'साहसिक खेल' है दही हांडी

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- Author, आयुष देशपांडे
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिन्दी डॉट कॉम के लिए
- प्रकाशित
महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम फ़ैसले में जन्माष्टमी के दौरान मनाए जाने वाले 'दही हांडी महोत्सव' को ‘साहसिक खेल’ की संज्ञा दी है.
मानव पिरामिड बना कर उंचाई पर लटकी एक दही से भरी मटकी को फोड़ने के इस खेल को अभी तक किसी करतब सरीखा समझा जाता था.
हालांकि हाईकोर्ट की ओर से 12 साल से कम उम्र के बच्चों के इस खेल में शामिल नहीं होने की रोक यथावत बनी रहेगी साथ ही 12 से 15 साल की उम्र के लड़के-लड़कियों को इस खेल में शामिल होने के लिए अभिभावकों से अनुमति लेनी होगी.
उत्सव नहीं खेल

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महाराष्ट्र खेल मंत्री विनोद तावड़े ने बुधवार को दही हंडी उत्सव को साहसिक खेलो की उपाधि देते हुए एक प्रेस कांफ़्रेंस में कहा, "यह उत्सव जिसमे युवा मानव पिरामिड बनाते हैं अब सिर्फ़ जनमाष्टमी तक ही सीमित नहीं रहेगा बल्कि एक खेल के रूप मे वर्ष भर खेला जा सकेगा."
मुंबई की विले पार्ले दही हांडी समूह की अध्यक्ष गीता जगाड़े ने बीबीसी से बात करते हुए ख़ुशी जताई और कहा, "हम महाराष्ट्र सरकार के आभारी हैं जो उन्होने दही हांड़ी की तरफ़ अपना ध्यान बढ़ाया, इससे और भी युवा इसकी तरफ़ अपनी रूचि दिखाएँगे."
सुरक्षा

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कई बार गोविंदाओं (मानव पिरामिड बनाने वाले खिलाड़ी) के '10 स्तर' उंचे पिरामिड बनाएं जाते हैं और इसमें कई बार गिरने की वजह से चोटिल होने की घटनाओं के कारण इनकी आलोचना भी होती है.
इस मुद्दे पर महाराष्ट्र सरकार के अधिकारी गोविंद येतेकर ने बीबीसी को बताया की यह फ़ैसला सुरक्षा को मद्दे नज़र रखते हुए लिया गया है.

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वो कहते हैं, "जो भी बच्चे इस खेल में भाग लेना चाहते है उन्हे पहले अपने माता पिता से अनुमति लेनी होगी, और स्कूल प्रशासन को भी आदेश दिए गए हैं कि अगर आप इस खेल को अपने स्कूल में लागू करते है तो सुरक्षा को मद्दे नज़र रखते हुए करे."
साथ ही सभी दही हांडी आयोजकों को खिलाड़ियों का बीमा करवाने और चोटिल होने पर चिकित्सकीय सामग्री उपलब्ध रखने के भी सख़्त आदेश दिए गए हैं.
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