दिल्ली में बड़ा भूकंप आया तो क्या होगा...

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    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित

मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी में आए शक्तिशाली भूकंप में 120 से ज़्यादा लोगों की मौत हो गई है और दर्जनों इमारतें जमींदोज़ हो गई हैं. राहतकर्मी मलबों में जीवित बचे लोगों को तलाश रहे हैं और अधिकारियों का कहना है कि मरनेवाली की संख्या बढ़ सकती है.

रिक्टर पैमाने पर 7.1 की तीव्रता वाले भूकंप ने मेक्सिको सिटी, मोरलियोस और पुएब्ला प्रांतों में भारी तबाही मचाई है.

ऐसे में सवाल ये उठता है कि अगर ज़लज़ला भारत में आया तो दिल्ली जैसे शहरों पर कितना असर पड़ेगा?

बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने कुछ समय पहले इस मुद्दे पर एक्सपर्ट से बात की थी.

जानकार सिस्मिक ज़ोन-4 में आने वाले भारत के सभी बड़े शहरों की तुलना में दिल्ली में भूकंप की आशंका ज़्यादा बताते हैं.

गुड़गांव, एमजी रोड

मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे शहर सिस्मिक ज़ोन-3 की श्रेणी में आते हैं.

भूगर्भशास्त्री कहते हैं कि दिल्ली की दुविधा यह भी है कि वह हिमालय के निकट है जो भारत और यूरेशिया जैसी टेक्टॉनिक प्लेटों के मिलने से बना था और इसे धरती के भीतर की प्लेटों में होने वाली हलचल का खामियाज़ा भुगतना पड़ सकता है.

'इंडियन एसोसिएशन ऑफ स्ट्रक्चरल इंजीनियर्स' के अध्यक्ष प्रोफ़ेसर महेश टंडन को लगता है कि दिल्ली में भूकंप के साथ-साथ कमज़ोर इमारतों से भी ख़तरा है.

उन्होंने कहा, "हमारे अनुमान के मुताबिक़ दिल्ली की 70-80% इमारतें भूकंप का औसत से बड़ा झटका झेलने के लिहाज़ से डिज़ाइन ही नहीं की गई हैं. पिछले कई दशकों के दौरान यमुना नदी के पूर्वी और पश्चिमी तट पर बढ़ती गईं इमारतें ख़ास तौर पर बहुत ज़्यादा चिंता की बात है क्योंकि अधिकांश के बनने के पहले मिट्टी की पकड़ की जांच नहीं हुई है".

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भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय पहले आदेश दिया था कि ऐसी सभी इमारतें जिनमें 100 या उससे अधिक लोग रहते हैं, उनके ऊपर भूकंप रहित होने वाली किसी एक श्रेणी का साफ़ उल्लेख होना चाहिए. फ़िलहाल तो ऐसा कुछ देखने को नहीं मिलता.

दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की एक बड़ी समस्या आबादी का घनत्व भी है. लगभग डेढ़ करोड़ वाली राजधानी दिल्ली में लाखों इमारतें दशकों पुरानी हैं और तमाम मोहल्ले एक दूसरे से सटे हुए बने हैं.

भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार दिल्ली और उत्तर भारत में छोटे-मोटे झटके या आफ्टरशॉक्स तो आते ही रहेंगे लेकिन जो बड़ा भूकंप होता है उसकी वापसी पांच सौ वर्ष में ज़रूर होती है और इसीलिए ये चिंता का विषय भी है.

वैसे भी दिल्ली से थोड़ी दूर स्थित पानीपत इलाके के पास भूगर्भ में फॉल्ट लाइन मौजूद है जिसके चलते भूकंप की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.

गुड़गांव

सवाल यह भी है कि दिल्ली भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा से निपटने के लिए कितनी तैयार है.

सार्क डिज़ास्टर मैनेजमेंट सेंटर के निदेशक प्रोफ़ेसर संतोष कुमार को लगता है कि पहले की तुलना में अब भारत ऐसी किसी आपदा से बेहतर निपट सकता है.

उन्होंने बताया, "देखिए आशंकाएं सिर्फ़ अनुमान पर आधारित होती हैं. अगर हम लातूर में आ चुके भूकंप को ध्यान में रखें तो निश्चित तौर पर दिल्ली में कई भवन असुरक्षित हैं. लेकिन बहुत सी जगह सुरक्षित भी हैं. सबसे अहम है कि हर नागरिक ऐसे ख़तरे को लेकर सजग रहे और सरकारें प्रयास करें कि नियमों का उल्लंघन कतई न हो."

'सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट' की अनुमिता रॉय चौधरी का भी मानना है कि दिल्ली में हज़ारों ऐसी इमारतें हैं जिनमें रेट्रोफिटिंग यानी भूकंप निरोधी मरम्मत की सख़्त ज़रूरत है.

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