ रहा है. हालाँकि, इस बात की आशंका पहले से जताई जा रही थी.
लेकिन जिन पाँच राज्यों में संक्रमण की संख्या सबसे ज़्यादा है, वो केंद्र सरकार के लिए भी चिंता का विषय हैं. इसके मददेनज़र बहुत मुमकिन है कि सरकार के अगले क़दम में उन राज्यों पर ज़्यादा फ़ोकस हो.
इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि पिछली बार की ही तरह अगले चरण में राज्यों को ही ज़्यादा अधिकार दिए जाएँ.
कर्नाटक सरकार ने ट्वीट कर कहा कि उसने केंद्र सरकार से विनती की है कि जिन राज्यों में कोरोना के संक्रमण के मामले ज़्यादा हैं, उन राज्यों से सीमित संख्या में फ़्लाइट राज्य में भेजें. दूसरे राज्यों से सड़क मार्ग से आने वालों पर वहां प्रतिबंध जारी है. ट्रेनों पर उन्होंने किसी तरह की पाबंदी से इनकार किया है.
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ये संकेत है कि राज्य सरकारें लॉकडाउन के अगले चरण में अपनी ज़्यादा भूमिका चाहते हैं.
झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्रियों की बैठक से पहले ही कहा कि चरणबद्ध तरीक़े से धीरे-धीरे इस लॉकडाउन को गति देने के लिए जो बेहतर और कारगर उपाए होंगे वो करेंगे.
उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि उनकी सरकार केंद्र के फ़ैसले को अमल में लाएगी.
महाराष्ट्र सरकार के मंत्री जयंत पाटिल ने दो दिन पहले प्रेस कॉंफ्रेंस कर कहा कि राज्य सरकार और कुछ सेवाओं में छूट देने पर विचार कर रही है, लेकिन उन्हें केंद्र के फ़ैसले का इंतज़ार है.
हाल ही में हिमाचल प्रदेश सरकार ने दो ज़िलों में लॉकडाउन की जगह कर्फ़्यू का आदेश जारी किया है.
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इन सब राज्यों के उदाहरण से एक अनुमान लगाया जा सकता है कि आने वाले दिनों में राज्य सरकारें अपने स्तर पर इस तरह के फ़ैसले लेती रहेंगी.
ये भी मुमकिन है कि केंद्र सरकार के अगले आदेश को लॉकडाउन ना कहा जाए, बल्कि केवल उन नियमों की सूची जारी कर सकती है, जो अगले 15 दिन तक प्रतिबंधित रहे या फिर शुरू करने की अनुमति हो.
रेड ज़ोन के बाज़ार
उद्योग जगत ने पिछले लॉकडाउन के पहले आर्थिक पैकेज की मांग की थी. उनकी वो मांग पूरी हो चुकी है. और ज़्यादातर जगहों पर काम शुरू हो गया है. फ़िलहाल उनकी दिक्कत लेबर ना मिलने की है. लेकिन जितने मज़दूर अभी हैं फ़िलहाल वो उसी से काम चला रहे हैं.
ख़ुदरा व्यापारियों की जो दुकानें खुली भी हैं उनमें ना तो ग्राहक हैं और ना ही कर्मचारी. उन्हें फ़िलहाल सीमित समय तक खोलने की इजाज़त दी गई है
कॉन्फ़ेडरेशन ऑफ़ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रवीण खंडेलवाल ने बीबीसी को बताया कि फ़िलहाल 10 फ़ीसदी दुकानें ही खुली हैं. इजाज़त मिलने के बाद भी लोगों में अब भी डर का माहौल है.

कुछ बाज़ार जो रेड ज़ोन में हैं वो अब भी बंद हैं. जैसे दिल्ली का सदर थोक बाज़ार इलाक़ा, जहाँ हज़ारों की संख्या में दुकानें हैं, वो फ़िलहाल बंद हैं. ये इलाक़ा कंटेनमेंट ज़ोन में आता है.
व्यापरियों की राज्य सरकारों से मांग है कि दुकानें खोलने के समय बढ़ाए जाएं, ताकि आमदनी बढ़े. साथ ही बिजली-पानी बिल पर भी छूट मिल सके.
मेट्रो, लोकल और ट्रेन की तैयारी
23 मई को ही दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने अपनी तैयारियों से जुड़ी एक तस्वीर ट्वीट करके बता दिया था कि वो ट्रेन सेवा चलाने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं. लेकिन अभी तक उन्हें इजाज़त नहीं मिली है.
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दिल्ली में गुरुवार को एक हज़ार से ज़्यादा नए मामले सामने आए हैं. ऐसे में मेट्रो चलाने का फ़ैसला जोखिम भरा हो सकता है. लेकिन दो महीने से ज़्यादा समय से बंद पड़ी मेट्रो के लिए अब राजस्व घाटे का संकट सामने आ रहा है.
बहुत मुमकिन है कि एक तरफ़ सात सीटों वाली मेट्रो में सोशल डिस्टेंसिंग का ख्याल रखते हुए केवल ज़रूरी सेवाओं से जुड़े लोगों के लिए मेट्रो यात्रा को मंज़ूरी दी जाए. रेड ज़ोन में इनका स्टॉप ना हो.
महाराष्ट्र सरकार ने भी सरकारी कर्मचारियों की आवाजाही के लिए मुंबई लोकल चलाने की परमिशन केंद्र सरकार से मांगी है.
घरेलू विमान सेवाओं और ट्रेन सेवाओं के शुरू होने के बाद इस बात का दवाब केंद्र सरकार पर ज़्यादा पड़ रहा है.
हालांकि अंतरराष्ट्रीय विमानों की आवाजाही शुरू करने के लिए अगस्त तक का इंताज़ार करना पड़ सकता है. नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप पुरी ने ऐसे संकेत पहले भी दिए हैं.

