'2जी से बड़ा ज़मीन घोटाला'

इमेज स्रोत, BBC World Service
महाराष्ट्र के पुणे के कथित ज़मीन घोटाले को 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले से बड़ा बताते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट ने इसे केंद्रीय जाँच ब्यूरो यानी सीबीआई को सौंपने के संकेत दिए हैं.
हाईकोर्ट के खंडपीठ के न्यायाधीश बीएस मर्लापाले और यूडी साल्वी ने सरकार को जवाब देने के लिए 10 फ़रवरी तक का समय दिया है.
अदालत ने सरकार की ओर से महाधिवक्ता को पेश होने के निर्देश भी दिए हैं.
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता माधव भंडारी की जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने ये निर्देश दिए हैं.
मामला
याचिका में आरोप लगाया गया है कि फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों के आधार पर शहरी भूमि सीमा एवं नियमन क़ानून के तहत फ़ैसले दिए गए.
अदालत ने निर्देश जारी करते हुए कहा, "ये तो 2जी घोटाले से बड़ा है...अदालत इस मामले को सीबीआई को देना चाहेगी."
यह मामला वर्ष 2005 में सामने आया था जब पुणे के एक उपज़िलाधीश को एक ज़मीन के बारे में इस क़ानून के तहत दिए गए आदेश के संबंध में एक फ़र्ज़ी दस्तावेज़ मिला.
याचिकाकर्ता का आरोप है कि इस घोटाले में महाराष्ट्र के पूर्व उपमुख्यमंत्री आरआर पाटिल के ओएसडी का भी हाथ रहा है.
इससे पहले अदालत ने कुल 18 ऐसे मामलों में मामला दर्ज करने के निर्देश दिए थे जिसमें फ़र्ज़ी दस्तावेज़ों का उपयोग किया गया.
सरकार ने कुल 29 फ़ाइलें निकाली हैं और अब तक 11 मामले दर्ज किए हैं. अब सरकार ने 18 और फ़ाइलों के आधार पर कार्रवाई करने के लिए छह हफ़्तों का समय माँगा है.

























