चीनी वीज़ा पर विवाद

एजाज़ हुसैन
इमेज कैप्शन, एजाज़ हुसैन को पहले उनके पासपोर्ट पर ही चीनी वीज़ा मिल चुका है.
    • Author, अल्ताफ़ हुसैन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
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एजाज़ हुसैन श्रीनगर में युवा व्यवसायी हैं और काम के सिलसिले में कम से कम छह बार चीन जा चुके हैं.

आखिरी बार वो दो महीने पहले चीन गए थे लेकिन अब चीन जाने के नाम से दुखी हो जाते हैं क्योंकि दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट पर हुई परेशानी उन्हें बर्दाश्त नहीं होती.

असल में चीनी दूतावास कश्मीर के रहने वालों को भारतीय पासपोर्ट पर वीज़ा जारी नहीं करता बल्कि एक अलग पन्ने पर वीज़ा देता है. एजाज़ के पास भी जुलाई महीने में ऐसा ही वीज़ा था बस फिर क्या था एयरपोर्ट पर भारतीय अधिकारियों ने उनका वीज़ा वैध मानने से इंकार कर दिया.

एजाज़ तीन घंटे तक एयरपोर्ट पर विभिन्न कार्यालयों के चक्कर काटते रहे लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ. दूसरे दिन वो चीनी दूतावास गए और विरोध जताया और कहा कि उनके साथ धोखा किया गया है.

एजाज़ के अनुसार चीनी दूतावास ने उन्हें बताया कि चीन की सरकार ने कश्मीर के लोगों के लिए अलग कागज़ पर वीज़ा जारी करने का फ़ैसला किया है.

नया फ़ैसला

चीनी अधिकारियों ने एजाज़ को सुझाव दिया कि वो एयरपोर्ट अधिकारियों से लिखित में ये देने के लिए कहें कि उनका वीज़ा अवैध है और ग़लत वीज़ा होने पर उन्हें गिरफ़्तार कर लिया जाए.

यह करने पर भारतीय अधिकारियों ने एजाज़ के वीज़ा को वैध माना और उन्हें चीन जाने दिया लेकिन एजाज़ के शब्दों में उन्हें ‘रवाना होने से पहले नरक का एहसास हो गया.’

लेकिन हर कश्मीरी एजाज़ की तरह किस्मत वाला नहीं है. पिछले महीने शुजा अल्ताफ़ को एयरपोर्ट से वापस लौटना पडा. अल्ताफ़ कहते हैं कि आव्रजन अधिकारियों ने उनसे साफ़ शब्दों में कहा कि अधिकारियों को अलग कागज़ पर दिए गए वीज़ा को वैध न मानने के निर्देश विदेश मंत्रालय ने दिए हैं.

चीनी वीज़ा
इमेज कैप्शन, हुसैन को बाद में वीज़ा अलग पन्ने पर जारी किया गया.

शुजा अल्ताफ़ कहते हैं, ‘‘उस अधिकारी ने मुझसे बताया कि चीन अलग कागज़ पर वीज़ा देकर यह दिखाना चाहते हैं कि वो कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानते हैं. ’’ शुजा इस बात से भी दुःखी थे कि भारतीय अधिकारियों ने उनके पासपोर्ट पर ऑफ लोडेड का स्टांप लगा दिया.

शुजा का कहना था कि उन्होंने एयरपोर्ट पर कश्मीर के चार पाँच छात्रों को भी देखा जो इसी तरह के वीजा़ के कारण चीन नहीं जा पाए थे और ये छात्र रो रहे थे.

वैसे कश्मीर के लोगों के लिए अलग कागज़ पर वीज़ा देने का चीन का तरीका नया है. कांग्रेस पार्टी ने नेता सैफुद्दीन सोज़ कहते हैं, ‘चीनी दूतावास ने हाल ही में ये काम शुरु किया है. ये ग़लत है. हमें ये स्वीकार्य नहीं है. कश्मीर भारत का हिस्सा है और चीन इस पर सवाल नहीं उठा सकता.’

सोज़ ने कहा कि वो इस मुद्दे पर भारत सरकार से बात करेंगे.

उधर अलगाववादी नेता और ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेंस के पूर्व प्रमुख मौलवी अब्बास अंसारी कहते हैं कि चीन का फ़ैसला दर्शाता है कि वो कश्मीर को विवाद मानता है.

इस मामले पर चीनी दूतावास की प्रवक्ता चू योंग होंग ने बीबीसी को बताया कि हम इतना ही कह सकते हैं कि हमने जो वीसा जारी किया है वो वैध है और ये मामला कोई नया नहीं है.

उन्होंने कहा कि समस्या चीनी दूतावास की तरफ़ से नहीं है बल्कि भारत की तरफ़ से है क्योंकि उन्होंने इन यात्रियों को रोका.

लेकिन ये पूछे जाने पर कि भारत के दूसरे राज्यों में रहनेवालों को वीसा पासपोर्ट के पन्नों पर दिया जाता है तो फिर जम्मू कश्मीर के बाशिदों के साथ ये अलग व्यवहार क्यों, उनका कहना था कि इसपर वो कुछ नहीं कहना चाहेंगी.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने भी इस पर बयान जारी किया है. उनका कहना है कि भारतीय नागरिकों के ख़िलाफ़ मूल निवास और नस्ल के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए और हमने अपनी चिंताओं से चीनी सरकार को आगाह कर दिया है.