तेज बहादुर की उम्मीदवारी पर लटकी तलवार, चुनाव आयोग का नोटिस: प्रेस रिव्यू

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वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ नामांकन भरने वाले पूर्व बीएसएफ़ जवान और सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार तेज बहादुर यादव को वाराणसी के ज़िला चुनाव अधिकारी (डीईओ) ने नोटिस जारी किया है.
हिंदुस्तान टाइम्स की ख़बर के मुताबिक़ तेज बहादुर पर अपने नामांकन पत्र में दो अलग-अलग दावे करने का आरोप है.
43 साल के तेज बहादुर ने पिछले हफ्ते निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन पत्र दाख़िल किया था.
इसके बाद सोमवार को समाजवादी पार्टी ने शालिनी यादव की जगह उन्हें वाराणसी से अपना उम्मीदवार घोषित कर दिया था. जिसके बाद उन्होंने सपा-बसपा उम्मीदवार के तौर पर फिर से नामांकन पत्र दाख़िल किया.
ज़िला चुनाव अधिकारियों का कहना है कि तेज बहादुर ने एक ही सवाल के दो अलग-अलग जवाब दिए, जिसमें पूछा गया था कि क्या आवेदक सरकारी कर्मचारी रहा है और क्या उसे भ्रष्टाचार के कारण या देशद्रोह के कारण निकाला गया था.

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अज़हर के मुद्दे का उचित समाधान होगा :चीन
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में आज जैश-ए-मोहम्मद प्रमुख मसूद अज़हर को वैश्विक चरमपंथी घोषित करने के मसले पर अहम बैठक हो सकती है.
इस बीच चीन ने मंगलवार को कहा कि जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अज़हर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक चरमपंथी घोषित कराने के जटिल मुद्दे का उचित समाधान निकाला जाएगा, लेकिन उसने कोई समयसीमा नहीं बताई.
ये ख़बर द हिंदू समेत कई अख़बारों के पहले पन्ने पर है.
कुछ दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान से चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाक़ात के बाद चीन का यह रुख़ आया है.
चीन ने पाकिस्तानी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख पर प्रतिबंध लगाने के एक नए प्रस्ताव पर मार्च में तकनीकी रोक लगा दी थी.
जैश ने पुलवामा चरमपंथी हमले की ज़िम्मेदारी ली थी. चीन ने अज़हर को संयुक्त राष्ट्र द्वारा चरमपंथी घोषित करने के चौथे प्रयास पर रोक लगा दी.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने यहां मीडिया ब्रीफिंग में कहा, ''मैं केवल इतना कह सकता हूं कि मुझे भरोसा है कि उचित तरीक़े से इसका समाधान निकलेगा.''

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84 के सिख दंगा मामले में 7 बरी
सुप्रीम कोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े मामले में दोषी ठहराए गए सात लोगों को बरी कर दिया है.
सभी को पांच-पांच साल की सज़ा सुनाई गई थी. ये ख़बर टाइम्स ऑफ इंडिया अख़बार में है.
चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस संजीव खन्ना की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश पलटते हुए इन सात लोगों को बरी कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनके ख़िलाफ़ कोई पुख़्ता सबूत नहीं थे. यहां तक कि चश्मदीदों ने भी सीधे तौर पर अभियुक्तों की पहचान नहीं की थी. इन सभी ने फैसले को चुनौती दी थी.

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प्रशांत भूषण ने की थी आरोप लगाने वाली महिला की मदद
वकील एमएल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दावा किया है कि एक्टिविस्ट वकील प्रशांत भूषण और छह अन्य ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई पर यौन शोषण के आरोप लगाने वाली महिला की मदद की थी.
दैनिक भास्कर के मुताबिक़ शर्मा ने याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की, लेकिन कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया गया.
शर्मा ने याचिका में वकील प्रशांत भूषण, कामिनी जायसवाल, वृंदा ग्रोवर, शांति भूषण, इंदिरा जयसिंह, नीना गुप्ता भसीन और दुष्यंत के अलावा सीबीआई को पक्षकार बनाया है.
उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के कुछ वरिष्ठ वकीलों ने एनजीओ खोल रखे हैं. इन्हें देश-विदेश से चंदा मिलता है.
उन्होंने कहा, "यह लोग एनजीओ के ज़रिए सुप्रीम कोर्ट और जजों को नियंत्रण में लेना चाहते हैं. इसी के चलते चीफ़ जस्टिस के ख़िलाफ़ साज़िश रची गई."
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