भारी बारिश और बाढ़ में 171 मरे

- Author, उमर फ़ारूक़
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
- प्रकाशित
कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ के कारण अबतक कम से कम 171 लोगों की मौत हो चुकी है. हज़ारों लोग बेघर हो गए हैं.
सबसे ज़्यादा असर पड़ा है कर्नाटक पर जहाँ 11 ज़िले बाढ़ प्रभावित हैं. यहाँ से कम से कम 141 लोगों के मारे जाने की ख़बर आ रही है.
वहीं आंध्र प्रदेश के कई इलाकों में पानी भर गया है. यहाँ आधिकारिक तौर पर 50 लोगों के मरने की ही पुष्टि की जा रही है. पर माना जा रहा है कि सरकारी अनुमान से ज़्यादा तादाद में मरनेवालों की तादाद हो सकती है.
आंध्रप्रदेश के एक प्रमुख औद्योगिक शहर, विजयवाड़ा में एक लाख से ज़्यादा लोगों को बेघर होना पड़ा है. इन लोगों को शहर से निकाल लिया गया है. हालांकि राज्य में बारिश रुकी हुई है पर विजयवाड़ा के लिए बाढ़ का ख़तरा कम नहीं हुआ है.
इस दौरान आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमत्री और सोनिया गांधी से बात की है. केंद्र सरकार ने कहा है कि वो बाढ़ की स्थिति से निपटने में राज्य सरकार की पूरी मदद करेगी.
दोनों ही राज्यों में सैकड़ों लोग अब भी कई जगह फँसे हुए हैं. राहत कार्य में मदद के लिए सेना के आठ हेलिकॉप्टर लगे हुए हैं. दोनों ही राज्यों में राहत कार्यों को तेज़ी से चलाया जा रहा है.
अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश से फसलों को नुकसान पहुँचा है और सूचना तंत्र भी टूट गया है. कर्नाटक और आँधप्रदेश के बीच यातायात भी बाधित हुआ है.
स्थिति यह है कि हज़ारों-लाखों लोगों ने अपने इलाकों में पहाड़ों पर जाकर खुद को बाढ़ की चपेट में आने से बचाया है.
चिंताजनक स्थिति
हालांकि फिलहाल बारिश रुकी हुई है पर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटों के दौरान आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में भारी बारिश की आशंका है.
शुक्रवार को नागार्जुन सागर बांध का जलस्तर 893 फीट हो गया था जबकि इसकी अंतिम सीमा 885 फीट की है.
करनूल में शुक्रवार को 10-15 फीट पानी शहर के भीतर चला गया था जिसकी वजह से कई घरों की पहली मंजिल तक पानी पहुँचा हुआ था. लोगों को छतों पर जाकर अपनी जान बचानी पड़ी.
इस बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा से संपर्क करके कहा है कि कृष्णा नदी पर बने दो प्रमुख बांधों से पानी न छोड़ा जाए वरना आंध्र प्रदेश के लिए मुश्किल और बढ़ सकती है.
कोशिश की जा रही है कि जल्द से जल्द बाढ़ के पानी को समुद्र में निकाला जा सके पर क्षमता से अधिक पानी इकट्ठा होने के कारण इस कोशिश में समय लग रहा है और इकट्ठा हुआ पानी बाढ़ की शक्ल में आसपास के इलाकों को डुबो रहा है.

























