सड़क पर मंत्रियों का न्याय कितना जायज़?

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दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के मंत्री प्रशासन को दुरुस्त करने के लिए अपने दफ़्तरों से बाहर सड़कों पर उतर रहे हैं.
क़ानून मंत्री सोमनाथ भारती दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी को आपराधिक गतिविधियों को रोकने में कोताही के लिए सड़क पर ही फटकार लगाते हैं.
एक और मंत्री राखी बिड़ला शहर में महिलाओं की सुरक्षा का जायज़ा लेने के लिए रात को सड़कों पर निकल आती हैं.
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रेस कॉन्फ़्रेंस में खुलेआम दिल्ली पुलिस की आलोचना करते हैं.
क्या आम आदमी पार्टी सड़क के आदमी के साथ खड़े होकर नए ढंग का प्रशासन शुरू कर रही है या फिर प्रशासन के मान्य नियमों को बदल रही है?
क्या मंत्रियों के सड़क पर उतर कर प्रशासन चलाना उचित है या फिर पुलिस का काम में अनुचित हस्तक्षेप?
या फिर काँग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के पुराने तौर-तरीक़ों को बदलने के लिए ही आम आदमी पार्टी को जनादेश मिला है?
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