
ये है बीचपल्ली हाइवे जो आगे पानी में डूबा हुआ है और ट्रकचालक पानी घटने का इंतज़ार कर रहे हैं.
कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ ज़िलों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. अब तक लगभग 190 लोगों की मौत हो चुकी है.
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले चौबीस घंटों के दौरान महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश हो सकती है.
सबसे ज़्यादा असर कर्नाटक में देखा जा रहा है जहां के 15 ज़िले बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित हैं. यहां 141 लोगों की मौत हो चुकी है.
दूसरी ओर आंध्र प्रदेश में 50 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं. विजयवाड़ा में एक लाख लोग बेघर हो गए हैं. राज्य में बारिश रुकी है लेकिन खतरा कम नहीं हुआ है और बचाव कार्य में वायुसेना पर निर्भरता बढ़ती जा रही है.
हाल बहुत बुरा है. पानी कर्नूल में थोड़ा कम हुआ है. मेडिकल टीम रवाना की गई है. कई संगठन हाथ बंटा रहे हैं. इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ.
गीता रेड्डी
बंगलौर स्थित स्थानीय पत्रकार खालिद कर्नाटकी ने बताया कि 15 ज़िलों में हालात गंभीर है. वायुसेना ने अब तक पाँच सौ लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है.
हर गांव एक दूसरे से कटा हुआ है. गुरुवार सुबह जो ट्रेनें रायचूर होकर जा रही थी वो वहीं रूकी हैं क्योंकि वहां रेलवे लाइन पूरी तरह डूब गया है.
दोनों ट्रेनों में 2400 यात्री फँसे हुए हैं. उन्हें हेलिकॉप्टर और नाव से निकाला जा रहा है. प्रशासन का कहना है कि ट्रेन यातायात बहाल करने में दो चार दिन का समय लग सकता है.
आंध्र प्रदेश की स्थिति
बीबीसी संवाददाता उमर फ़ारूक़ ने आंध्र प्रदेश में बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित ज़िलों में से एक महबूबनगर का जायज़ा लिया.
उनका कहना है कि रविवार सुबह बारिश रूकी हुई है लेकिन घने बादल छाए हैं और चिंता मौसम विभाग की चेतावनी को लेकर है जिसके मुताबिक चौबीस घंटों में भारी बारिश हो सकती है.
शनिवार तक प्रशासन का ध्यान कर्नूल और महबूबनगर ज़िले में था लेकिन अब यहां से पानी बहकर विजयवाड़ा और कृष्णा ज़िले में तबाही मचा रहा है.

इन दोनों ज़िलों में अब तक एक लाख लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया है.
आंध्र प्रदेश की सूचना मंत्री गीता रेड्डी ने बीबीसी को बताया, "हाल बहुत बुरा है. पानी कर्नूल में थोड़ा कम हुआ है. मेडिकल टीम रवाना की गई है. कई संगठन हाथ बंटा रहे हैं. इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ."
राज्य के जलाशयों में पानी ख़तरे के निशान से कहीं ऊपर है. नागार्जुन सागर डैम में आम तौर पर दस से साढ़े दस लाख क्यूसेक पानी रहता है लेकिन अभी ये आँकड़ा 20 से 24 लाख क्यूसेक पहुँच गया है.
गीता रेड्डी का कहना है कि इंजीनियरों ने काफी तत्तपरता से काम किया है और डैम सुरक्षित है, साथ ही बिजली संयंत्र को भी कोई नुकसान नहीं पहुँचा है.















