कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ सरकारी काम में बाधा डालने के लिए एफ़आईआर

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, अनंत झणाणे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
- पढ़ने का समय: 3 मिनट
समाजवादी पार्टी के एमएलसी प्रत्याशी और गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पूर्व डॉक्टर कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ सरकारी काम में बाधा डालने के लिए एफ़आईआर दर्ज की गयी है.
यह मुक़दमा उत्तर प्रदेश के देवरिया कोतवाली में दर्ज हुआ है जिसमें डॉक्टर कफ़ील अहमद पर राजकीय कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाया गया है.
यह एफ़आईआर 29 मार्च को दर्ज हुई है. एंबुलेंस के चालक की तहरीर पर यह एफ़आईआर दर्ज की गयी है जिसमें लिखा है कि, "26 मार्च को सुबह 11:05 मिनट पर गीता मिश्रा को पीएचसी भलुअनी पर लाया गया था. उपचार हेतु एम्बुलेंस से मैं EMT (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) मरीज़ को 11:30 बजे सदर अस्पताल देवरिया लेकर आया. एम्बुलेंस में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन ना होने के कारण एम्बु बैग से ऑक्सीजन दी गई."
"इमरजेंसी में पहुँचने पर श्रीमती गीता मिश्रा को मृत घोषित कर दिया गया. उसी समय एंबुलेंस में ज़बरदस्ती डॉक्टर कफ़ील अहमद घुसकर मरीज़ का चेकअप करने का स्वांग रचने लगे और राजकीय काम में बाधा उत्पन्न किया. निवेदन है की डॉक्टर कफ़ील अहमद के ख़िलाफ़ राजकीय कार्यों में बाधा डालने के संबंध में एफ़आईआर दर्ज कर कार्रवाई करने की कृपा करें."
देवरिया के एसपी श्रीपति मिश्रा ने स्थानीय मीडिया को दिए एक बयान में कहा है, "108 के एम्बुलेंस के चालक ने थाना कोतवाली पर यह सूचना दी है कि 26 मार्च को जब वो एक मरीज़ को पीएचसी से डिस्ट्रिक्ट स्वस्थ्य केंद्र की तरफ ला रहा था तो जिला अस्पताल के पास डॉक्टर कफील अहमीद जब ज़बरदस्ती एम्बुलेंस में प्रवेश कर उसका इलाज करने लगे. उसने इसका विरोध किया तो नहीं माने और ज़बरदस्ती उस गाड़ी में घुस कर उन्होंने सरकारी कार्य में बाधा डाली. एम्बुलेंस चालाक की तहरीर पर मुक़दमा दर्ज कर विधिक करवाई की जा रही है."

इमेज स्रोत, SAMIRATMAJ MISHRA/BBC
क्या है मामला
सर्कल अफ़सर सदर श्रीयश त्रिपाठी ने बीबीसी से इस बात की पुष्टि की है कि डॉक्टर कफ़ील ख़ान के ख़िलाफ़ सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में एफ़आईआर दर्ज की गई है.
डॉक्टर कफ़ील ने 28 मार्च को एक वीडियो ट्वीट किया था जिसमें वो एक महिला की एम्बुलेंस में जांच करने की कोशिश करते हुए दिख रहे हैं. बाद में स्ट्रेचर पर लेटी हुई महिला को अस्पताल के अंदर लेकर जाते हुए दिखाया जा रहा है.
वीडियो में अस्पताल के अंदर के शॉट में डॉक्टर कफ़ील यह कहते हुए नज़र आ रहे हैं, "माफ़ी चाहते हैं, बहुत देर हो चुकी है." और वो महिला के परिजनों को गले लगाते हुए नज़र आ रहे हैं.
इस ट्वीट में डॉक्टर कफ़ील ने कहा, "बहुत दुखी हूँ कल जिनको गोरखपुर रेफ़र किया था उनका इंतक़ाल हो गया. मिश्रा जी की माँ जिस 108 एम्बुलेंस से लायी गयी थीं उसका ऑक्सीजन सिलेंडर ख़ाली था. सदर हॉस्पिटल देवरिया में ना अंबु बैग था, ना लेरिंगोस्कोप था, ना ईटी ट्यूब, ना जीवनरक्षक औषधि. मिश्रा जी की माँ का भी देहांत हो गया."
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
जब बीबीसी ने सर्किल अफ़सर सदर श्रीयश त्रिपाठी से डॉक्टर कफ़ील ख़ान के इस ट्वीट के बारे में पूछा तो सीओ श्रीयश त्रिपाठी ने कहा, "जो तहरीर दी जाती है वो मुक़दमा लिखा जाता है. एम्बुलेंस के चालक ने जो तहरीर दी है वही मुक़दमा लिखा जायेगा. अब यह जांच का विषय है."
इस घटना और उससे जुड़ी एफ़आईआर के बारे में जब बीबीसी ने डॉक्टर कफ़ील से बात की तो उन्होंने कहा, "मैं तो एम्बुलेंस में था. वो तो इमरजेंसी में गए तब उनको डॉक्टर मृत घोषित करेगा. जो लड़का था रंजन मिश्र, वो मुझे फेसबुक से जानता था. उसने कहा की मेरी माँ मर रही है आप एक बार देख लीजिये. तो मैंने देखा की वो अम्बु कर रहा था और ऑक्सीजन था नहीं. तो मैंने रेसेसेटेशन किया और सीपीआर देने की कोशिश की. फिर उसको उठाकर अंदर ले गया. अब वहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, वो अलग बात है. लेकिन उससे पहले जो प्राइमरी होता है, वो मैं कोशिश कर पाया."
देवरिया ज़िले के एडीएम प्रशासन ने भी इस घटना से संबंधित प्रशासनिक जांच के बारे में स्थानीय मीडिया को दिए एक बयान में कहा है कि, "जांच सीडीओ द्वारा की गयी इसमें तीन सदस्य थे, अपर ज़िला अधिकारी प्रशासन ,एडिशनल सीएमओ और सीएमएस ज़िल अस्पताल. हमने जांच की और रिपोर्ट ज़िला मजिस्ट्रेट को सौंपी. एम्बुलेंस दो कैटेगरी की होती हैं. एक एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट वाली होती है, और एक बेसिक लाइफ सपोर्ट. ये बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस थी जिसमें सभी ज़रूरी इक्विपमेंट थे."
डॉक्टर कफ़ील ख़ान देवरिया से समाजवादी पार्टी के एमएलसी प्रत्याशी हैं और इन दिनों अपने चुनाव के सिलसिले में ज़िले में प्रचार में जुटे हैं. उत्तर प्रदेश में एमएलसी चुनाव 9 अप्रैल को होने जा रहे हैं और उसकी मतगणना 12 अप्रैल को होगी.
ये भी पढ़ें..
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)





















