जान जोख़िम में डालकर पकड़ते हैं मगरमच्छ

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- Author, चिरंतना भट्ट
- पदनाम, बीबीसी हिन्दी डॉटकॉम के लिए
- प्रकाशित
गुजरात के बड़ौदा शहर में मगरमच्छों का दिखना अब कोई नई बात नहीं. कई साल से बारिश के दौरान ऐसी घटनाएं होती रहती हैं.
बीबीसी ने मगरमच्छ पकड़ने वालों से बात की.
गुजरात स्टेट प्रिवेन्शन ऑफ़ क्रुएलिटी टु एनीमल्स (जीएसपीसीए) संस्था से जुड़े स्वयंसेवियों को लगता है कि मगरमच्छ से ज़्यादा तकलीफ़ वहां इकट्ठे लोगों से होती है, जो मगरमच्छों पर हमला करके हालात को मुश्किल बना देते हैं.
देवांग दातार की आयु सिर्फ़ 20 साल है. वे बीते आठ महीनों से रेसक्यू टीम के साथ काम कर रहे हैं.
उन्होंने बताया, "मगरमच्छ पकड़ने की पूरी समझ देने के बाद ही वरिष्ठ हमें कॉल आने पर अपने साथ ले जाते हैं. कुछ दिन पहले 15 फ़ुट लंबे मगरमच्छ को पकड़ने के बाद उसे उठाने के लिए हमें लोगों की मदद लेनी पड़ी."
उन्होंने एक और अनुभव बताया. "जब मगरमच्छ को पकड़कर हम टीम के साथ चले कि मादा मगरमच्छ ने पीछे से आकर हमला बोल दिया. हालांकि किसी को नुक़सान नहीं हुआ. पकड़ा हुआ मगरमच्छ लेकर भागे और सुरक्षित जगह पहुंच गए."

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जानवरों के रेसक्यू मिशन से जुड़े 23 साल के शोधन गांधी बताते हैं, "पहले छोटे पक्षी को बचाना सिखाया जाता है. बाद में जंगली पक्षी की बारी आती है. फिर सांप पकड़ना सीखते हैं. आख़िर में मगरमच्छ पकड़ना और बचाना सिखाया जाता है."

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तो उन्हें डर नहीं लगता? इस पर उन्होंने कहा, "ये जंगली जानवर हैं और उनसे डरना चाहिए.''
उनका कहना है, ''ज़्यादा आत्मविश्वास जानलेवा हो सकता है. जब पहली बार मैंने बड़ा मगरमच्छ पकड़ा था, तब बहुत रोमांच हुआ था."

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20 साल के धनराज चौहान के लिए बड़ौदा के विश्वनाथ मंदिर के पास तालाब से चार मगरमच्छ पकड़ने का अनुभव काफ़ी साहसिक रहा था.
वे कहते हैं, "मगरमच्छ पकड़ना आसान नहीं है. एक बार सात फ़ीट लंबे मगरमच्छ ने पूंछ से वन विभाग के कर्मचारी को घायल कर दिया था."

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मितेश पटेल आठ साल से मगरमच्छ पकड़ रहे हैं. पहली बार उन्होंने 11 फ़ीट का मगरमच्छ पकड़ा था. उन्हें कई बार मुश्किलों से भी गुज़रना पड़ा है.

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वे कहते हैं, "एक बार मगरमच्छ ने मुझे काट लिया था. मैं कीचड़ भरे खेत से उसे निकालने की कोशिश कर रहा था. बहुत सारा ख़ून निकला था. मैंने घर में झूठ बोला ताकि यह काम जारी रख सकूं."
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