दिल्ली का एक गांव बना फ़ैशन का गढ़

शाहपुर जाट
    • Author, सुमिरन प्रीत कौर
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
  • प्रकाशित

एक तरफ़ पुराने घर जिनके बाहर पड़ी खाट पर बैठकर गप्पें लड़ाते लोग और सड़क के दूसरी तरफ़ डिज़ाइनर बुटीक़.

इनके मालिक हैं ब्रिटेन, फ़्रांस और ग्रीस जैसे देशों से आए विदेशी.

ये नज़ारा है दक्षिणी दिल्ली के हौज़ ख़ास, ग्रीन पार्क और आईआईटी जैसे पॉश इलाकों से सटे शाहपुर जट गांव का.

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इन बुटीक़्स के अंदर डिज़ाइनर कपड़ों के अलावा आप पाएंगे कैफ़े, जहां आप गर्मागर्म कैप्पेचीनो और पास्ता का नाश्ता कर अपनी भूख भी मिटा सकते हैं.

ये विदेशी डिज़ाइनर अब दिल्ली को ही अपना घर मानने लगे हैं.

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ग्रीस मूल की एलेका करानो यहां कुछ साल पहले न्यूयॉर्क से आईं और यहीं की होकर रह गईं.

'फ़ैशन हब'

एलेका करानो

एलेका ने बीबीसी को बताया, "दिल्ली डिज़ाइनर्स के लिए एक फ़ैशन हब बनता जा रहा है और दिल्ली के अंदर शाहपुर जट से बेहतर कुछ नहीं है. यहां पर एक जगह सारी काम की चीज़ें उपलब्ध हैं."

वो बताती हैं, "सिलाई का सामान भी और स्थानीय कारीगर भी. यहां के लोग हमारी सिलाई बुनाई में मदद करते हैं. हमारी बुटीक़ और वर्कशॉप दोनों यहीं पर है और इस जगह का किराया भी बाकी जगहों से कम है. यह मेरे जैसे सभी डिज़ाइनर्स की पसंदीदा जगह है."

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एलेका करानो
इमेज कैप्शन, न्यूयॉर्क से आई एलेका करानो का शाहपुर जाट में बुटीक़ है

एलेका जब न्यूयॉर्क छोड़ना चाहती थीं तो उनके पास अपना कारोबार शुरू करने के लिए दो विकल्प थे. भारत और चीन. फिर भला उन्होंने भारत को क्यों चुना ?

इसके जवाब में एलेका कहती हैं, "भारत के लोगों में फ़ैशन की समझ ज़्यादा है. मैं अपने फ़ैसले से बहुत ख़ुश हूं. न्यूयॉर्क फ़ैशन के लिहाज़ से लगभग मर चुका है. अब वहां लोगों में कला की कोई कद्र नहीं है. लोग सिर्फ़ पैसे कमाना चाहते हैं."

स्थानीय लोग भी इन डिज़ाइनर्स के यहां आने से ख़ुश हैं क्योंकि एक हद तक इससे यहां के लोगों को रोज़गार मिलता है.

ये डिज़ाइनर यहां के लोगों की पुरानी हवेली किराए पर लेते हैं और अपना काम शुरू कर देते हैं. एलेका का बुटीक़ भी जिस हवेली में है वो सौ साल पुरानी है.

वो कहती हैं, "जब मैंने इस जगह को देखा तो मुझे इस जगह से प्यार हो गया. मैंने हवेली की दीवारों में, इसके पुराने ढांचे में कोई ख़ास बदलाव नहीं किया, ताकि इमारत का पुराना टच कायम रहे. यहां बस अब कुछ ही इमारतें ऐसी बची हैं."

बदल गया माहौल

शाहपुर जाट

पिछले सालों में यहां बहुत कुछ बदला है. यहां अब डिज़ाइनर्स के आने से लोगों का आना-जाना ज़्यादा होने लगा है और यहां के किराए भी तीन गुना तक बढ़ गए हैं. इससे स्थानीय लोगों की आर्थिक स्थिति भी बेहतर हो रही है. गाँव वालों को मुनाफ़ा होता है.

