यूपी शिक्षक भर्ती मामला: मुख्य अभियुक्त अभी भी पकड़ से बाहर

स्कूली बच्चे
    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • प्रकाशित

उत्तर प्रदेश में 96000 प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में कथित फ़र्ज़ीवाड़े से जुड़े मामले में अब तक 11 लोग गिरफ़्तार हो चुके हैं लेकिन मुख्य अभियुक्त या यूं कहें कि इसके मास्टरमाइंड अभी भी फ़रार हैं. जाँच के लिए गठित स्पेशल टास्क फ़ोर्स लगातार उनके ठिकानों पर दबिश दे रही है लेकिन कई लोग अभी भी पकड़ में नहीं आ सके हैं.

यूपी एसटीएफ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार पांडेय ने बीबीसी को बताया कि जिन प्रमुख लोगों की अभी भी तलाश है उनमें एक विद्यालय के प्रबंधक चंद्रमा यादव और मायापति दुबे समेत क़रीब आठ लोग शामिल हैं.

एएसपी नीरज कुमार पांडेय ने बताया, "हम लोग गिरफ़्तारी के बाद इस पूरे रैकेट का पता लगाने की कोशिश में हैं. इन लोगों के तार कहां-कहां जुड़े हैं, कौन से लोग और भी शामिल हैं. अभी कुछ लोग गिरफ़्त में आए हैं, कुछ की तलाश में कई जगह दबिश दी गई है. पकड़ में नहीं आते हैं तो हम लोग अदालत की शरण में भी जाएंगे और गिरफ़्तारी वारंट जारी कराने की कोशिश करेंगे."

69000 सहायक शिक्षक भर्ती मामले में स्कूल प्रबंधक चंद्रमा यादव की भूमिका सबसे अहम है क्योंकि चंद्रमा यादव ने ही अपने विद्यालय से परीक्षा का पेपर आउट कराया था. इसके बाद कृष्ण लाल पटेल नाम के व्यक्ति ने किसी सॉल्वर गैंग से पेपर को हल कराया और फिर परीक्षा में शामिल उन अभ्यर्थियों को नक़ल कराई गई जिनसे इस गैंग ने कथित तौर पर पैसे लिए थे. कृष्ण लाल पटेल को पुलिस पहले ही गिरफ़्तार कर चुकी है जबकि चंद्रमा यादव की तलाश में लगी एसटीएफ़ अब उस पर इनाम घोषित करने की तैयारी कर रही है.

ठिकानों पर छापेमारी

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय

इस मामले में फ़रार चल रहे कुछ अभियुक्तों की तलाश में एसटीएफ़ ने प्रतापगढ़ ज़िले में भी सोमवार को कई ठिकानों पर छापेमारी की और कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है. एएएसपी नीरज कुमार पांडेय ने बताया कि पकड़े गए कुछ लोग प्रतापगढ़, भदोही इत्यादि ज़िलों के भी हैं लेकिन ज़्यादातर प्रयागराज के ही रहने वाले हैं.

प्रतापगढ़ के रहने वाले राहुल सिंह की शिकायत पर प्रयागराज में परीक्षा में हुई कथित धांधली और फ़र्ज़ीवाड़े का आरोप लगाते हुए चार जून को एक एफ़आईआर दर्ज कराई गई. हालांकि परीक्षा में धांधली की शिकायतें उसी समय से आने लगीं जब 12 मई को परिणाम घोषित हुए लेकिन किसी ने भी तब तक क़ानून की शरण नहीं ली थी. बताया जा रहा है कि प्रयागराज ज़िले के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज की मदद से ही अनिल कुमार ने सोरांव थाने में एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

तत्कालीन एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध ने इस पूरे प्रकरण की जाँच के लिए अनुभवी अधिकारियों की एक टीम गठित की और ख़ुद जाँच की निगरानी की. अगले ही दिन पुलिस ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य कृष्णलाल पटेल समेत छह लोगों को गिरफ़्तार किया. छह जून को परीक्षा में पास हुए दो अभ्यर्थी भी गिरफ़्तार हुए जिनमें परीक्षा का टॉपर धर्मेंद्र पटेल भी शामिल था. आठ जून तक ज़िला पुलिस ने इस पूरे मामले में 11 लोगों को गिरफ़्तार करके जेल भेज दिया. अगले दिन यानी 9 जून को बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री सतीश द्विवेदी ने लखनऊ में जानकारी दी कि मामले की जाँच एसटीएफ़ को सौंप दी गई है.

