ख़ास नहीं भाया बॉलीवुड को 2009

- Author, वंदना
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
- प्रकाशित
मेरे पास माँ है- अमिताभ की फ़िल्म दीवार का ये दमदार डॉयलॉग सुनते-सुनते कई पीढ़ियाँ बच्चों से जवान और जवान से बूढ़े हो गईं. अब अमिताभ बच्चन ने आज की पीढ़ी को नया डॉयलॉग दे दिया है- मेरे पास पा है......
पा जैसी चंद फ़िल्मों को छोड़ दें तो 2009 में अच्छी या सफ़ल फ़िल्मों की फ़ेहरिस्त शायद ज़्यादा लंबी न हो.
भारत में सिनेमा और दर्शकों का एक प्यारा और भावनात्मक या एमोशनल सा रिश्ता रहा है. लेकिन जिस तरह की फ़िल्में 2009 में देखने को मिलीं उन्हें देखकर तो दिल शायद फ़िल्म देव डी का यही तराना छेड़ेगा- तौबा तेरा जलवा, तौबा तेरा प्यार, तेरा इमोशनल अत्याचार.
वैसे फ़िल्म उद्योग के साथ भी 'अत्याचार' कम नहीं हुआ.साल के शुरु में मंदी की मार ने सबको अपनी चपेट में लिया, फ़िल्म निर्माताओं की हड़ताल ने तो फ़िल्म उद्योग की कमर ही तोड़ दी. एक अनुमान के मुताबिक करीब 80 से 90 करोड़ रुपये का घाटा हुआ.
फिर स्वाइन फ़्लू के आंतक ने कुछ हफ़्तों तक सिनेमाघरों को खाली रखा.और तो और बड़े बैनर की फ़िल्में इस साल दे दना दन फ़्ल़ॉप हुई. आम रुझान के उलट इस साल हॉलीवुड की फ़िल्मों ने भारत में काफ़ी अच्छा कारोबार किया. इसमें 2012 और अवतार जैसी फ़िल्में शामिल हैं जिन्होंने कई हिंदी फ़िल्मों से भी ज़्यादा कमाई की.

हड़ताल ने किया बेहाल
बॉक्स ऑफ़िसि पर न ब्लू के अंडरवाटर स्टंट काम आए, न वाट्स युअर राशि में 12 प्रियकांओं का कमाल चला, न लोग सैफ़ और करीना की जोड़ी पर क़ुर्बान हुए और न अलादीन का जिनी बॉक्स ऑफ़िस पर कोई जादू मंतर कर पाया.
हर साल फ़िल्म उद्योग चंद बड़े सितारों की बड़ी बैनर वाली फ़िल्मों पर निर्भर करता है कि ये फ़िल्में बॉक्स ऑफ़िस को मालामाल कर देंगी. 2009 के शुरु में अक्षय कुमार ने चांदनी चौक से चाइना तक का सफ़र करवाया. लंदन में इसके प्रीमियर में अक्षय कुमार ने इंटरव्यू के दौरान मुझे बताया था कि वार्नर ब्रदर्स दुनिया भर में इसके प्रीमियर करवा रहा है, कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी.
लेकिन ये फ़िल्म ऊँची दुकान फ़ीका पकवान साबित हुई. बादशाह शाहरुख़ खान भी फ़रवरी में आई फ़िल्म बिल्लू के ज़रिए कुछ ख़ास नहीं कर पाए.. कंधे की चोट के कारण इसके बाद तो साल भर शाहरुख़ की कोई फ़िल्म रिलीज़ ही नहीं हुई.
वैसे जब इंडस्ट्री को हिट की तलाश हो तो आप भट्ट कैंप की विशेष फ़िल्मस पर भरोसा कर सकते हैं. राज़ की सफलता को दोहराते हुए 'राज़ द मिस्ट्री कॉन्टीन्यूज़' हिट साबित हुई.
अनुराग कश्यप के आधुनिक देवदास यानी देव डी ने पारो और चंदा के साथ मिलकर ख़ूब हंगामा मचाया और ब्रास बैंड पर बजा गाना इमोशनल अत्याचार शायद इस साल का सबसे चर्चित फ़िल्मी शब्द बना.
हिट कम फ़्लॉप ज़्यादा

