मुंबई: हाई टाइड क्या है और कैसे बनती है?

इमेज स्रोत, AFP
मुंबई में बारिश एक बार फिर कहर बरपा रही है. लगातार तेज़ बारिश ने मायानगरी के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा कर दी है.
लेकिन भारी वर्षा के अलावा बार-बार एक बात का ज़िक्र हो रहा था कि हाई टाइड आने वाली है और उससे हालात और बिगड़ सकते हैं.
लेकिन हाई टाइड क्या होती है और कैसे बनती है, ये सवाल आपके ज़हन में आया.
आख़िर ऐसा क्या होता है कि अचानक लहरें उफ़ान मारने लगती हैं और समंदर किनारे से टकराकर खौफ़नाक दृश्य बनाती हैं.
चांद और सूरज का क्या रोल?
हाई टाइड या उच्च ज्वार आना या समंदर का स्तर बढ़ना-घटना, चंद्रमा और सूरज से पैदा होने वाले गुरुत्वाकर्षण बल और पृथ्वी के चक्कर लगाने के संयुक्त कारणों का नतीजा है.

इमेज स्रोत, AFP
आमतौर पर टाइड समंदर के स्तर में छोटी अवधि में आने वाले बदलावों का सबसे बड़ा स्रोत होती हैं, लेकिन तेज़ हवाओं और बैरोमैट्रिक दबाव में आने वाले बदलाव का असर भी समंदर के स्तर पर पड़ता है.
इसकी वजह से समंदर में तूफ़ान भी उठते हैं, ख़ास तौर से तटीय इलाकों और छिछले पानी में ये असर ज़्यादा देखने को मिलता है.
और टाइड से जुड़ी ये प्रक्रिया सिर्फ़ समंदर तक सीमित नहीं बल्कि उन दूसरे सिस्टम में भी देखने को मिलती है जहां ग्रैविटेशनल फ़ील्ड है.
वो टाइड जो हमें नहीं दिखतीं
मसलन, पृथ्वी के कुछ हिस्सों में भी टाइड का असर देखने को मिलता है, हालांकि ये पानी की टाइडल मूवमेंट की तरह हमें आसानी से दिखती नहीं है.

ज़्यादातर लोगों को लगता है कि टाइड बनने की वजह चंद्रमा या उसका गुरुत्वाकर्षण बल है और सूर्य का ग्रैविटेशनल इफ़ेक्ट भी इसमें अहम भूमिका अदा करता है.
लेकिन जिस कारण की कम चर्चा होती है, वो है पृथ्वी के घूमने से पैदा होने वाला बल. हाई टाइड बनने और उन्हें बनाए रखने में ये बड़ा अंतर पैदा करता है.
लहरों की ताक़त
लहरों की ताक़त तटीय बदलाव में सबसे अहम साबित होती है. ये लहरें समंदर की सतह पर चलने वाली तेज हवाओं से बनती है. जब समंदर के क़रीब हवा बहती है तो घर्षण पैदा होता है जिससे पानी में उभार जैसी स्थिति बनती है.
हवा की एनर्जी पानी के कणों को घुमाती है जिसकी वजह से लहर आगे बढ़ती है. लहर का आकार और ताक़त इन चीज़ों पर निर्भर करती है:
- हवा कितनी देर से चल रही है
- हवा कितनी तेज़ है
- लहर कितनी दूर तक जाती है
लहरें डिस्ट्रिक्टिव या कंस्ट्रक्टिव दो तरह की होती हैं. जब लहर टूटती है तो पानी समंदर किनारे तक आता है. इसे स्वैश कहा जाता है. जब पानी लौटता है तो इसे बैकवॉश कहते हैं.
कितनी ऊंची टाइड?

इमेज स्रोत, AFP
astronomyknowhow.com के मुताबिक सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी के घूमने जैसी बड़ी ताक़तों के अलावा टाइड के लिए समंदर की तटीय रेखा और उसकी सतह का उतार-चढ़ाव भी ज़िम्मेदार है.
इसकी वजह से हर जगह दिन में दो बार नहीं बल्कि उससे ज़्यादा बार टाइड आती है. ऐसा कहा जाता है कि सबसे ऊंचा ज्वारभाटा कनाडा में दर्ज किया गया. यहां लहरों की ऊंचाई 17 मीटर तक थी.
फ़ंडी की खाड़ी और उंगवा बे की मशहूर टाइड के बीच लंबे वक़्त तक मुकाबला रहा जिसके बाद कैनेडियन हाइड्रोग्राफ़िक सर्विस ने दोनों के बीच बराबरी का फ़ैसला सुनाया.
ज़्यादातर लोगों का मानना है कि भूमध्यसागर के इलाके में टाइड नहीं उठती. ये सच है कि यहां टाइड बहुत छोटी होती हैं और कई बार इन्हें देखना काफ़ी मुश्किल हो जाता है.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)























