भारत में एक बड़ा तबका है जिसे 21वीं सदी का समाज भी अपनाने से इंकार करता आया है. सुनिए उसी तबके की दो अलग-अलग जिंदगियों की कहानी.
दिल्ली की एक बस्ती में रहने वाली 22 वर्षीय टीना जहां दो वक्त की रोटी के लिए रोज़ाना संघर्ष करती है, तो वहीं मुंबई में एक कोठी में रहने वाली लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने समाज से लड़ कर ज़िंदगी की ऊंचाईयों को छुआ है.
जो लक्ष्मी के लिए संभव था, वो आखिर क्यों असंभव है भारत के लाखों किन्नरों के लिए?
(सभी तस्वीरें व संकलन - बीबीसी संवाददाता शालू यादव)
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