लोकसभा चुनाव 2019: प्रधानमंत्री मोदी की देहरादून की रैली की आँखो देखी

पीएम मोदी की देहरादून की रैली की आँखों देखी
    • Author, दिनेश उप्रेती
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, देहरादून के परेड ग्राउंड से
  • प्रकाशित

उत्तराखंड की पांच लोकसभा सीटों पर चुनाव से तकरीबन एक हफ्ते पहले बीजेपी ने राजधानी देहरादून में अपना शक्ति प्रदर्शन किया. इसे बीजेपी का नहीं बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शक्ति प्रदर्शन कहा जाए तो ज़्यादा सटीक रहेगा.

इसका गवाह रहा राजधानी का परेड ग्राउंड, जो आधा दर्जन से अधिक बीजेपी के दिग्गज नेताओं की मौजूदगी के बावजूद रैली में शामिल होने आए लोगों में जोश नहीं भर पा रहा था, लेकिन जैसे ही मंच से मोदी के आगमन की घोषणा हुई, पूरा मैदान मोदी-मोदी के नारों से गूंज उठा.

पीएम मोदी की देहरादून की रैली की आँखों देखी

देश का मान और नौकरी, क्या कहा लोगों ने

दोपहर के दो बजे- अभी मोदी के पहुँचने के आधिकारिक समय में तकरीबन डेढ़ घंटे का समय बचा था और मैदान आधा भी नहीं भरा था. गढ़वाल के विभिन्न इलाकों ऋषिकेश, टिहरी, नरेंद्रनगर, हरिद्वार, रायवाला से लोग यहाँ पहुँचे थे, लेकिन मैदान पर सीधी और तेज़ धूप पड़ रही थी, इसलिए बड़ी संख्या में लोग मैदान के बाहर पेड़ों की छांव में गर्मी से राहत पाने की कोशिश कर रहे थे.

इंद्रपाल सिंह रायपुर में रहते हैं, सेना में हैं और इन दिनों छुट्टियों में घर आए हुए हैं. वो दोपहर एक बजे ही परेड ग्राउंड पहुँच गए थे. इंद्रपाल ने बीबीसी से कहा, ''मैं सिर्फ़ मोदी को सुनने आया हूँ.''

ये पूछे जाने पर कि क्या वो केंद्र में मोदी और राज्य में त्रिवेंद्र सिंह सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं, इंद्रपाल कहते हैं, ''मोदी ने देश के लिए बहुत कुछ किया है. विदेशों में भारत का मान बढ़ाया है और पाकिस्तान को कड़ा जवाब दिया है.''

बात सेना से रोज़गार के मुद्दे की तरफ़ चल निकली.

अररिया (बिहार) से यहाँ काम की तलाश में आए शनि, इंद्रपाल की बातों को ध्यान से सुन रहे थे. मैंने जैसे ही उनकी तरफ़ देखा वो बोले, ''ग़रीबों को कौन सरकार कुछ देती है. हम तो पढ़े-लिखे भी कम हैं. ज़्यादा तो नहीं जानते पर ग़रीब का भला कभी किसी ने किया है?''

कुलदीप राणा 24 साल के हैं और हाल ही में उन्होंने इंजीनियरिंग का डिप्लोमा पूरा किया है. नौकरी मिली? इस सवाल पर राणा कुछ असहज दिखते हैं, लेकिन सिर पर 'मैं भी चौकीदार' लिखी भगवा टोपी पहने कुलदीप अगले ही पल कहते हैं, ''मुझे पता है हर नेता भाषण बड़ा-बड़ा देता है. अब राहुल गांधी ने ही 72 हज़ार रुपये देने की बात की है, लेकिन शर्त की बात है वो नहीं दे पाएंगे.''

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'खर्चा-पानी सब पार्टी ने दिया'

हाथों में पार्टी का झंडा उठाए महिला कार्यकर्ताओं की टोली साड़ी के पल्लू से खुद को गर्मी से बचाने का प्रयास करती हैं. ऋषिकेश से अपने पड़ोसियों के साथ यहाँ पहुँची कुसुम भंडारी कहती हैं, "खाना-पीना, खर्चा सब पार्टी ने दिया है. थोड़ी बहुत गर्मी है तो झेल लेंगे."

