चंद्रशेखर राव की हालत चिंताजनक

- Author, उमर फ़ारूक़
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद से
- प्रकाशित
अलग तेलंगाना राज्य की मांग को लेकर तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव के आमरण अनशन के नौ दिन पूरे हो चुके हैं.
उनकी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है और इसको लेकर आंध्र प्रदेश सरकार, प्रशासन और तेलंगाना के समर्थकों की चिंताएं बढती जा रही हैं.
निज़ाम इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस (निम्स) में चंद्रशेखर राव को गहन चिकित्सा कक्ष में रखा गया है.
डॉक्टरों ने कहा है कि चंद्रशेखर राव का रक्तचाप, साँस की रफ़्तार और शूगर सामान्य हैं लेकन इतने दिनों से कोई आहार ना लेने के कारण वे बहुत कमज़ोर हो गए हैं और उन की हालत कभी भी बिगड़ सकती है.
चिंता
55 वर्षीय राव को पहले ही से मधुमेह रोग है और आमरण अनशन के कारण उनके अहम शारीरिक अंगों को नुक़सान पहुँचा रहा है.
निम्स के निदेशक डॉ. दसरी प्रसाद राव ने कहा कि चंद्रशेखर राव के शरीर में रोगों से लड़ने की क्षमता कम होती जा रही है, उन्हें बुख़ार आ गया है.
डोक्टरों का कहना है की राव को लगातार दवाएं दी जा रही हैं लेकिन आहार न मिलने के कारण इससे ज़्यादा फ़ायदा नहीं हो रहा है.
मुख्या मंत्री के रोसैया, विपक्ष के नेता चंद्रबाबू नायडू और दूसरे कई नेताओं ने अस्पताल में राव से भेंट की और उनसे विनती की कि वे भूख हड़ताल ख़त्म कर दें और बातचीत के लिए एक सौहार्द्रपूर्ण वातावरण बनाएँ.
लेकिन चंद्रशेखर राव ने साफ़ इनकार कर दिया. उनका कहना है कि जब तक केंद्र सरकार तेलंगाना राज्य की स्थापना की घोषणा नहीं करती उनका आमरण अनशन जारी रहेगा.
उन्होंने कहा, "अब या तो तेलंगाना की जीत का जुलूस निकलेगा या मेरी शव यात्रा."
इस बीच टीआरएस के बुलाए हुए 48 घंटे के तेलंगाना बंद के दूसरे दिन सोमवार को भी हिंसा की छिटपुट घटनाओं का सिलसिला चलता रहा और आम जनजीवन प्रभावित रहा.
बस सेवा निलंबित रहने से लाखों यात्री हैदराबाद और तेलंगाना के नौ अन्य ज़िलों में फंसे रहे और रेल यात्रियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा.
प्रदर्शनकारियों ने सिकंदराबाद-दिल्ली आंध्र प्रदेश एक्सप्रेस, राजधानी एक्सप्रेस, केरला एक्सप्रेस, संपर्क क्रांति एक्सप्रेस और गोरखपुर एक्सप्रेस सहित कई रेलों को वारंगल और करीमनगर के अनेक स्थानों पर रोक दिया.
हैदराबाद के ओस्मानिया विश्वविद्यालय में फिर एक बार पुलिस और छात्रों के बीच बड़ी झड़प हुई और पुलिस ने छात्रों को वहाँ से खदेड़ने के लिए लाठी चार्ज किया.
छात्रों के समर्थन के लिए गए टीआरएस के दो विधायकों हरीश राव और ई राजिंदर को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया.
लेकिन पुलिस को छात्रों के ख़िलाफ़ बल प्रयोग का मूल्य चुकाना पड़ा.
आरोप
राज्य सरकार ने ऊँचे स्तर के पुलिस अधिकारी उप आयुक्त स्टीफ़ेन रवींद्र की बदली कर दी क्योंकि उन्होंने बल प्रयोग न करने के गृह मंत्री इंद्र रेड्डी के निर्देश को नहीं माना.

इससे पहले गृह मंत्री ने ग़ुस्से में आकर त्यागपत्र देने की धमकी दी थी.
इसके अलावा पत्रकारों ने भी रवींद्र को हटाने की मांग की क्योंकि पुलिस ने उन्हें ओस्मानिया विश्वविद्यालय परिसर से हटाने के लिए मार पीट की थी.
तेलंगाना राज्य के लिए गत 10 दिनों से जारी आंदोलन में ओस्मानिया विश्वविद्यालय एक बड़ा केंद्र बन कर उभरा है और वहाँ छात्र भूख हड़ताल पर बैठे हैं.
उनकी संयुक्त एक्शन कमेटी ने आगामी गुरूवार को राज्य विधानसभा के घेराव करने का आव्हान किया है. इसे देखते हुए पुलिस और अर्ध सैनिक दलों की अतिरिक्त टुकड़ियाँ तैनात की जा रही हैं.
छात्रों ने दावा किया है कि विधान सभा के घेराव में एक लाख लोग भाग लेंगे. पुलिस अधिकारियों को चंद्रशेखर राव की बिगड़ित हुई हालत की भी चिंता है.
उन का कहना है कि अगर राव को कुछ हो गया तो हैदराबाद और दूसरे ज़िलों में बड़े पैमाने पर हिंसा फूट सकती है.
शनिवार को ये अफ़वाह फैल गई थी कि राव कोमा में चले गए हैं, इसके बाद उनके समर्थकों ने हैदराबाद में भय का वातावरण पैदा कर दिया था.

























