इंजीनियर रिहा, डीएम अभी नहीं

इमेज स्रोत, Sibabrata Das
- Author, संदीप साहू
- पदनाम, भुवनेश्वर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
- प्रकाशित
उड़ीसा में मलकानगिरि के जिलाधिकारी आर विनील कृष्ण के साथ अपहृत जूनियर इंजीनियर पवित्र मांझी को माओवादियों ने रिहा कर दिया है.
लेकिन जिलाधिकारी आर विनील कृष्ण की रिहाई के बारे में अभी कोई नई जानकारी नहीं आई है.
माओवादियों की ओर से नियुक्त मध्यस्थों के साथ चार दिन की बातचीत के बाद मंगलवार देर रात उड़ीसा के गृह सचिव यूएन बेहेरा ने पत्रकारों को बताया था कि दोनों पक्षों में सभी 14 मुद्दों पर सहमति बन गई है और अपहृत अधिकारियों को जल्द ही रिहा कर दिया जाएगा.
बुधवार को चित्रकोंडा के तहसीलदार वी गोपालकृष्णा ने बताया कि पवित्र मांझी को पहले चित्रकोंडा के एक बंग्ले में लाया गया जहां उनकी मेडिकल जांच की गई.
गोपालकृष्णा ने बताया कि उनका स्वास्थ्य ठीक है बस रक्तचाप थोड़ा बढ़ा हुआ है.
अब उन्हें मलकानगिरि के लिए रवाना कर दिया गया है.
उन्हें जिला ग्रामीण विकास एजेंसी के प्रोजेक्ट निदेशक बलवंत सिंह के साथ भेजा गया है.
तहसीलदार गोपालकृष्णा ने बताया कि जिलाधिकारी के बारे में उन्हें बस इतना बताया गया है कि वो स्वस्थ हैं लेकिन उन्हें कब छोड़ा जाएगा उस पर कोई जानकारी नहीं मिली है.
<link type="page"><caption> मध्यस्थ प्रोफ़ेसर हरगोपाल से बीबीसी की विशेष बातचीत </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/02/110223_orissa_mediator_as.shtml" platform="highweb"/></link>
वार्ताकार प्रोफ़ेसर हरगोपाल ने बुधवार सुबह को बताया था कि दोनों अपहृत लोग रास्ते में हैं और उन्हें किसी भी क्षण रिहा किया जा सकता है. इस संकट के समाधान के लिए माओवादियों और उड़ीसा सरकार दोनों को धन्यवाद दिया.
उनसे पूछा गया कि जब सभी मुद्दों पर दोनों पक्षों में सहमति हो गई है तो फिर रिहाई के लिए और 48 घंटे क्यों लगेंगे?
उनका कहना था, "जहाँ अपहृत कलक्टर और इंजीनियर को रखा गया है वो काफ़ी दुर्गम इलाक़ा है. यही कारण है कि माओवादियों ने उनकी रिहाई के लिए 48 घंटे का समय माँगा है."
प्रोफ़ेसर हरगोपाल ने शुरू से ही कहा था कि मामले को जल्द सुलझाने के लिए माओवादी चिंतक गांटी प्रसादम का बातचीत में शामिल होना ज़रूरी है और आख़िरकार वही हुआ.
कोरापुट जेल में बंद गांटी प्रसादम को मंगलवार सुबह भुवनेश्वर लाया गया. माओवादियों के मध्यस्थों ने मंगलवार को दो बार उनसे झारखंड जेल में लंबी बातचीत की.
दूसरी मुलाक़ात के कुछ ही घंटों के अंदर दोनों पक्षों में सभी मुद्दों पर सहमति बन गई.
माओवादियों ने भले ही 14 मांगे रखी थी, लेकिन अड़चन मुख्य रूप से से माओवादी नेताओं कि रिहाई पर थी.
इनमें से गांटी प्रसादम सहित पांच के ख़िलाफ़ उड़ीसा में दायर मामले वापस लेने के लिए उड़ीसा सरकार के राज़ी होने के बाद ही बात आगे बढ़ी.

























