अमरावती में 'माँ का सहारा'

राजेंद्र शेखावत
इमेज कैप्शन, राजेंद्र शेखावत राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल के बेटे हैं
    • Author, अविनाश दत्त
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अमरावाती से
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महाराष्ट्र में अमरावती के चुनावों में 'माँ' शब्द ने प्रचार में रंग ला दिया है. गली-मोहल्लों में कांग्रेस के समर्थक कहते मिल जाएँगें कि 'हमारे पास माँ है'.

शहर के बड़े चौराहों पर आपकी नज़र से निर्दलीय प्रत्याशी डॉ. सुनील देशमुख के बड़े से बैनर नहीं बच सकते, जिस पर लिखा है- मेरी माई बाप जनता है.

डॉ. सुनील देशमुख पिछली दो बार से अमरावती शहर से कांग्रेस के विधायक थे और पिछली दोनों सरकारों में मंत्री भी.

पार्टी ने इस बार उनका टिकट काट कर राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल के बेटे राजेंद्र राव देवीसिंह शेखावत को अपना प्रत्याशी बनाया है.

तर्क

मैंने उनसे नारे का सबब पूछा तो देशमुख बोले, "ये सब जानते हैं कि राव साहब दिल्ली में राष्ट्रपति भवन में रहते हैं. उनका अमरावती से कोई लेना-देना नहीं. राष्ट्रपति भवन के दबाव में उनको टिकट दिया गया है वो भी एक मंत्री का. दो बार चुनाव जीते आदमी का टिकट काट कर."

कांग्रेस ने देशमुख को आश्वासन दिया था कि उनका ध्यान रखा जाएगा उनको कहीं और उपयोग में लाया जायेगा.

देशमुख ने प्रस्ताव ठुकरा दिया क्योंकि वो मानते हैं कि विधान परिषद और राज्य सभा उनके लिए नहीं है.

उन्होंने कहा कि वे जनता से जुड़े हैं और विकास के ढे़रों काम किए हैं और जनता के बीच ही रहना चाहता हैं.

पर अमरावती के कांग्रेस नगर में अपने गुलाबी रंग के राजस्थानी चेहरे वाले आवास पर शेखावत देशमुख के आरोप को नकारते हैं.

राहुल गाँधी की यात्रा की तैयारियों में व्यस्त देशमुख झट से कहते हैं कि उनका पैतृक गाँव यहीं है और वो यहीं पढ़े हैं.

वे कहते हैं, "मुझे मेरे नाम पर नहीं काम पर टिकट मिला है. हाँ, मेरा परिवार कांग्रेस में रचा बसा है. लोगों की 40 साल से सेवा कर रहा है. इसका लाभ मुझे मिलेगा ये तय है."

अगर आप शहर में लोगों से घूम-फिर आम लोगों से बात करें, तो पूछने पर लोग बताएँगें कि मुख्य मुक़ाबला देशमुख और शेखावत के बीच ही है.

सभी मानते हैं कि देशमुख ने काम किया है लेकिन शेखावत अमरावती को अमेठी, रायबरेली का दर्जा दिला सकते हैं क्योंकि उनकी माँ बहुत शक्तिशाली हैं.

देशमुख और शेखावत दोनों अपने समर्थकों के हुजूम के साथ वोट मांगते घूम रहे हैं.

हालांकि भाजपा प्रत्याशी की हालत बहुत मज़बूत नहीं दिखाई देती लेकिन उनको भरोसा है कि दो की लडाई में सत्ता की रोटी उन्हें ही मिलेगी.