जामिया में छात्र क्यों कर रहे हैं भूख हड़ताल, क्या हैं मांगें और प्रशासन का क्या है रुख़?

जामिया में भूख हड़ताल पर बैठे छात्र
इमेज कैप्शन, जामिया मिल्लिया इस्लामिया में चार छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं
    • Author, अरशद मिसाल
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
    • ........से, दिल्ली
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 9 मिनट

जामिया मिल्लिया इस्लामिया (जेएमआई) यूनिवर्सिटी के छात्र पिछले सात दिनों से स्टूडेंट यूनियन की बहाली की मांग को लेकर कैंपस में प्रदर्शन कर रहे हैं. कई छात्र अनशन पर भी बैठे हुए हैं. पहले दिन की तुलना में धरना स्थल पर छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ी है.

दरअसल, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में करीब आठ साल बाद स्टूडेंट यूनियन के चुनाव होने जा रहे हैं. स्टूडेंट्स के प्रदर्शन और करीब 20 दिनों तक चली भूख हड़ताल के बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन को झुकना पड़ा. एएमयू छात्र संघ चुनाव के लिए 5 नवंबर को वोटिंग होगी.

एएमयू में स्टूडेंट यूनियन की बहाली के बाद जामिया में भी प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. छात्रों का कहना है कि इससे उन्हें प्रेरणा मिली है और वे छात्र संघ बहाल कराकर ही रहेंगे.

हालांकि, जामिया में इससे पहले भी छात्र संघ की बहाली को लेकर कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं, लेकिन अब तक चुनाव नहीं हो सके हैं.

जामिया में 1996 के बाद दिसंबर 2005 में स्टूडेंट यूनियन के चुनाव कराए गए थे. जामिया के तत्कालीन वाइस चांसलर मुशीरुल हसन ने यूनियन का चुनाव कराने की इजाज़त दी थी.

लेकिन 31 मार्च 2006 को जामिया स्टूडेंट्स यूनियन के दफ़्तर को सील कर दिया गया. इसके बाद से जामिया में यूनियन के चुनाव नहीं हो सके.

जामिया छात्र संघ के पदाधिकारी

यूनिवर्सिटी प्रशासन ने शनिवार को बीबीसी को बताया, "दिल्ली हाई कोर्ट ने साल 2022 में भी पाया था कि स्टूडेंट यूनियन प्रोडक्टिव नहीं है. साथ ही, हाई कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को चुनाव कराने का कोई निर्देश नहीं दिया था."

वहीं जामिया ने आधी रात को प्रेस रिलीज़ जारी कर बताया कि जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने छात्रों की मांगों पर चर्चा करने और कैंपस में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति बनाई है.

प्रेस रिलीज़ के मुताबिक़, 18 अक्तूबर को कुलपति प्रो. मज़हर आसिफ, रजिस्ट्रार प्रो. मोहम्मद महताब आलम रिज़वी, विभिन्न संकायों के डीन, डीन ऑफ स्टूडेंट्स वेलफेयर, चीफ़ प्रॉक्टर, हॉस्टल के प्रोवोस्ट और अन्य अधिकारियों की बैठक हुई.

इसमें भूख हड़ताल और प्रदर्शन कर रहे छात्रों की मांगों पर विचार किया गया. समिति छात्रों से बातचीत करेगी, उनकी मांगों की जाँच करेगी और परिसर में शांति बहाल करने के लिए ज़रूरी कदम उठाएगी.

स्टूडेंट यूनियन की बहाली को लेकर चार छात्र भूख हड़ताल पर

जामिया में छात्र संघ बहाली को लेकर प्रदर्शन
इमेज कैप्शन, जामिया में यूनियन की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन करते स्टूडेंट्स

12 अक्टूबर से छात्र संघ के चुनाव कराने की मांग को लेकर जामिया के गेट नंबर 7 के अंदर प्रदर्शन जारी है.

इंटरनेशनल स्टडीज़ के छात्र जासिम ख़ान और बीए एलएलबी के छात्र एबिन बासिल पहले दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं.

वहीं, चार दिन बाद मास्टर्स ऑफ़ सोशल वर्क के छात्र रेहान हैदर और बीए ऑनर्स जियोग्राफी के छात्र रेहान ख़ान भी उनके साथ भूख हड़ताल पर बैठ गए.

17 अक्टूबर की सुबह तड़के प्रदर्शन कर रहे इन छात्रों को जामिया के गार्ड्स ने कथित तौर पर जबरन कैंपस से बाहर कर दिया और कैंपस बंद कर दिया गया.

इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र वहां पहुँचे और ज़बरदस्ती कैंपस में दाख़िल हुए. तब से प्रदर्शन जारी है.

भूख हड़ताल पर बैठे जासिम ख़ान ने बताया कि उनकी तीन मांगें हैं.

बीबीसी से बात करते हुए उन्होंने कहा, "हमारी पहली मांग जामिया छात्र संघ की बहाली है. दूसरी मांग यह है कि जिन छात्रों को सस्पेंड किया गया है या जिनके कैंपस में आने पर प्रतिबंध लगाया गया है, उन फ़ैसलों को वापस लिया जाए."

जासिम ख़ान
इमेज कैप्शन, भूख हड़ताल पर बैठे जासिम ख़ान ने कहा कि जामिया को अभी छात्र संघ की सख़्त ज़रूरत है

उन्होंने कहा, "हमारी तीसरी मांग है कि जामिया के प्रॉक्टर इस्तीफ़ा दें, क्योंकि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से बैठे स्टूडेंट्स पर कार्रवाई करवाई है."

वहीं, एनएसयूआई से जुड़े एबिन ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगें नहीं मान ली जातीं, तब तक वे प्रदर्शन ख़त्म नहीं करेंगे.

इबिन बासिल
इमेज कैप्शन, एबिन बासिल ने बताया कि प्रदर्शन की वजह से उन्हें एक साल के लिए कैंपस से निष्कासित कर दिया गया

एबिन ने बताया, "अभी तक हमसे बात करने के लिए प्रशासन की ओर से कोई नहीं आया है. कल हमें जबरन कैंपस से बाहर निकाल दिया गया और उसके बाद मुझे एक साल के लिए कैंपस से निष्कासित कर दिया गया."

एबिन ने यह भी बताया कि मांग किए जाने के बावजूद जामिया प्रशासन ने अब तक छात्रों के लिए किसी तरह की मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं कराई है. छात्रों ने ख़ुद ही मेडिकल चेकअप की व्यवस्था की है.

यूनियन की बहाली की मांग क्यों?

छात्र संघ की बहाली को लेकर जामिया में छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं
इमेज कैप्शन, कुछ स्टूडेंट्स का कहना है कि यूनियन बहुत जरूरी है क्योंकि हर काम के लिए दफ़्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं
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जामिया में छात्र संघ नहीं है, लेकिन इसकी जगह विभागों के स्तर पर चुनाव होते हैं.

हर क्लास में दो क्लास रिप्रेज़ेंटेटिव होते हैं. एक इलेक्टेड होता है और दूसरा क्लास का टॉपर होता है. और फिर विभाग के स्तर पर वाइस प्रेसिडेंट, जनरल सेक्रेटरी और जॉइंट सेक्रेटरी चुने जाते हैं.

वहीं, प्रेसिडेंट का चुनाव नहीं होता, क्योंकि इस कमिटी के अध्यक्ष संबंधित विभाग के हेड ऑफ़ डिपार्टमेंट होते हैं.

जासिम का कहना है कि जामिया में छात्र संघ की सख़्त ज़रूरत है.

उन्होंने बताया, "हर चीज़ पर कारण बताओ नोटिस दिया जाता है. हमारा कोई प्रतिनिधि नहीं है. एक लड़की को सेमेस्टर के बीच में हॉस्टल से निकाल दिया गया और उसकी आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है."

उन्होंने कहा, "गर्ल्स हॉस्टल हो या बॉयज़ हॉस्टल, यहां खाने को लेकर कोई सुनवाई नहीं होती. अगर कोई विरोध प्रदर्शन करता है, तो उसे कारण बताओ नोटिस दिया जाता है."

उन्होंने कहा कि इन समस्याओं को हल करने के लिए ही उन्हें स्टूडेंट यूनियन की ज़रूरत है.

वहीं जामिया की छात्रा अलका हसन कहती हैं, "स्टूडेंट यूनियन बहुत ज़रूरी है. हमें काम के लिए दफ़्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं. अगर हमारा प्रतिनिधि होता, तो ऐसा नहीं होता. यह हमारा अधिकार है."

पूर्व अध्यक्ष बोले- धांधली नहीं कर पा रहे थे, इसलिए यूनियन बैन किया

पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शम्स परवेज़
इमेज कैप्शन, जामिया के तत्कालीन वाइस चांसलर मुशीरुल हसन के साथ पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शम्स परवेज़

जामिया के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष शम्स परवेज़ ने इस बात से इनकार किया कि हिंसा की वजह से स्टूडेंट के चुनाव पर प्रतिबंध लगाया गया था.

