ओबामा मनमोहन ने की मुलाक़ात

सोमवार को दोनों देशों के प्रतिनिधियों की औपचारिक बैठक से पहले भारतीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने निजी तौर पर एक भेंट की.
ये मुलाक़ात मनमोहन सिंह के निवास स्थान सात, रेस कोर्स में हुई जहाँ भारतीय प्रधानमंत्री ने ओबामा और उनकी पत्नी मिशेल ओबामा को रात्रि भोज के लिए निमंत्रित किया था.
समझा जाता है कि लगभग आधे घंटे तक चली बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय संबंधों का जायज़ा लेने के साथ ही रणनीतिक साझेदारी को अधिक मज़बूत करने के उपायों पर विचार किया.
साथ ही उन्होंने सोमवार को होने वाली औपचारिक बैठकों पर भी एक निगाह दौड़ाई.
साझा बयान
यूँ तो राष्ट्रपति ओबामा रविवार दिन को ही दिल्ली पहुँच चुके हैं लेकिन दोनों देशों के बीच औपचारिक बातचीत का सिलसिला सोमवार को होना है जिसके बाद दोनों नेता एक साझा बयान जारी करेंगे.
इन बैठकों में आउटसोर्सिंग, ऊर्जा स्रोत, विज्ञान और तकनीक, शिक्षा और कृषि क्षेत्र में सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा की जाएगी.
भारत को उम्मीद थी कि यहाँ अपनी मौजूदगी के दौरान ओबामा पाकिस्तान की ओर से चरमपंथी गुटों को दी जा रही मदद पर कोई कड़ा बयान देंगे लेकिन अमरीकी राष्ट्रपति ने ये साफ़ कर दिया है कि वह इस मामले में तटस्थ की भूमिका निभाएंगे.
उन्होंने सपष्टर कर दिया है कि भारत-पाकिस्तान रिश्तों के संबंध में अमरीका किसी तरह का दबाव नहीं बनाएगा.
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार पुष्पेश पंत का कहना है कि पाकिस्तान के मामले में भारत को अमरीका से कोई बड़ी उम्मीद नहीं रखनी चाहिए.
वैसे ओबामा ने कहा है कि भारत और पाकिस्तान को फिर से औपचारिक बातचीत का सिलसिला शुरू करना चाहिए.
भारत-पाकिस्तान

पुष्पेश पंत कहते हैं, "पाकिस्तान में स्थिरता लाने के नाम पर अमरीका ख़ुद ही वहाँ के सैनिक शासकों को मदद मुहैया कराता रहा है.ये वही लोग हैं जो भारत विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देते रहे हैं. वैसे भी अमरीका को अफ़गानिस्तान जैसे मामलों में पाकिस्तान के मदद की दरकार है."
उनके अनुसार यही वजह थी कि मुंबई में एक छात्रा के ज़रिए पूछे गए सवाल के बावजूद ओबामा ने 'सवाल का सीधा जवाब देने की बजाए चरमपंथ के कारण पाकिस्तान में हुई मौतों की गिनती गिनानी शुरू कर दी'.
वह कहते हैं कि मंदी की मार झेल रहे देश के राष्ट्रपति भारत के बड़े बाज़ार की तलाश में यहाँ आए हैं जिसमें वह सफल भी रहे हैं.
व्यापार जगत को मुंबई मे दिए गए भाषण में अमरीकी राष्ट्रपति ने 10 अरब डालर के व्यवसायिक समझौतों की घोषणा की थी.
जब बीबीसी ने इस मामले पर आम लोगों की राय जाननी चाही तो उनमें से कुछ का विचार था कि अगर ओबामा अपने देश के आर्थिक हालात सुधारने के लिए भारत की मदद चाहते हैं तो इसे विश्व पटल पर भारत की मज़ूबूत होती स्थिति के तौर पर देखा जाना चाहिए.
विरोध
हालांकि कुछ लोग इस यात्रा को महज़ बाज़ारवाद को बढ़ावा देने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं.
देश में मौजूद वामपंथी विचारधारा की राजनीतिक पार्टियों ने सोमवार को इसके विरोध मे बंद का एलान किया है और वह संसद में ओबामा के कार्यक्रम का बहिष्कार भी कर रहे हैं.
राष्ट्रपति ओबामा सोमवार को भारत के संसद सदस्यों को संबोधित करने वाले हैं.
भोपाल गैस पीड़ितों के साथ काम कर रही कुछ संस्थाए ओबामा के भाषण के समय संसद के घेराव की बात कर रही हैं.
स्वयंसेवी अब्दुल जब्बार का कहना है कि जहाँ मेक्सिको की खाड़ी में हुए तेल रिसाव के लिए अमरीका ने अरबों डालर का मुआवज़ा लिया वहीं भोपाल गैस पीड़ितों को त्रासदी के 26 सालों बाद भी न्याय नहीं मिल पाया है.
सोमवार दिन में आधिकारिक बैठकों के अलावा ओबामा विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं जैसे कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज से भी मिलेंगे.
दिन में वह महात्मा गाँधी की स्माधि पर भी जाएंगे.
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने उनके सम्मान में एक रात्रि भोज का आयोजन किया है.

























