क्यों लेते हैं नेताओं के समर्थक अपनी ही जान?

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
- प्रकाशित
मीडिया में ख़बरें छपी हैं कि तमिलनाडु में पिछले शनिवार से कम से कम 16 लोगों ने खुदकुशी कर ली है.
हालाँकि राज्य के हर ऐसे मामले की पुष्टि करनी मुश्किल है लेकिन इस खबर को तमिलनाडु की करिश्माई नेता जयललिता को हुई जेल की सज़ा से जोड़ कर देखा जा रहा है.
मनोचिकित्सकों का कहना है कि खुदकुशी की ऐसी घटनाओं के पीछ सामाजिक और सांस्कृतिक कारण होते हैं.
इमरान कुरैशी का विश्लेषण
अखबार में छपी रिपोर्टों में ये भी कहा गया है कि जयललिता को जेल भेजे जाने के सदमे में कुछ लोगों ने खुदकुशी कर ली है तो कुछ की मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई है.
भावुक लोग

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इंडियन साइकाइट्रिक सोसायटी के अध्यक्ष डॉक्टर टीवी अशोकन ने बीबीसी को बताया, "यहां के लोग बेहद भावुक होते हैं. नेता किसी भगवान की तरह पूजे जाते हैं और इस तरह से लोग अपनी श्रद्धा के चरम पर पहुँच जाते हैं."
चेन्नई के साज मेडिकल हॉस्पिटल के डॉक्टर एम सुरेश कुमार कहते हैं, "ये कोई नया चलन नहीं है. हमने ये अतीत में भी देखा है. इसकी जड़ें समाज और संस्कृति में है क्योंकि यहां के लोग स्वभाव से भावुक हैं."
पहचान

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फ़ोर्टिस मलार हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक डॉक्टर एन रंगराजन कहते हैं, "उनमें बहुत से लोगों की अपनी कोई पहचान नहीं होती है.ऐसे लोगों के लिए यही उनकी पहचान है कि वे किसी नेता, अभिनेता या फिर किसी खिलाड़ी के प्रशंसक हैं. तमिलनाडु जैसे राज्य में ये हस्तियाँ भगवान की तरह बन जाती हैं."
द्रविड़ आंदोलन के संस्थापक डॉक्टर सीएन अन्नादुरै की मौत के बाद भी कई लोगों ने खुदकुशी कर ली थी.
और कई सालों बाद अभिनेता से नेता बने अन्नाद्रमुक के संस्थापक एमजी रामचंद्रन की मौत के बाद भी कुछ ऐसा ही हुआ था.
हल क्या है?

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डॉक्टर सुरेश कहते हैं, "ऐसे लोगों को लगता है कि अगर उनके भगवान या फिर उनके नेता को कुछ हुआ, तो वह उन्हीं पर बीती है. यह कोई वहम नहीं है बल्कि वो ये स्वीकार ही नहीं कर पाते हैं. यही वजह है कि वे अपनी जान लेने की कोशिश करते हैं और कई बार तो कामयाब भी हो जाते हैं."
लेकिन सवाल उठता है कि इस मुश्किल का हल क्या है?
लंबी प्रक्रिया

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डॉक्टर सुरेश कुमार कहते हैं, "तनाव बाहर लाने के और रास्ते खोजने होंगे और ये एक सामूहिक प्रक्रिया है."
"हमें ये बताने की जरूरत है कि तनाव से निकलने के और भी बेहतर रास्ते हैं. उनके नेता और आदर्श भी इसमें अपनी भूमिका निभा सकते हैं."
हालांकि डॉक्टर सुरेश का मानना है कि यह एक लंबी प्रक्रिया है और इसका जल्द कोई समाधान नहीं है.
डॉक्टर अशोकन के मुताबिक एक अच्छी बात ये हुई है कि हाल के सालों में खुदकुशी करने की घटनाएं कम हुई हैं.
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