इमेज कैप्शन, बीबीसी रूसी सेवा से जुड़े फेदोर तेलकोव ने निनज़ी तागिल शहर में रहने वाले मूक-बधिर लोगों के जीवन की एक झलक अपने कैमरे से कैद की है. इस तस्वीर में शहर के मूक-बधिर क्लब में जमा हुई महिलाएँ आपस में इशारों से बात कर रही हैं.
इमेज कैप्शन, मूक बधिर लोगों के लिए निनज़ी तागिल में कुछ सुविधाएँ हैं, मिसाल के तौर पर एक नर्सरी में उनके लिए एक विशेष ग्रुप बनाया गया है, लेकिन फिर मूक बधिर लोग समाज की मुख्य धारा से जुड़ने में कठिनाई महसूस करते हैं
इमेज कैप्शन, ज्यादातर मूक बधिर लोग सरकारी अनुदान पर जीते हैं, कई परिवार बहुत कम पैसे में अपना गुज़ारा चलाते हैं और तंग फ्लैंटों में रहते हैं.
इमेज कैप्शन, एक विशेष बोर्डिंग स्कूल भी है ऐसे बच्चों के लिए जहाँ वे नृत्य और संगीत सीखते हैं, सुनने में असर्मथ इन बच्चों को संगीत की ध्वनियों को शब्दों की तरह पढ़ना सिखाया जाता है.
इमेज कैप्शन, इनमें से कुछ बच्चों को अभिनय और रूसी भाषा भी सिखाई जाती है लेकिन आम लोगों से संवाद स्थापित करना इनके लिए एक बड़ी चुनौती होती है.
इमेज कैप्शन, चर्च इन लोगों के लिए न सिर्फ़ धार्मिक स्थान है बल्कि इनकी सामाजिक ज़रूरतें और आपसी संवाद की ज़रूरत भी यहीं पूरी होती है, वे चर्च के पादरी के साथ प्रार्थना के बाद चाय पीते हैं.
इमेज कैप्शन, स्थानीय ऑर्थोडॉक्स क्रिश्चियन चर्च में शनिवार को इन लोगों के लिए विशेष प्रार्थना सभा आयोजित की जाती है जिसमें प्रार्थनाएँ इशारों से समझाई जाती हैं.
इमेज कैप्शन, इन लोगों के लिए रोज़गार पाना बहुत मुश्किल है लेकिन निनज़ी तगिल में एक वर्कशॉप है जिसे मूक बधिर लोग ही चलाते हैं, इस वर्कशॉप में धातुओं की कटाई और पॉलिश का काम होता है.
इमेज कैप्शन, इन लोगों के जीवन में काफ़ी अकेलापन है, आपस में मूक बधिर एक दूसरे की हरसंभव सहायता करते हैं, फिर भी कई लोग ऐसे हैं जिन्हें पूरा जीवन असुविधाओं और अभावों में गुज़ारना पड़ता है.