उत्तराखंड में तबाही: प्राकृतिक आपदा या मानवकृत
उत्तराखंड में भारी बारिश और बाढ़ की विभीषिका ने सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक 550 से ज्यादा जानें ले ली हैं और 40 हज़ार से ज्यादा लोग अभी भी जगह-जगह फंसे हुए हैं. सैकड़ों घर और इमारतें मंदाकिनी और भगीरथी नदियों की धारा में बह गई हैं. राज्य के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने बताया है कि मृतकों की संख्या 1000 तक हो सकती है. केदारनाथ, रूद्र प्रयाग, उत्तरकाशी प्रकृति के रौद्र रूप से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. सवाल उठता है कि उत्तराखंड में आई ये विपदा प्राकृतिक है या इसके लिए प्रकृति के साथ मानवीय छेड़छाड़ जिम्मेदार है. इंडिया बोल में इसी विषय पर हुई बहस का संचालन दिल्ली स्टूडियो में अमरेश द्विवेदी के साथ देहरादून से नितिन श्रीवास्तव ने किया. देहरादून में नितिन के साथ हमारी सहयोगी शालिनी जोशी और राज्य आपदा विभाग के निदेशक पीयूष रौतेला भी मौजूद थे.
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