बीबीसी से बातचीत में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी कहते हैं, "भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती गई है. जैसे ही हमें अनियमितता की शिकायत मिली तुरंत कार्रवाई की गई. गिरफ़्तारियां भी हुई हैं, अन्य लोग भी जो इसमें शामिल होंगे पकड़े जाएंगे. एसटीएफ़ पूरे मामले की जाँच कर रही है. लेकिन कुछेक मामलों की वजह से पूरी भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाना ठीक नहीं है."

बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी
इमेज कैप्शन, बेसिक शिक्षा मंत्री डॉ. सतीश द्विवेदी

इस बीच, सोमवार देर रात चौदह आईपीएस अधिकारियों के तबादले की सूची में जब प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज का भी नाम आया तो इस तबादले के पीछे शिक्षक भर्ती जांच को वजह माना जाने लगा. इस मामले में सोशल मीडिया पर तमाम प्रतियोगी छात्रों ने विरोध भी दर्ज कराया. हालांकि बात में यह बात सामने आई कि सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज की कोविड रिपोर्ट पॉज़िटिव आने के बाद उनका ट्रांसफ़र करके उन्हें प्रतीक्षारत कर दिया गया था.

इस मामले में मास्टरमाइंड के तौर पर पुलिस को प्रयागराज के एक स्कूल के प्रबंधक चंद्रमा यादव की तलाश थी जिसकी गिरफ़्तारी के लिए एसटीएफ़ भी छापेमारी कर रही है लेकिन चंद्रमा यादव की गिरफ़्तारी अभी नहीं हो सकी है. इनकी गिरफ़्तारी से एसटीएफ़ इस बात की भी जानकारी जुटाने की कोशिश करेगी कि इस कथित गैंग ने शिक्षक भर्ती परीक्षा के अलावा और किन परीक्षाओं में ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से लोगों को पास कराने का काम किया है.

पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, प्रयागराज के धूमनगंज निवासी चंद्रमा यादव का ट्रांसपोर्ट नगर में एक विद्यालय है जहां लगभग हर प्रतियोगी परीक्षा का सेंटर आता है. नाम न बताने की शर्त पर यह अधिकारी कहते हैं कि अपने विद्यालय में सेंटर पाने के लिए चंद्रमा यादव के तार परीक्षा कराने वाली सरकारी एजेंसियों और आयोगों से भी जुड़े हैं क्योंकि बिना उसके यह संभव नहीं है. चंद्रमा यादव अपने विद्यालय से न सिर्फ़ पेपर आउट कराते थे बल्कि कथित सॉल्वर गैंग के ज़रिए सवालों को हल करके उन्हें उन लोगों में बँटवाने का भी काम करते थे जिन्होंने इसके लिए पैसा दे रखा होता था.

स्कूली बच्ची

एसटीएफ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीरज कुमार पांडेय बताते हैं कि ऐसे ही एक मामले में चंद्रमा की गिरफ़्तारी पहले भी हो चुकी है. फ़रवरी 2019 में हुई रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षाओं में नक़ल कराने के मामले में केएल पटेल और उनके कुछ साथियों को पकड़ा गया था. एएसपी पांडेय के मुताबिक़, "टीईटी 2019 की 8 जनवरी 2019 को हुई परीक्षा में भी इन लोगों ने कुछ अभ्यर्थियों को ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से पास कराने का ठेका लिया था लेकिन परीक्षा से दो दिन पहले ही चंद्रमा यादव को एसटीएफ़ ने गिरफ़्तार कर लिया था. चंद्रमा यादव कुछ महीने पहले ही ज़मानत पर छूटकर बाहर आया है."

स्थानीय मीडिया में चर्चा है कि चंद्रमा यादव भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हैं और पार्टी में पदाधिकारी भी रहे हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी इस बात से इनकार करती है. प्रयागराज बीजेपी के महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी बताते हैं, "पार्टी से इनका कोई संबंध नहीं है. न तो सदस्य हैं और न ही किसी पद पर हैं. जहां तक मेरी जानकारी है, बीजेपी में ये पहले भी नहीं थे."

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