विलय नहीं हुआ तो गठबंधन करेंगे: शरद

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इस साल होने वाले बिहार विधान सभा चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड के गठबंधन को लेकर राजनीति तेज़ हो गई है.
भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ एकजुट होकर जनता परिवार की सभी पार्टियाँ एक दल बनाने की बात कर रही थीं लेकिन फिलहाल उनके बीच चुनाव तेलमेल ही संकट में दिख रहा है.
बिहार में चुनाव से पहले विभिन्न दलों के गठबंधन की स्थिति पर बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय ने बात की जदयू अध्यक्ष शरद यादव से
शरद यादव से बातचीत के अंश

बिहार में गठबंधन की क्या स्थिति है?
हमने कहा है कि गठबंधन होगा ज़रूर. उसके लिए हम प्रयास कर रहे हैं.
पहले जनता परिवार के विलय की बात कही गई थी. बिहार चुनाव तक विलय होना संभव नहीं दिख रहा?
मैं इस विषय पर चुनाव आयोग से मिलने वाला हूँ. विलय में तकनीकी दिक्कत आएगी तो गठबंधन ही होगा.
चुनाव के बाद मु्ख्यमंत्री कौन होगा?
मैं इन सारी बातों पर अभी नहीं बोलना चाहता.
आप इसपर नहीं बोलना चाहते लेकिन कहा जा रहा है कि गठबंधन के बीच यही पेंच है?
बड़ा काम होता है तो कई तरह की दिक्कत आती है. सबका समाधान किया जाएगा.

यानी बिहार में जनता दल यू और राजद मिलकर चुनाव लड़ेंगे?
बिहार में जदयू, राजद, कांग्रेस और एनसीपी मिलकर चुनाव लड़ेंगे, इसके लिए मैं अपनी सम्पूर्ण शक्ति लगाए हुए हूँ. जनता का संगठित स्वरूप तभी सामने आता है.
इसकी आधिकारिक घोषणा कब होगी?
मैं तारीख तो नहीं बता सकता लेकिन मेरा पक्का मानना है कि जनता का दबाव काम आएगा.
इस गठबंधन को लेकर विरोधाभासी बातें सामने आ रही हैं?
इसपर मुझे कुछ नहीं कहना.
आपको नहीं लगता ऐसी ख़बरों से वोटरों के बीच ग़लत संदेश जाता है?
एक दिन पहले भी खड़े हो जाएंगे तो जनता इकट्ठी हो जाएगी. जनता पार्टी तो जीतने के बाद बनी थी. हमारा समाज बहुत जटिल है. यहाँ हर चीज़ में बहुत कठिनाई होती है लेकिन प्रयास करने पर सब सही हो जाता है.

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इस गठबंधन में मुद्दों के लेकर ज़्यादा बात होगी या बस सारी पार्टियाँ भाजपा को हराने के लिए इकट्ठा हो रही हैं?
मुद्दा तो ये है कि इस सरकार के शासन में आने के बाद देश में 80-90 फ़ीसदी लोग हाशिए पर चले गए. नरेंद्र मोदी दो करोड़ नौजवानों कौ रोजगार दे रहे थे, हर खेत को पानी दे रहे थे, हर अकाउंट में ब्लैक मनी का 15 लाख रुपए डालने की बात कह रहे थे. अभी भी एक दिन भी ठहरे नहीं हैं, रोज़ नए सपने दिखा रहे हैं.
इस देश के 90 फ़ीसदी नागरिक, मध्यवर्ग, दलित, किसान, मज़दूर, नौजवान सभी पिसे जा रहे हैं. ये इतनी बड़ी चुनौती है कि सबको इकट्ठा होना पड़ेगा.
भाजपा का आरोप है कि ये मौकापरस्ती है?
हमारे विरोधी क्या कहते हैं इसका हमें कोई फर्क नहीं पड़ता...वो रोज़ गाली दें हमें फर्क नहीं पड़ता.
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