उन्होंने बीबीसी से बातचीत में बताया कि 1996 के बाद पहली बार दिसंबर 2005 में छात्र संघ के चुनाव हुए थे.

उनके मुताबिक, "चुनाव के बाद नियुक्तियों और नौकरियों में होने वाला भ्रष्टाचार खत्म हो गया था, जिससे प्रशासन के लोग परेशान थे."

उन्होंने आरोप लगाया कि इसी वजह से 31 मार्च 2006 को जामिया स्टूडेंट यूनियन के दफ़्तर पर ताला लगाकर उसे सील कर दिया गया. उस समय तक किसी तरह की मारपीट या लड़ाई नहीं हुई थी.

जामिया ने उस समय इसकी वजह जेएमआईएसयू के नियमों को बताया था. यूनिवर्सिटी का कहना था कि 31 मार्च के बाद छात्र संघ का कार्यकाल ख़त्म हो गया था.

शम्स परवेज़
इमेज कैप्शन, दिसंबर 2005 में शम्स परवेज़ जामिया छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए थे

शम्स परवेज़ ने बताया, "जामिया में छात्रों के दाख़िले में धांधली के मुद्दे पर जब वह 19 जुलाई को वाइस चांसलर के दफ़्तर गए, तो उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें बुरी तरह पीटा गया. इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती होना पड़ा."

उन्होंने बताया कि इसके बाद जामिया में बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ हुई.

उन्होंने दावा किया कि प्रशासन ने बाहर से लोगों को बुलाकर छात्रों को उकसाया, जिसके बाद तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं.

उन्होंने बताया कि तोड़फोड़ के समय वह जामिया में मौजूद नहीं थे, बल्कि अस्पताल में भर्ती थे. इसके बावजूद उन्हें हॉस्टल से निकाल दिया गया और कैंपस में उनके प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया.

स्टूडेंट यूनियन की बहाली के लिए पहले भी हो चुके हैं प्रदर्शन

मीरान हैदर
इमेज कैप्शन, साल 2017 में स्टूडेंट्स यूनियन की बहाली की मांग को लेकर मीरान हैदर ने 10 दिनों तक भूख हड़ताल की थी

सितंबर 2017 में जामिया के छात्र मीरान हैदर ने छात्र संघ के चुनाव कराने की मांग को लेकर 10 दिनों तक भूख हड़ताल की थी.

भूख हड़ताल के नौवें दिन तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके बाद उन्होंने भूख हड़ताल ख़त्म कर दी थी.

उस समय जामिया प्रशासन ने मामला अदालत में लंबित होने की बात कहते हुए स्टूडेंट यूनियन बहाल करने से इनकार कर दिया था.

दरअसल, साल 2012 में जामिया के छात्र हामिदुर रहमान ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर छात्र संघ के चुनाव कराने की मांग की थी.

20 दिसंबर 2022 को दिल्ली हाई कोर्ट ने हामिदुर रहमान बनाम जामिया मिल्लिया इस्लामिया मामले में दायर जनहित याचिका का निपटारा कर दिया.

सुनवाई के दौरान जामिया के वकील ने अदालत को बताया कि विश्वविद्यालय में स्टूडेंट यूनियन भंग कर दिया गया है और चुनाव कराने का सवाल ही नहीं उठता.

जेएनयू में भी पिछले 16 दिनों से प्रदर्शन

जेएनयू में प्रदर्शन करते छात्र
इमेज कैप्शन, जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति, गुलाम वारिस (कन्वेनर, जेएनयूएसयू), तनुज और धनंजय पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में भी स्टूडेंट्स पिछले 16 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. कई स्टूडेंट भूख हड़ताल पर बैठे हैं.

छात्र चीफ़ प्रॉक्टर्स ऑफ़िस मैनुअल को वापस लेने, जेएनयू छात्र संघ के पदाधिकारियों का निष्कासन रद्द करने, जीएसकैश को प्रभावी बनाने और जेएनयू की प्रवेश परीक्षा बहाल करने की मांग कर रहे हैं.

जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष अदिति, गुलाम वारिस (कन्वेनर, जेएनयूएसयू), तनुज और धनंजय पिछले 16 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं.

गुलाम वारिस ने बीबीसी हिंदी से बात करते हुए कहा, "हम चाहते हैं कि शिक्षा का केंद्रीकरण बंद हो और दाख़िले के लिए जेएनयू एंट्रेंस एग्ज़ाम कराया जाए, क्योंकि इससे दूर-दराज़ के हाशिए पर रहने वाले छात्रों को फ़ायदा मिलता था."

उन्होंने कहा कि जब तक जेएनयू प्रशासन इन मांगों को नहीं मानता, तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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