पिछले आठ साल से भारत में रह रहीं एलेका के डिज़ाइन किए कपड़ों पर किए गए काम में भी भारत का प्रभाव साफ़ देखा जा सकता है.

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एलेका के मुताबिक़, "मैं पश्चिमी शैली के कपड़े बनाती हूं, लेकिन भारत के उजले रंग और डिज़ाइन के प्रभाव को आप साफ देख सकते हैं. मैं कपड़े 30 बरस से ऊपर की महिलाओं को ध्यान में रखकर बनाती हूं."

शाहपुर जाट

इन बुटीक़्स में ज़्यादातर ख़रीदार नौजवान भारतीय और दूतावास कर्मचारी और अधिकारी होते हैं.

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जब आप यहां की गलियों से होकर गुज़रेंगे तो भारतीय और पश्चिमी सभ्यता के मिलन को साफ़ महसूस कर सकते हैं.

जहां एक तरफ भारत के रंग इनके कपड़ों में झलकते हैं वहीं बाहर से आए लोगों के रहन-सहन का असर भी यहां दिखता है.

'कॉन्सेप्ट कैफ़े'

कॉन्सेप्ट कैफ़े

फ्रांस से आई कैथरीन बारबिएखा ने यहां पर अपना कैफ़े खोला है जिसे नाम दिया है 'कैफ़े ले परीनियां'. वो 14 साल पहले भारत आई थीं. हालांकि ये कैफ़े उन्होंने तीन साल पहले ही खोला.

इस कैफ़े के एक कोने में आप विंटेज कपड़े और घर की सजावट का सामान देख सकते हैं तो दूसरी तरफ़ आप आराम से बैठ कर खा-पी सकते हैं. इनके कैफ़े में फ्रेंच खाना मिलता है.

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इस तरह के कैफ़े जहां डिज़ाइनर कपड़े और खाने-पीने की चीज़ें एक साथ मिलती हैं, उन्हें कॉन्सेप्ट कैफ़े भी कहा जाता है.

कैथरीन के मुताबिक़, "हमारे यहां विंटेज कपड़े और सामान मिलता है. 40, 50 और 60 के दशक के फ़ैशन वाले कपड़े और कई ऐतिहासिक सामान भी मिलते हैं. यहां गांव होने से ज़्यादा भीड़-भाड़ नहीं होती और शांत माहौल होता है."

ख़तरा

कैथरीन बारबिएखा

लेकिन इन डिज़ाइनर्स को आधुनिकीकरण से एक ख़तरा भी महसूस हो रहा है. वो ख़तरा है रोज़ाना नई इमारतों और बिल्डरों के फैलता जाल.

PGLये शोखियां, ये बांकपनये शोखियां, ये बांकपनयूं तो मौक़ा था कॉस्ट्यूम डिजाइनर्स गिल्ड एवार्ड का, लेकिन यहां भी हुस्न का ही जलवा छाया रहा. जाहिर है ये अदाएं उनके चाहने वालों की धड़कनों पर भारी पड़ेंगी ही.2014-02-23T15:27:15+05:302014-02-25T06:58:29+05:30PUBLISHEDhitopcat2

कैथरीन के मुताबिक़, "डर लगता है कि कहीं इस जगह की महत्ता ही ना ख़त्म हो जाए. हमने ये हवेली किराए पर ली है, लेकिन हो सकता है कि हवेलियों के मालिक अब इसे बिल्डरों को बेचना चाहें या नए ज़माने की इमारत बनाना चाहें. इसलिए मुझे लगता है कि ये सब बस अब थोड़े समय की बात है. शायद यहां पुराने जैसा कुछ ना बचे."

लेकिन इन सब चिंताओं को फ़िलहाल दरकिनार करते हुए कैथरीन अपने बुटीक़ में आए नए ग्राहक को कपड़े दिखाने में व्यस्त हो जाती हैं.

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