छत्तीसगढ़ में कथित मुठभेड़ के मामले ने तूल पकड़ा

- Author, सलमान रावी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, रायपुर
- प्रकाशित
छतीसगढ़ के बीजापुर जिले में शुक्रवार को सुरक्षा बलों के साथ हुई माओवादियों की कथित मुठभेड़ का मामला गहराता जा रहा है. कांग्रेस की एक टीम ने रविवार को इलाके का दौरा किया.
सुरक्षा बलों पर आरोप है कि उन्होंने मुठभेड़ में माओवादियों के बजाय 20 ग्रामीणों को मार गिराया था.
रविवार की सुबह छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी का एक दल बस्तर के विधायक कवासी लकमा के नेतृत्व में बासागौड़ा पहुंचा और उन्होंने साकेगोड़ा गांव में जाकर घटना के बारे में जानकारी जुटाई.
उन्हें पता चला कि मारे गए ज्यादातर लोगों के पास मतदाता पहचान पत्र और राशन कार्ड थे. इससे संकेत मिलता है कि ये लोग आम नागरिक थे और वे जंगल में न रह कर गांव में रह रहे थे.
न्यायिक जांच की मांग
इससे पहले माओवादियों की साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी के विजय मड़काम ने एक टेलीफोन पर दिए संदेश में ये आरोप लगाया है कि शुक्रवार को जब सुरक्षा बलों के जवान गांव को घेर कर गोलियां चला रहे थे, उसमें ज्यादातर गांव के लोग ही मारे गए हैं.
मड़काम का ये भी कहा है कि लोग मारे गए लोगों में उनके संगठन का कोई सदस्य नहीं था.
माओवादियों का ये भी आरोप है कि सुरक्षा बल घटना के बाद लगभग 15 ग्रामीणों को थाने ले गए जहां उनकी बुरी तरह से पिटाई की गई. सुरक्षा बलों के जवानों पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के आरोप भी लगाए गए हैं.
उधर इस मामले को लेकर राज्य और केंद्र सरकार की तरफ से किसी जांच की बात अभी तक नहीं कही गई है. सामाजिक संगठन और मानवाधिकार समूह सरकार पर इस पूरे मामले की न्यायिक जांच के लिए दबाव डाल रहे हैं.

























