बिहार के सोनपुर मेले को एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है.
इमेज कैप्शन, सोनपुर मेले को एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है. इस ऐतिहासिक पशु मेले में आज भी बच्चे मज़दूरी करते दिख जाते हैं. सात भाई-बहनों में से पांचवें नबंर के मनोहर पांचवीं में पढ़ते हैं. पिता की मदद के लिए वह मेले में गुब्बारे बेच रहे हैं.
इमेज कैप्शन, यह रश्मि हैं. कभी स्कूल जाती थीं. पिता की टीबी से मौत होने के बाद मां की मदद के लिए होटल में काम करती हैं. इस बार मेले में भीड़ देखकर उन्हें उम्मीद है कि उनकी कमाई थोड़ी अच्छी होगी. रश्मि चाहती हैं कि उनके छोटे भाई-बहन पढ़ते रहें.
इमेज कैप्शन, झुन्नू खिलौने बनाने में अपने बाबा की मदद करते हैं. उनको यकीन है कि अगर वह खिलौने बनाना सीख गए तो बहुत बड़े आदमी बन जाएंगे. वह कभी स्कूल नहीं गए.
इमेज कैप्शन, तेरह साल के ख़ालिद सोनपुर के ही रहने वाले हैं. वह पिछले तीन साल से वह 'फुकन तोतवा' बेच रहे हैं. वह अपने बड़े भाई के साथ इसे खुद ही बनाते और बेचते हैं.
इमेज कैप्शन, यह दोनों बच्चे मेले में लगे एक होटल में काम करते हैं. ये समोसे बनाने के लिए उबले हुए आलू ले जा रहे हैं.
इमेज कैप्शन, मेले के पहले दिन से बांसुरी बेच रहे जीतन कहते हैं कि वो सरकारी स्कूल में नहीं 'बढ़िया' स्कूल में पढ़ना चाहते हैं.
इमेज कैप्शन, चुन्नी और ममता कभी-कभी स्कूल जाती हैं, वो मेले में बकरियों के लिए घास ले जा रही हैं. एक बोरा घास की एवज़ में उन्हें 8-10 रुपए मिल जाते हैं.
इमेज कैप्शन, सोनपुर मेले में दामोदर पिछले चार साल से कचौड़ी, ब्रैड पकौड़े का ठेला लगाने हाजीपुर से आते हैं. हर रात वो ट्रेन से वापस हाजीपुर चले जाते हैं. वो कहते हैं कि मेले के ठेकेदार उनसे हर रोज़ के 50 रुपए लेते हैं, जिससे वो बहुत परेशान हैं.
इमेज कैप्शन, सतरंजन अपने पिता के साथ मेले में मछली-भात बेचते हैं. वो कभी स्कूल नहीं जा पाए, लेकिन वह 'बढ़िया' वाले स्कूल में जाना चाहते हैं. वो बताते हैं कि वो मछली मारने में भी बहुत एक्सपर्ट हैं.
इमेज कैप्शन, विकास और आकाश मेले में सोहन पापड़ी बेचते हैं. आकाश थोड़े दुखी हैं क्योंकि उनकी सोहन पापड़ी अभी आधी भी नहीं बिकी जबकि उनके बड़े भाई ने अपनी सारी सोहन पापड़ी बेच दी है.
इमेज कैप्शन, दो साल पहले किसी मेले में खेल दिखाने के दौरान ममता की बड़ी बहन रस्सी से गिर गई थीं जिससे उनका एक पैर टूट गया था, तब से ममता अपने परिवार के साथ अलग-अलग मेलों में जाकर खेल दिखाती हैं.
इमेज कैप्शन, सोनपुर मेला बिहार के सारण ज़िले में लगता है. हर साल यहां हज़ारों की संख्या में लोग शामिल होते हैं. (सभी तस्वीरें और कैप्शनः फ़ोटो पत्रकार आरज़ू आलम)