कुसुम भंडारी जैसी कई और महिलाएं भी थी जो मोहल्ले की सक्रिय पार्टी कार्यकर्ता के कहने पर रैली में पहुँची थी. सुंदरी विजल्वाण और दूसरी महिलाएं तकरीबन एक सुर में कहती हैं, "बाकी सब तो ठीक है, लेकिन सफ़ाई और शौचालयों के लिए मोदी ने जितना किया कोई नहीं कर पाया."

देहरादून के ही राजेंद्र कुमार टैंपो चलाते हैं और उनके दोनों बेटे भी ड्राइवर ही हैं, ये पूछे जाने पर कि आपका क्षेत्र से बीजेपी का उम्मीदवार कौन है, राजेंद्र कहते हैं, "ये तो नहीं पता, मैं तो सिर्फ़ ऊपर देखता हूँ और मोदी के नाम पर वोट दूँगा."

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वक्त सवा तीन का था. मैदान तकरीबन तीन-चौथाई भर चुका है. उत्तराखंड के लोकसभा चुनाव प्रभारी और केंद्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत अपने भाषण से मैदान में सुस्त पड़े कार्यकर्ताओं में जोश भरने की नाकाम कोशिश करते हैं.

लगभग तीन बजकर 25 मिनट पर आयोजक जैसे ही पीएम नरेंद्र मोदी के पहुँचने की घोषणा करते हैं, पूरा मैदान मोदी-मोदी के नारों से गूँजने लगता है. मोदी को स्मृति चिन्ह भेंट किए जाने के दौरान भी नारे और बुलंद हो जाते हैं.

मोदी का सेना कनेक्शन

मोदी ने अपने तकरीबन 40 मिनट के भाषण के दौरान न तो अपना कोई पिछला (2014 का) वादा याद दिलाया और न ही कोई नया वादा किया. वो जानते हैं उत्तराखंड के ख़ासकर पहाड़ी इलाकों में सेना कनेक्शन कितना मजबूत है, इसलिए अपने पूरे भाषण के दौरान वो हर पाँचवीं-छठी लाइन के बाद सेना के इर्द-गिर्द पहुँच जाते थे.

फिर चाहे महिला सैनिकों की सीमा पर तैनाती का मामला हो, वन रैंक-वन पेंशन, बोफ़ोर्स तोप, अगस्तावेस्टलैंड घोटाला हो या फिर कश्मीर घाटी में सैनिकों पर पत्थरबाज़ी या फिर राष्ट्रद्रोह हटाने जैसे कांग्रेस के घोषणापत्र में वादे का.

उन्होंने कांग्रेस को घेरते हुए सवाल पूछा, "अगर सेना के जवान को आप रक्षा नहीं करोगे तो कौन मां अपने बेटे को मरने के लिए आगे करेगी. क्या होगा देश का. और सिर्फ़ वोट पाने के लिए ये पाप कर रहे हो आप. अरे लानत है आपकी राजनीति पर."

अगस्तावेस्टलैंड घोटाले में एक बार फिर कांग्रेस को घेरते हुए उन्होंने कहा, ''आपका ये चौकीदार दुबई से हेलिकॉप्टर घोटाले के कुछ दलालों को लेकर आया. जाँच एजेंसियों ने उनसे कई हफ्तों तक पूछताछ की. कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई है. मिशेल मामा ने बताया कि घूस AP और FAM को दी है. एपी मतलब अहमद पटेल और एफएएम का मतलब फैमिली. आप लोगों ने अहमद पटेल का नाम तो सुना ही होगा. अब मुझे बताओ वो किस परिवार के करीब हैं?''

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लेकिन ये क्या, अभी मोदी का भाषण खत्म भी नहीं हुआ था कि कई लोग लाइन लगाए हुए मैदान से बाहर का रुख़ करने लगे. कुछ लोगों से मैंने पूछा तो वो हाथ में पैन-पैड देखकर कन्नी काट गए, लेकिन भीड़ के साथ जा रही और रायवाला से आई एक महिला ने कहा, "बस अब, मोदीजी का भाषण कितना ही तो बचा है. हमें तो बस में सीट भी तो पक्की करनी है. वरना देर हो जाएगी."

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