साल के मध्य में आते-आते जब लगने लगा था कि पटरी गाड़ी पर आने लगी है तो मल्टीप्लेक्स मालिकों और निर्माताओं के विवाद ने खेल बिगाड़ दिया.
कई महीनों तक फ़िल्में रिलीज़ नहीं हुई और कारोबार का अच्छा ख़ासा नुकसान हुआ. आख़िरकार जब हड़ताल ख़त्म हुई तो फ़िल्मों का ऐसा अंबार लगा कि वो एक दूसरे की कमाई में सेंध लगाने लगी. स्वाइन फ़्लू के डर के कारण कई शहरों में सिनेमाघर बंद भी रहे.
हड़ताल के बाद रिलीज़ हुई बिग बजट की कई फ़िल्मों ने अच्छा कारोबार किया तो बॉक्स ऑफ़िस पर कुछ खनक सुनाई दी. राहत की बात ये रही कि बाक़ी उद्योगों के मुकाबले मंदी का असर फ़िल्म उद्योग पर कमोबेश कम रहा.
ख़राब दौर से गुज़र रहे यशराज बैनर को भी हिट नसीब हुई- न्यूयॉर्क. कैटरीना और जॉन अब्राहम को ऐसे लोगों की तारीफ़ मिली जो कहते आऐ हैं कि इनमें स्टाइल तो है पर सबस्टांस नहीं. सैफ़ के निर्माण में बनी पहली फ़िल्म लव आजकल बंपर हिट साबित हुई.
फिर गुड लक की गुल्लक लेकर आई विशाल भारद्वाज की फ़िल्म कमीने. फ़िल्म ने 'फ़ाहिद' कपूर और प्रियंका चोपड़ा के करियर को चार चाँद लगाए तो लोगों ने विशाल भारद्वाज को बॉलीवुड का टेरेनटिनो कहा.
सलमान खान जब बरसों बाद एक्शन हीरो के रोल में दिखे तो बॉक्स ऑफ़िस पर वांटेड बन गए और ख़ूब कमाई की.
हॉलीवुड ने भी लगाई सेंध

2009 में आम तौर पर धंधा तो मंदा था ही, ऐसे में हॉलीवुड ने भी भारतीय फ़िल्मों के कारोबार में सेंध लगाई. जेम्स कैमरून की अवतार में एलियंस ने बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा ख़ासा धावा बोला. 2012 और हैरी पॉटर की नई फ़िल्म समेत कई हॉलीवुड फ़िल्मों ने तो किसी भी बॉलीवुड फ़िल्म से ज़्यादा कमाई कर डाली.
इस सब के बीच एक अभिनेता जिसने साँवरिया के लवर ब्वॉय से ख़ुद को एक बेहरतीन और हरफ़नमौला अभिनेता साबित किया वो रहे रणबीर कपूर. वेक अप सिड को आलोचकों ने ख़ूब सराहा तो राज कुमार संतोषी की 'अजब प्रेम की ग़ज़ब कहानी' ने बॉक्स ऑफ़िस पर ग़ज़ब कर दिया.
उधर 68 साल के अमिताभ ने ख़ुद को रिइन्वेंट किया—एक 13 साल के बच्चे के रूप में. फ़िल्म पा में किए प्रयोग को आलोचकों की काफ़ी सराहना मिली. क्रिसमस की ख़ुशियों को तीगुना कई आमिर खान की नई 2 इडियट्स ने जिसे बेहद अच्छी ओपनिंग मिली.
लेकिन इस बार का दीवाली बंपर कुछ फ़ीका रहा. हर साल दीवाली पर बड़ी फ़िल्में रिलीज़ होती है. लेकिन इस बार दीवाली और उसके बाद आई फ़िल्में कोई धमाका न कर सकीं. सलमान-अजय की लंदन ड्रीम्स धराशायी हो गई, मिस्टर और मिसिज़ खन्ना भी पिटी. केवल अजय की ऑल द बेस्ट ही चल पाई.
अब 2010 में आने वाली फ़िल्मों के लिए भी हम यही कह सकते हैं कि ऑल द बेस्ट.....
( 2010 में इश्कियाँ,माई नेम इज़ खान, काइट्स, वीर, तीन पत्ती, एक्शन रीप्ले, रावण जैसी फ़िल्में आएँगी..)

























