खामोश हुए चुनावी 'उड़नखटोले'

हवाई जहाज
इमेज कैप्शन, अनुमान है कि 40 दिनों के प्रचार अभियान में विभिन्न दलों के हेलीकाप्टरों ने लगभग दो हज़ार घंटों की उड़ान भरी.
    • Author, मणिकांत ठाकुर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, पटना
  • प्रकाशित

बिहार विधानसभा चुनावों में आख़िरी दौर के मतदान के लिए 26 विधानसभा क्षेत्रों में गुरुवार शाम चुनाव-प्रचार समाप्त हो गया.

20 नवंबर को होने वाले मतदान के दौरान नक्सली-हिंसा की आशंका सबसे ज़्यादा इन्हीं क्षेत्रों में है, इसलिए पुलिस-प्रशासन ने इस चरण के सभी 6,911 मतदान केन्द्रों पर केन्द्रीय सुरक्षा बलों को तैनात किया है.

साथ ही 18 विधानसभा क्षेत्रों में सुबह सात बजे से दोपहर तीन बजे तक ही मतदान का समय निर्धारित किया गया है. इस चरण के बाक़ी आठ विधानसभा क्षेत्रों में शाम पांच बजे तक वोट डाले जाएंगे.

दहशत

गया ज़िले के इमामगंज और डुमरिया इलाक़े पर नक्सली संगठन भाकपा (माओवादी) की मज़बूत पकड़ और चुनाव बहिष्कार संबंधी माओवादी ऐलान को लेकर वहां भारी दहशत है.

नक्सली हमले के डर से इमामगंज विधानसभा क्षेत्र में किसी भी प्रमुख दल का चुनावी-दफ्तर नहीं खुला. कड़े सुरक्षा इंतज़ामों के बीच ही उम्मीदवार या उनकी पार्टियों के प्रमुख नेता प्रचार के लिए निकल पाए.

<link type="page"><caption> आख़िरी चरण के लिए व्यापक सुरक्षा</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/11/101111_bihar_lastphase_vv.shtml" platform="highweb"/></link>

निवर्तमान बिहार विधानसभा के अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी इमामगंज से जनता दल(यू) के प्रत्याशी हैं और नक्सलियों ने उन्हें भी धमकी दी है.

निगरानी

इस क्षेत्र में मुख्यमंत्री की चुनावी-सभा पुलिस छावनी की तरह नज़र आई. इमामगंज के अलावा बाराचट्टी, टेकारी, गुरुआ और शेरघाटी में भी नक्सली हमले की आशंका बनी हुई है.

चुनावी सभा
इमेज कैप्शन, एक आकलन के अनुसार सबसे ज़्यादा 334 सभाएं लालू प्रसाद की हुईं.

उधर औरंगाबाद ज़िले के गोह, नवीनगर, कुटुम्बा और रफीगंज विधानसभा क्षेत्रों को भी इस बाबत अतिसंवेदनशील माना गया है.

रोहतास ज़िले के चेनारी, सासाराम, दिनारा, डेहरी और काराकाट विधानसभा क्षेत्रों में माओवादी हिंसा की आशंका मानते हुए वहाँ मतदान की समयसीमा दो घंटे कम कर दी गयी है.

कैमूर ज़िले के भभुआ और चैनपुर क्षेत्र को भी इसी श्रेणी में रखा गया है.

यानी इसबार के चुनाव में मतदान का यह अंतिम दौर शांतिपूर्वक गुज़र जाए, इसके लिए ज़मीन पर सुरक्षा बलों के हज़ारों जवान और आसमान से निगरानी के लिए बी.एस.एफ के चार हेलीकाप्टरों के अलावा कई अन्य ज़रूरी प्रबंध किए गए हैं.

प्रचार

चुनाव-प्रचार के अंतिम दिन कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी, भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने इन इलाक़ों में चुनावी सभाओं को संबोधित किया.

<link type="page"><caption> नितीश लालू की प्रतिष्ठा दांव पर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2010/10/101022_biharelex_rupa_pp.shtml" platform="highweb"/></link>

एक आकलन के अनुसार सबसे ज़्यादा 334 सभाएं लालू प्रसाद की हुईं. उसके बाद 291 नीतीश कुमार, 216 सुशील मोदी, 215 रामविलास पासवान और 150 सभाएं शरद यादव के खाते में रहीं.

अनुमान है कि 40 दिनों के प्रचार अभियान में लगभग बीस हेलीकॉप्टरों और कुछ हवाई जहाज़ों ने विभिन्न दलों के स्टार-प्रचारकों को लेकर तकरीबन दो हज़ार घंटों की उड़ानें भरीं.

भाजपा के तीन, कांग्रेस के तीन और जद(यू) के दो हेलीकाप्टर तो इस पूरी अवधि में स्थाई तौर पर लगे रहे और बीच-बीच में ज़रुरत पड़ने पर इनकी तादाद बढ़ भी जाती थी.

इस तरह आठ अक्टूबर से बिहार के आसमान पर नेताओं के 'उड़नखटोलों' का जो शोर शुरू हुआ, वो 18 नवंबर की शाम खामोश हो गया .