कडप्पा में चुनावी युद्ध का मैदान तैयार

जगन मोहन रेड़डी
    • Author, उमर फ़ारूक़
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, हैदराबाद
  • प्रकाशित

आंध्र प्रदेश के कडप्पा लोक सभा चुनाव क्षेत्र और उसके अंतर्गत पुलिवेंदुला विधान सभा क्षेत्र में उप चुनावों के लिए रणभूमि तैयार है. आठ मई को होने वाले इन उपचुनावों में तिकोना मुकाबला होना तय है. एक ओर जहाँ दिवंगत मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी के पुत्र और बागी कांग्रेसी नेता वाईएस जगनमोहन रेड्डी और वाईएसआर की पत्नी विजयलक्ष्मी के लिए यह करो या मरो की लड़ाई है, वहीं सत्तारूढ़ कांग्रेस इस बात की पूरी कोशिश कर रही है कि इन दोनों को पहली ही चुनावी लड़ाई में हराकर इस चुनौती को यहीं ख़त्म कर दिया जाए.

गत नवम्बर में कांग्रेस पार्टी छोड़ते समय ही जगन और उनकी माँ दोनों ने अपनी सीटों से इस्तीफ़ा दे दिया था. उनकी सोनिया गाँधी से इस बात से नाराज़गी थी कि वाईएसआर की मौत के बाद उन्होंने जगन को आंध्र प्रदेश का मुख्यमंत्री नहीं बनाया.

प्रत्याशी

जगन मोहन रेड्डी
इमेज कैप्शन, कडप्पा में जगन के ख़िलाफ़ के कांग्रेस के राजमोहन रेड्डी चुनाव लड़ेंगे.

कांग्रेस और तेलुगुदेसम दोनों ने ही जगन के ख़िलाफ वाईएसआर के पुराने और कट्टर विरोधियों को मैदान में उतरा है.

कांग्रेस ने कन्दुला राजमोहन रेड्डी को अपना उम्मीदवार बनाया है, जो अब तक तेलुगुदेसम में थे और जिनका कडप्पा में काफ़ी प्रभाव है.

उन्होंने वर्ष 1996 का लोक सभा चुनाव तेलुगुदेसम के टिकट पर वाईएसआर के ख़िलाफ़ लड़ा था और वाईएसआर को हराने के करीब पहुंच गए थे. वाईएसआर केवल पांच हज़ार वोटों के अंतर से ये चुनाव जीत पाए थे.

राजमोहन रेड्डी गुरूवार को ही तेलुगुदेसम छोड़ कर औपचारिक रूप से कांग्रेस में शामिल हुए हैं. दूसरी ओर तेलुगुदेसम ने भी वाईएसआर के एक पुराने विरोधी और राज्य सभा सदस्य एमवी मैसूरा रेड्डी को प्रत्याशी बनाया है. मैसूरा रेड्डी पहले कांग्रेस सरकार में गृह मंत्री भी रह चुके हैं लेकिन बाद में वाईएसआर के साथ अपने कड़वे संबंधों के कारण वो कांग्रेस छोड़कर तेलुगुदेसम में शामिल हो गए.

कड़ा मुकाबला

जगन केवल 36 वर्ष के हैं और अब तक केवल एक बार 2009 में चुनाव लड़ चुके हैं, जबकि उनके दोनों विरोधी बहुत अनुभवी हैं और उन्हें जम कर टक्कर दे सकते हैं. कडप्पा में जनभावना आमतौर पर जगन के पक्ष में है क्योंकि वाईएसआर की मौत के बाद लोगों में उनके प्रति काफ़ी सहानुभूति है. कांग्रेस का एक बड़ा हिस्सा भी उनके साथ है जिनमें ज़िले के पांच विधायक भी शामिल हैं. साथ ही ये भी तय है कि वो 2009 की चुनावी जीत को नहीं दोहरा सकेंगे जब वो दो लाख बीस हज़ार से ज़्यादा वोटों के भारी बहुमत से जीते थे.

विरासत की लड़ाई

वाईएसआर रेड्डी का परिवार
इमेज कैप्शन, पुलिवेंदुला विधानसभा उपचुनाव में पारिवारिक युद्ध देखने को मिलेगा.

इस उपचुनाव में वाईएसआर की राजनैतिक विरासत के लिए कांग्रेस और जगन आपस में टकरायेंगे और दोनों ही ये दावा करेंगे कि वाईएसआर पर उन का ज़्यादा अधिकार है. जहाँ तक पुलिवेंदुला विधान सभा क्षेत्र का सवाल है, वहां पर पारिवारिक युद्ध देखने को मिलेगा. विजयलक्ष्मी के मुकाबले में कांग्रेस ने वाईएसआर के छोटे भाई और राज्य के कृषि मंत्री विवेकानंद रेड्डी को उतरा है.

तेलुगुदेसम ने भी एक स्थानिय युवा रविंदर रेड्डी को मैदान में उतरा है. दिलचस्प बात ये है कि माँ-बेटे दोनों ने अभी से अपना चुनाव अभियान शुरू कर दिया है. जगन बड़ी सभाएं कर रहे हैं और विजयलक्ष्मी घर-घर जाकर वोट मांग रही हैं.