लद्दाख़: परंपरा और आधुनिकता की कशमकश

प्रकाशित

लद्दाख़ में लोगों ने कहा कि ज़िंदगी पहले से आसान तो हुई है, पर परंपरा ख़त्म होती जा रही है

लेह में रात के अंधेरे में प्रकाश से चमकती दुकानें
इमेज कैप्शन, लद्दाख़ के सबसे बड़े शहर लेह में रात के अंधेरे में प्रकाश से चमकती दुकानें
लद्दाख़ी पोषाक में क महिला
इमेज कैप्शन, लद्दाख़ के गांव चोकलमसर में पारंपरिक पोषाक में एक महिला
लद्दाख़ में सूर्यास्त
इमेज कैप्शन, लद्दाख़ में सूर्यास्त के समय दुकान में दाख़िल हो रहा इंसान
थिकसे बौद्ध विहार में फुनचोक आंगमो
इमेज कैप्शन, थिकसे बौद्ध विहार में फुनचोक आंगमो ने कहा, "आजकल बच्चे अपनी संस्कृति का ख़्याल नहीं रखते, बस लैपटॉप पर समय बिताते हैं."
चोकलमसर गांव के डोरसी तकापा
इमेज कैप्शन, चोकलमसर गांव के डोरसी तकापा ने कहा, "हम पारंपरिक मूल्य खोते जा रहे हैं, क्योंकि हमारा ध्यान पैसों पर है."
माथो गांव की त्सेवांग डोलमा
इमेज कैप्शन, माथो गांव की त्सेवांग डोलमा की शिकायत है कि संस्कृति नष्ट हो रही है, लोग अब पारंपरिक कपड़े भी नहीं पहनते.
तासी फ़ुतित
इमेज कैप्शन, 81 साल की तासी फ़ुतित कहती हैं, "अब हम बेहतर किस्म की सब्जियां खा सकते हैं, बेहतर कपड़े पहन सकते हैं."
त्सेरिंग डोल्मा
इमेज कैप्शन, त्सेरिंग डोल्मा ने कहा, "सब्सिडी मिलने की वजह से हम बेहतर मशीन ख़रीद सकते हैं, जिससे हमारा काम आसान हो गया है."
लेह में सब्जियों की दुकान
इमेज कैप्शन, लेह शहर में सब्जियों की दुकान
पहाड़ों पर गाइड का काम करने वाले त्सेरिंग गुरमेत
इमेज कैप्शन, पहाड़ों पर गाइड का काम करने वाले त्सेरिंग गुरमेत ने कहा, "ज़िंदगी अब पहले से आसान हो गई है, पर हम अपनी परंपरा खोते जा रहे हैं."