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ताज़ा पेज देखें IST2028-राजस्थान की एक महिला श्रोता इंदु ने जातिगत जनगणना का विरोध किया
IST2026-राजस्थान के अनिमेष ने कहा कि किस गांव में किस जाति के लोग रहते हैं ये सबको पता है तो फिर विरोध कैसा
IST2024-लेकिन राजस्थान की अंजु ने सबका तर्क ख़ारिज कर दिया
IST2022-तमिलनाडू के एक श्रोता ने जाति के आधार पर जनगणना का विरोध किया उनका कहना था कि इससे सिर्फ राजनेताओं को लाभ होगा
IST2020-उत्तर प्रदेश के एक श्रोता ने कहा कि अगड़ी जाति के लोग अपने फ़ायदे के लिए जातिगत जनगणना का विरोध कर रहे हैं
IST2019-राजस्थान के एक श्रोता ने कहा कि समाज पहले से बटा हुआ है इसलिए ये दलील कि इससे समाज बटेगा बेमानी है
IST2016-बलिया के इरफ़ान अंसारी ने जातिगत जनगणना का साथ दिया, उन्होंने कहा कि शादी ब्याह में अगर जाति अहम है तो फिर इसमें क्या दिक़्कत है
IST2013-गोरखपुर के एक श्रोता ने समाजवाद का हवाला दिया और कहा कि जातिगत जनगणना नहीं होनी चाहिए
IST2012- बेतिया बिहार के भी एक श्रोता ने इसका विरोध किया
IST2011-मधुबनी बिहार के एक श्रोता ने जातिगत जनगणना का विरोध किया
IST2009-अंजु ने कहा कि सरकार के पास कोई आंकड़ा नहीं है इसलिए भी ये ज़रूरी है
IST2007-इंगलैंड के फ़िरोज़ ने जाति के आधार पर जनगणना का विरोध किया
IST2005-राजस्थान की अंजु ने इसका समर्थन किया कि जाति के आधार पर जनगणना होनी चाहिए
IST2002-राजस्थान के एक श्रोता ने इसकी आलोचना की
IST2002-सबसे पहले श्रोता थे बिहार के अंबिका यादव ने जिन्होंने जाति जनगणना का समर्थन किया
IST2001-कार्यक्रम की शुरूआत की राजेश जोशी ने
IST1953-बीबीसी इंडिया बोल में आज का विषय है कि - क्या जनगणना में जाति के बारे में जानकारी ली जानी चाहिए?
IST1951-कुछ ही देर आप बीबीसी हिंदी के कार्यक्रम बीबीसी इंडिया बोल में हिस्सा ले सकते हैं.
IST1935-बीबीसी इंडिया बोल में आप 9999688858 पर एसएमएस भेजकर भी शामिल हो सकते हैं.
IST1920- कार्यक्रम में शामिल होने के लिए हमें मुफ़्त फ़ोन करे - 1800 11 7000 पर या फिर 1800 102 7001 पर.
IST1916- इस बार चर्चा का विषय है कि - क्या जनगणना में जाति के बारे में जानकारी ली जानी चाहिए?
IST1915-- बीबीसी हिंदी के रेडियो कार्यक्रम बीबीसी इंडिया बोल में आपका स्वागत है.