मंदिरों और पूजा स्थलों पर केंद्र के फ़ैसले का इंतज़ार
धीरे-धीरे जैसे ही लॉकडाउन में छूट की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे लोगों की मांग ज़रूरतों के बाद दूसरी सुविधाओं की भी बढ़ती जा रही है.
कर्नाटक सरकार ने एक जून से कुछ मंदिर, मस्जिद, चर्च खोलने के संकेत दिए हैं. सिर्फ़ कर्नाटक में ही मंदिरों में आने वाला चढ़ावा रुकने से क़रीब 133.56 करोड़ का नुक़सान हुआ है.
वहाँ पुजारियों और मंदिर के दूसरे स्टाफ़ को वेतन देने में दिक्कत आ रही है.
यही हाल केरल के मंदिरों का भी है. त्रावणकोर देवासोम बोर्ड (टीडीबी) के चेयरमैन एन वासु ने बीबीसी को बताया, "हम अपने कर्मचारियों को सैलरी देने की स्थिति में भी नहीं हैं. इस महीने क़रीब 25 फ़ीसदी वेतन काटा जा रहा है."

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टीडीबी केरल में क़रीब 125 मंदिर का प्रबंधन देखता है. इनमें सबरीमला भी शामिल है. लॉकडाउन की घोषणा के बाद इन मंदिरों में पैसा आना बंद हो गया है.
वहीं दूसरी तरफ़ पंजाब में भी अकाल तख़्त ने कहा है कि जब शराब की दुकानें खुल सकती हैं तो गुरुद्वारा क्यों नहीं. उत्तर प्रदेश में भी कादंबरी मठ के महंत नरेंद्र गिरी ने ऐसी ही मांग उठाई थी.
लेकिन मंदिरों को खोलने में सबसे ज़्यादा समस्या प्रसाद वितरण में आएगी. कोरोना संक्रमण के मद्देनज़र किसी भी वस्तु को छूने पर हाथ धोने की सलाह दी जाती है, ऐसे में प्रसाद वितरण के लिए मंदिरों में क्या व्यवस्था होगी, ये पूजा घरों को खोलने के पहले तय करना होगा.

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धारावाहिकों और फ़िल्मों की शूटिंग
पिछले दो महीने से सीरियल्स के ना तो नए एपीसोड आ रहे हैं, और ना ही नई फ़िल्में रिलीज़ हो रही हैं और ना ही उनकी शूटिंग हो रही है.
पिछले दिनों अक्षय कुमार की शूटिंग की एक तस्वीर ज़रूर सामने आई है. लेकिन बाद में ख़बर आ रही है कि वो सरकारी ऐड के लिए शूटिंग कर रहे थे. हज़ारों की संख्या में लोग इस इंडस्ट्री से जुड़े हैं.
महाराष्ट्र में 28 मई को ही एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के लोगों की राज्य सरकार के नुमाइदों से बात हुई.
इस बैठक में इस बात पर चर्चा हुई की किस तरह के नियमों को अपनाकर प्रोडक्शन का काम दोबारा शुरू किया जा सकता है. बैठक में एंटरटेनमेंट इडस्ट्री के लिए एक आर्थिक सहायता पैकेज देने की मांग भी रखी गई.

फ़िलहाल फ़िल्मों के पोस्ट प्रोडक्शन का काम थोड़ा बहुत शुरू हो चुका है. फ़िल्मों की शूटिंग की इजाज़त मिली है, लेकिन ग्रीन ज़ोन में.
बहुत मुमकिन है कि कोरोना संक्रमण से निपटने के ज़रूरी इलाज के मद्देनज़र थोड़ी रियायत इन्हें भी मिले.
लेकिन मुमकिन है कि मॉल, सिनेमाघर, स्कूल, कॉलेज और रेस्तरां में बैठकर खाना खाने की इजाज़त के लिए थोड़ा और वक़्त तक इंतज़ार करना पड़े.
जहाँ भी थोड़ी छूट मिलेगी उसके साथ शर्त होगी दो गज़ की दूरी और मास्क पहनते हुए बार-बार समय-समय पर हाथ धोने के नियम का पालन करते रहें.




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