एसिड फ़ैक्टरी के अंदाज़

एसिड फ़ैक्टरी
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हमारी स्मरणशक्ति हमारे अस्तित्व का सबसे अहम पहलू है. क्या हो अगर एक सुबह कोई अपराधी जागे और उसे अहसास हो कि वो सब कुछ भूल चुका है. तो क्या वो अपराध छोड़ देगा?

ऐसी ही कुछ जटिल संभावनाओं को तलाश रही है नौ अक्तूबर को रिलीज़ हुई हिंदी फ़िल्म एसिड फ़ैक्टरी

फ़िल्म में मुख्य भूमिकाएँ निभा रहे हैं इरफ़ान ख़ान, फ़रदीन ख़ान, दीया मिर्ज़ा, मनोज बाजपेयी, डिनो मोरिया, आफ़ताब शिवदासानी, डैनी डेंगज़ोंग्पा और गुलशन ग्रोवर.

अपने सधे हुए अभिनय और आलोचकों के चहेते होने के बावजूद इरफ़ान ख़ान को ऐक्शन फ़िल्में करने में बहुत मज़ा आता है.

एक्शन

इरफ़ान कहते हैं कि उनकी इच्छा ऐक्शन फ़िल्म करने की थी और एसिड फ़ैक्टरी के बाद भी ये इच्छा ख़त्म नहीं होगी.

उन्होंने कहा, "इसके बाद भी आप मुझे ऐक्शन फ़िल्मों में देखेंगे, ऐक्शन फ़िल्मों का एक हिस्सा है. आदमी हर तरह की फ़िल्में करना चाहता है. मेरी गंभीर सिनेमा से शादी थोड़े ही हुई है."

कुछ बेहद चर्चित भारतीय और विदेशी फ़िल्में में अभिनय कर चुके इरफ़ान को दरअसल एक्शन फ़िल्में बेहद पसंद हैं. वो कहते हैं कि उन्हें कार से लटकना, बंदूकें चलाना और कूदना पसंद हैं.

स्टाइल

एसिड फ़ैक्टरी के निर्माता संजय गुप्ता बॉलीवुड में अपने अलग अंदाज़ और भरपूर तकनीक का इस्तेमाल के लिए जाने जाते हैं.

संजय गुप्ता ने काँटे, प्लान, मुसाफ़िर और ज़िंदा जैसी स्टाइलिश फ़िल्मों का निर्देशन किया है और बतौर निर्माता उन्होंने शूटऑउट ऐट लोखंडवाला, वुडस्टॉक विला और दस कहानियां जैसी फ़िल्में बनाईं हैं.

लेकिन इस बार संजय गुप्ता इस फ़िल्म के सिर्फ़ निर्माता हैं और निर्देशन कर रहे हैं सुपर्ण वर्मा जो इससे पहले एक खिलाड़ी एक हसीना बना चुके हैं.

सुपर्ण वर्मा कहते हैं कि उन्हें एक स्टाइलिस्ट थ्रीलर बनाया है जिसमें हर किरदार के लुक पर विशेष ध्यान दिया गया है. वर्मा कहते हैं, "शूटिंग शुरू करने से पहले हमने काफ़ी वक्त अपने किरदारों को एक ख़ास ‘स्टाइल’ देने में वक़्त बिताया."

सुपर्ण वर्मा ने बीबीसी को बताया कि इस फ़िल्म को करने का अनुभव बहुत ही मज़ेदार रहा. उन्होंने कहा कि ये सब चुनौतियों से भरा था. केप टाउन में हुई शूटिंग में भरपूर ऐक्शन है जहाँ अभिनेताओं ने अपनी जान जोख़िम में डाल कर स्टंट किए हैं.

इस फ़िल्म में मनोज बाजपेयी भी हैं जिन्हें आप बैंडिट क्वीन, सत्या, कौन, शूल और पिंजर गंभीर फ़िल्में की हैं.

एसिड फ़ैक्टरी
इमेज कैप्शन, एसिड फ़ैक्टरी में हर किरदार के 'लुक' पर ख़ास ध्यान दिया गया है

बाजपेयी कहते हैं कि वो हमेशा ही संजय गुप्ता की फ़िल्म में काम करना चाहते थे क्योंकि गुप्ता अपनी फ़िल्मों में मर्दों को उतना ख़ूबसूरत दिखाते हैं, जितना यश चोपड़ा अपनी फ़िल्मों में औरतों को.

वैसे इस फ़िल्म के बारे क्यो सोचते हैं मनोज बाजपेयी? मनोज कहते हैं, "मैं व्यक्तिगत तौर पर सोचता था कि ऐसी फ़िल्म को शूट करना बहुत मुश्किल होगा. क्योंकि इसमें इतने सारे ऐक्टर हैं. लेकिन आपको ईमानदारी से बताऊं कि ये सभी ऐक्टर बहुत अच्छे हैं. उनका मेरे साथ व्यवहार बहुत अच्छा था. मैंने इस फ़िल्म के दौरान फ़रदीन ख़ान और डिनो मोरिया जैसा जीवन भर के दोस्त पाए."

फ़रदीन ख़ान तो इसे बिल्कुल हटकर फ़िल्म मानते हैं. फ़रदीन कहते हैं कि जिस तरह इस फ़िल्म की कहानी कही गई है, वो हिंदी फिल्मों में उनके हिसाब से पहले कभी नहीं हुई है.