कोरोना वायरस मरीज़ों की हालत भारत में बदतर
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ कोरोना के लगभग 15 फ़ीसद मरीज़ों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की ज़रूरत पड़ती है.
कुछ लोग बिना किसी सांस संबंधित शिकायत के आते हैं लेकिन उनमें ऑक्सीजन का स्तर गंभीर रूप से कम होता है जिसे 'साइलेंट हाइपोक्सिया' भी कहते हैं.
कई गंभीर मरीज़ों को वेंटिलेटर की ज़रूरत पड़ती है. पूरे देश में तक़रीबन 500 फ़ैक्ट्रियां हैं जो हवा से ऑक्सीजन बनाती हैं. इसमें से 15 फ़ीसद का इस्तेमाल अस्पतालों के लिए होता है.
बाक़ी का मुख्य तौर पर इस्तेमाल स्टील और ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में ब्लास्ट फ़रनेस चलाने के लिए होता है.
जबसे भारत ने लॉकडाउन को हटा लिया है और लोग काम पर लौटने लगे हैं, तबसे ही छोटे शहरों और क़स्बों में कोरोना के केस बढ़ने लगे हैं. तो हैरानी कि बात नहीं कि ऑक्सीजन की माँग एकदम बढ़ गई है.
स्टोरीः सौतिक बिस्वास
आवाज़ः प्रज्ञा सिंह
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