'बढ़े हुए रुतबे' के साथ चीन जा रहे हैं मोदी!

मोदी जिनपिंग
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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज ब्रिक्स (ब्राज़ील, रूस, इंडिया, चीन और दक्षिण अफ्रीका) देशों के सम्मेलन में हिस्सा लेने चीनी शहर शियामन पहुचेंगे.

इस दौरान पीएम मोदी की मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिपिंग से भी होगी.

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की ये मुलाकात दोनों देशों के बीच 74 दिन चले डोकलाम विवाद के समाधान के बाद होगी.

डोकलाम में भारत और चीन के सैनिक आमने-सामने थे और युद्ध तक की बातें होने लगी थीं.

चीन में मौजूद वरिष्ठ पत्रकार सैबल दास गुप्ता मानते हैं के दोनों नेता इस अहम मुलाक़ात के दौरान असहज ज़रूर होंगे.

भारतीय सैनिक

सैबल दास गुप्ता के मुताबिक, ''चीन की मीडिया में बार-बार ये बाद बताई जा रही है कि जापानी प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे जल्द ही भारत आ रहे हैं. चीन और जापान के बीच रिश्ते ख़राब हैं. ये दर्शाने की कोशिश की जा रही है कि जापान के प्रधानमंत्री से मिलकर एक तरीके से चीन के ख़िलाफ़ खेल खेल रहे हैं."

सैबद मानते हैं कि डोकलाम के बाद दोनों देशों के बीच विश्वास टूट गया है, लेकिन मोदी जब चीन जाएंगे तो उनका क़द कुछ ऊंचा होगा.

सैबल कहते हैं, "सिर्फ़ चीन ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की नज़र में मोदी का क़द बढ़ गया है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय में ये संदेश गया है कि भारत दस सप्ताह से अधिक समय तक चीन की आंखों में आंखें डालकर देखता रहा है. डोकलाम में ये साबित हुआ है कि पहली बार कोई देश दस सप्ताह तक चीन के सामने डटकर खड़ा रहा है. इससे न सिर्फ़ चीन बल्कि रूस और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों की नज़र में भी भारत का रुतबा बढ़ गया है."

मोदी जिनपिंग

दोनों नेताओं की इस मुलाकात से चीन और भारत दुनिया को ये संदेश भी देना चाहते हैं कि दोनों देशों के नेताओं में कोई मतभेद नहीं हैं और मुद्दों को शांति से सुलझाना चाहते हैं.

चीन के विदेश मंत्री वांग की ने एक प्रेस वार्ता में कहा था कि दो पड़ोसियों में मतभेद होते रहते हैं, लेकिन हमें साथ चलना है और साथ आगे बढ़ना है. चीन ने ये साफ़ संकेत दिया है कि वह भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है.

दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात औपचारिक ही होगी और इससे ये उम्मीद नहीं की जा सकती है कि कोई बड़ा समाधान इस बैठक से निकले.

चीन और भारत के सैनिक

वरिष्ठ विश्लेषक अनुराधा चिनॉय कहती हैं, "अगर कोई समाधान निकालना है तो उसके लिए बहुत तैयारी की ज़रूरत है. दोनों नेता बीते साल भी मिले थे, ऐसे में ये मुलाकात द्वीपक्षीय शिष्टाचार भेंट हो सकती है जिसमें दोनों नेता लंबित मुद्दों पर लंबी बातचीत के लिए तैयार होने की बात कह सकते हैं."

अनुराधा मानती हैं कि इस बैठक में दोनों नेताओं के बीच आर्थिक मामलों पर ही अधिक बात होगी.

अनुराधा ये भी मानती हैं की अब चीन और पाकिस्तान और ज़्यादा क़रीब भी हैं ऐसे में चीन से ये उम्मीद नहीं की जा सकती है वह आतकंवाद को लेकर पाकिस्तान के संबंध में बात करेगा.

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