'कॉलेज ने दाढ़ी कटाने या कोर्स छोड़ने का दबाव डाला'

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मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले के अरिहंत होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के छात्र असद ख़ान ने दाढ़ी रखने की वजह से कॉलेज में उस पर दबाव बनाए जाने और इसीलिए उसके वहाँ पढ़ाई न कर पाने का आरोप लगाया है.
कॉलेज के प्राचार्य एमके जैन ने आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि छात्र ने कॉलेज से ट्रांस्फ़र लेने का आवेदन दिया था, और उसे ट्रांस्फ़र सर्टिफ़िकेट दे दिया गया है.
बड़वानी के ज़िलाधिकारी तेजस्वी एस नायक ने बीबीसी को बताया कि छात्र ने शिकायत दी थी कि दाढ़ी रखने के कारण उसके साथ भेदभाव हुआ और इस मामले की जांच की जा रही है.
उन्होंने कहा कि संबंधित कॉलेज में स्कॉलरशिप से जुड़े एक मामले की जांच भी चल रही है जिसके साथ इस जांच को भी जोड़ दिया गया है.
छात्र असद ख़ान ने बीबीसी को बताया कि उन्होंने दिसंबर 2013 में प्रवेश परीक्षा के ज़रिए इस कॉलेज में दाख़िला लिया था. तब उन्होंने दाढ़ी नहीं रखी थी.

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असद का कहना है कि कॉलेज के प्राचार्य एमके जैन ने उन पर बार-बार दाढ़ी कटवाने का दबाव बनाया.
असद ने बीबीसी से बात करते आरोप लगाया- "मैंने तीन महीनों तक इसे नज़रअंदाज़ किया. वे दबाव बनाते रहे, मुझे क्लास से बाहर भी निकाल दिया जाता था जब मैंने कहा कि दाढ़ी रखना मेरा अधिकार है और मैं नहीं कटवाउंगा तो मेरे कॉलेज में घुसने पर ही रोक लगा दी गई."
वहीं कालेज के प्राचार्य एमके जैन ने कहा- "हमने कभी दाढ़ी कटवाने के लिए दबाव नहीं बनाया. हमारे कॉलेज में और छात्र भी दाढ़ी रखते हैं."
असद ने अपनी शिकायत के साथ ज़िला प्रशासन को फ़ोन कॉल का रिकार्ड और प्राचार्य के साथ बातचीत की र्ऑडियो सीडी सबूत के तौर पर पेश की हैं.
अगस्त 2016 में कॉलेज ने असद को ट्रांस्फ़र सर्टिफ़िकेट दे दिया लेकिन असद ने आरोप लगाया- "कॉलेज ने दूसरे वर्ष की मेरी उपस्थिति ज़ीरो दिखा दी है जिसकी वजह से मैं कहीं दाख़िला नहीं ले सकता हूँ. ये सरासर ग़लत है इसकी जांच होनी चाहिए."
मीडिया में रिपोर्टें आने के बाद इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर भी टिप्पणियां की जा रही हैं.
वसीम त्यागी ने फ़ेसबुक पर लिखा, "मास्टर साहब तो हाथ में कलावा बांधकर, माथे पर तिलक लगाकर कॉलेज आ सकते हैं और असद दाढ़ी रखकर कॉलेज नहीं आ सकता. मास्टर साब की आस्था आस्था है और असद की?"
दिल्ली के सामाजिक कार्यकर्ता नदीम ख़ान का कहना है कि वो इस मामले को लेकर इंदौर हाई कोर्ट में जाएंगे.
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