अन्ना हज़ारे आमरण अनशन पर

अन्ना हज़ारे नागरिक अधिकारों के लिए पहले भी आंदोलन करते रहे हैं.
इमेज कैप्शन, अन्ना हज़ारे नागरिक अधिकारों के लिए पहले भी आंदोलन करते रहे हैं.
    • Author, दिव्या आर्य
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर आमरण अनशन शुरू कर दिया है.

उनकी मांग है कि भ्रष्टाचार से निपटने के लिए बनाए गए लोकपाल विधेयक की समीक्षा करने के लिए बनाई गई समिति में मंत्रियों के अलावा जनता के प्रतिनिधि भी हों.

इसके लिए उन्होंने महात्मा गांधी की समाधि राजघाट से जंतर मंतर तक एक रैली निकाली और फिर आमरण अनशन पर बैठ गए.

इंडिया अगेन्स्ट करपशन (भ्रष्टाचार के विरोध में भारत), नाम के संगठन के तहत अन्ना हज़ारे के साथ स्वामी अग्निवेश, मैगसैसे पुरस्कार विजेता अरविन्द केजरीवाल, किरण बेदी और संदीप पांडे, वकील प्रशांत भूषण और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायधीश संतोष हेगड़े साथ आए हैं.

<link type="page"><caption> लोकपाल विधेयक और जन लोकपाल विधेयक में अंतर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2011/04/110405_lokpal_janlokpal_ra.shtml" platform="highweb"/></link>

इस संगठन की ओर से जन लोकपाल विधेयक के नाम से एक नया मसौदा सरकार को दिया है.

ये सरकारी मसौदे से काफ़ी अलग है और मौजूदा रूप में सरकार को मंज़ूर नहीं है. हालांकि सरकार ने इन लोगों को बातचात के लिए बुलाया है.

लोकपाल विधेयक क्यों?

अन्ना हज़ारे के मुताबिक, सूचना के अधिकार कानून में सिर्फ जानकारी मांगने का हक मिलता है, जानकारी की मदद से भ्रष्टाचार का खुलासा होने के बाद ये सज़ा दिलाने का हक नहीं देता.

अन्ना ने कहा, "लोकपाल एक ऐसी भ्रष्टाचार विरोधी इकाई होगी जो दंड भी दिलाएगी, ये इकाई सरकार के दबाव में काम ना करे इसीलिए हम कानून बनाने के समय जनता का प्रतिनिधित्व मांग रहे हैं."

भारत सरकार के कानून मंत्रालय ने लोकपाल विधेयक का एक मसौदा बनाया है लेकिन अन्ना हज़ारे समेत कई सामाजिक कार्यकर्ता और कानूनविद् उससे संतुष्ट नहीं हैं.

इन समाजसेवियों का कहना है कि विधेयक का सरकारी मसौदा लोकपाल को खुद जांच करने का और सज़ा देने का हक नहीं देता.

साथ ही इसके मुताबिक लोकपाल की नियुक्ति सरकार करेगी, जो इस ईकाई के निष्पक्ष होने पर सवाल उठाता है.

लोगों की राय

दिल्ली के अलावा कई और शहरों में भी रैलियाँ निकाली गई हैं
इमेज कैप्शन, दिल्ली के अलावा कई और शहरों में भी रैलियाँ निकाली गई हैं

इसलिए अन्ना हज़ारे और उनके साथी इस विधेयक को संसद में लाए जाने से पहले इसकी समीक्षा समिति में आधा प्रतिनिधित्व चाहते हैं.

सरकार के बनाए मंत्रिसमूह से मुलाकात करने वाले स्वामी अग्निवेश बताते हैं कि सरकार के मुताबिक आम लोगों को विधेयक बनाने की प्रक्रिया में जोड़ने का पहले कोई उदाहरण नहीं है. लेकिन स्वामी अग्निवेश का कहना है कि, "महाराष्ट्र में सूचना के अधिकार विधेयक पर अन्ना हज़ारे के विरोध करने पर राज्य सरकार को आम लोगों की राय लेनी पड़ी थी, वैसा ही अब किया जाना चाहिए."

गौरतलब है कि करीब 40 साल पहले लोकपाल विधेयक को पहली बार संसद में पेश किया गया था, लेकिन तब ये सिर्फ लोक सभा में ही पारित हो पाया था.

इसके बाद सरकारें बदलती रहीं, ये विधेयक कई बार पेश भी किया गया लेकिन आज तक पारित नहीं हुआ है.

इस विधेयक में सुधार करने की मांग कर रहे अन्ना हज़ारे पहले भी अनशन के माध्यम से लोक-हित के कई मुद्दे उठाते रहे हैं.

महाराष्ट्र में सूचना के अधिकार कानून के लिए उन्होंने मुंबई के आज़ाद मैदान में 12 दिन अनशन किया था.

ये कानून पहले महाराष्ट्र में और फिर पूरे देश में लागू होने के बाद, भ्रष्टाचार के कई बड़े घोटालों को सामने लाने में सहायक हुआ है.