तृणमूल कांग्रेस की यूपी में दस्तक

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संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार में कांग्रेस पार्टी की सहयोगी तृणमूल कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में अकेले लड़ने का ऐलान तो पहले ही कर दिया था, लेकिन उसके तेवर अब नज़र आ रहे हैं.
पार्टी नेता ममता बनर्जी ने राज्य विधानसभा चुनाव में 200 उम्मीदवारों को मैदान में उतार दिया है. इनमें से कई ऐसे कद्दावर नेता भी शामिल हैं, जिन्हें कांग्रेस पार्टी में टिकट नहीं मिल सका था.
ममता बनर्जी के इस क़दम से कांग्रेस पार्टी के लिए कुछ मुश्किलें ज़रूर खड़ी हो सकती हैं क्योंकि केंद्र में वो यूपीए सरकार में शामिल हैं लेकिन राज्य में कांग्रेस के ख़िलाफ़ हैं.
इससे जनता में ग़लत संदेश जाने का अंदेशा है.
बाग़ी प्रत्याशी
दूसरे, तृणमूल कांग्रेस ने कई ऐसे दिग्गजों को चुनाव में उतार दिया है, जो कांग्रेस पार्टी से टिकट पाने से वंचित रह गए थे. ऐसे में ये उम्मीदवार वहां कांग्रेसी प्रत्याशियों को नुक़सान पहुंचा सकते है.
ख़ुद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी के निर्वाचन क्षेत्र लखनऊ कैंट से उनके ख़िलाफ़ महिला कांग्रेस की ही पूर्व महासचिव सुरैया सिद्दीक़ी तृणमूल कांग्रेस से चुनाव लड़ रही हैं.
ममता बनर्जी ने पूर्व नौकरशाह और कांग्रेस के नेता रहे राय सिंह को राज्य में अपनी पार्टी का संयोजक बनाया है.
इसके अलावा कांग्रेस के किसान नेता और पीलीभीत से वरूण गांधी के ख़िलाफ़ लोकसभा का चुनाव लड़ चुके वीएम सिंह भी टीएमसी में शामिल हो चुके हैं.
इन्हें भी कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनावों में उम्मीदवार नहीं बनाया था.
हालांकि तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि उसका मक़सद चुनाव में कांग्रेस पार्टी को नुकसान पहुंचाना नहीं है, लेकिन जिस तरह से कांग्रेस से ख़फ़ा लोगों को पार्टी ने शरण दी है उससे तो समीकरण कुछ अलग ही बन सकते हैं.

























