भारत, ब्राज़ील की यूरोपीय संघ के ख़िलाफ़ शिकायत

भारत और ब्राज़ील ने यूरोपीय संघ के ख़िलाफ़ कुछ दवाइयाँ ज़ब्त किए जाने के एक मामले में विश्व व्यापार संगठन के पास अलग-अलग व्यापारिक शिकायतें दर्ज कराई हैं.
यह विवाद भारत में बनी सस्ती दवाइयों पर हुआ जिन्हें वर्ष 2008 में ब्राज़ील को निर्यात किया जा रहा था.
ब्लड प्रेशर यानि रक्त चाप के इलाज के लिए भारत में बनी लोसारटन नाम की सस्ती दवाइयों की एक खेप यूरोप के रास्ते ब्राज़ील भेजी जा रही थी.
लेकिन नीदरलैंड में इन दवाओं को ज़ब्त कर लिया गया. इन्हें दवाइयों के कॉपीराइट के कथित उल्लंघन के मामले में ज़ब्त किया गया.
भारत ने यूरोपीय संघ से कुछ अन्य दवाओं के बारे में भी शिकायते दर्ज की है. भारत और ब्राज़ील का कहना है कि यूरोपीय संघ द्वारा उठाए गए क़दम विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन हैं.
विवादास्पद नियम
विश्व व्यापार संगठन के पेटेंट और कॉपीराइट संबंधी कुछ नियम विवादों के घेरे में रहे हैं क्योंकि यह कहा जाता रहा है कि इनका इस्तेमाल विकासशील देशों को सस्ती दवाइयां बनाने से रोकने के लिए किया जा सकता है.
यूरोपीय संघ के अधिकारियों का कहना है कि उनके नियम पेटेंट और कॉपीराइट के क़ानूनों का उल्लंघन कर बनाई जाने वाली नकली दवाइयों को रोकने के लिए बने हैं.
यूरोपीय संघ ने दोहराया है कि वो ग़रीब देशों में सस्ती दवाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
वहीं दवाई उत्पादन उद्योग में कुछ लोगों का मानना है कि नई दवाईयाँ बनाने में आऩे वाली भारी लागत को वसूल करने के लिए यह नियम ज़रूरी हैं.
यह विवाद अभी शुरुआती चरण में है, यानि जिन देशों के बीच विवाद है वो बातचीत के ज़रिए इसे सुलझा सकते हैं. मगर इसका हल ना निकल पाया तो इसके निपटारे के लिए एक विशेष न्यायिक समिति का गठन करना पड़ सकता है.
अगर न्यायिक समिति का फ़ैसला यूरोपीय संघ के ख़िलाफ़ गया तो उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंध लग सकते हैं.

























