छात्रों की भूख हड़ताल ग़ैरकानूनी: जेएनयू वीसी

- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, जेएनयू, दिल्ली
- प्रकाशित
एक तरफ़ जहां जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के बिगड़ते <link type="page"><caption> स्वास्थ्</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/05/160505_kanhaiya_in_health_centre_aa.shtml" platform="highweb"/></link>य के कारण उन्हें एम्स में भर्ती करना पड़ा है, वहीं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर एम जगदेश कुमार ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जो व्यक्ति की ज़िंदगी को नुक़सान पहुंचाए, उसे बढ़ावा नहीं देना चाहिए और वो ग़ैर-कानूनी है.”
बुधवार को छात्रों के लिए जारी एक अपील में वाइस चांसलर ने इस भूख हड़ताल को “ग़ैरकानूनी” बताया था.
उन्होंने कहा, “छात्रों की हालत देखने के बाद हमने उनसे अपील की थी. छात्रों की हालत खराब हो रही है. हमने उनसे भूख-हड़ताल बंद करने की विनती की.”

प्रोफ़ेसर एम जगदेश कुमार ने कहा, “अपने संदेश देने के अलग-अलग तरीके मौजूद हैं. लेकिन भूख हड़ताल करके क्यों कोई बरबाद हो? ये अच्छा नहीं.”
भूख हड़ताल के आठवें दिन एबीवीपी ने अपनी भूख हड़ताल वापस ले ली है, लेकिन वाम दलों से जुड़े छात्र संगठनों के छात्रों की भूख हड़ताल जारी है. हालांकि वहां भी खराब स्वास्थ्य के कारण चार छात्रों ने अपनी भूख हड़ताल खत्म कर दी है.

छात्रों की मांग है कि नौ फ़रवरी के विवादास्पद नारों के मामले पर प्रशासन ने छात्रों पर जो <link type="page"><caption> कार्रवाई</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/04/160428_jnu_hunger_strike_vk.shtml" platform="highweb"/></link> की थी, उसे वापस लिया जाए.
गतिरोध के हल और छात्रों से बातचीत पर प्रोफ़ेसर जगदेश कुमार ने कहा, “आपका स्वास्थ्य अच्छा होना चाहिए. खाइए, खाकर हमारे सामने बैठिए. ऐसा नहीं है कि हमें उनके बारे में चिंता नहीं है. हम बातचीत तो कर रहे हैं.”
उधर <link type="page"><caption> कन्हैया</caption><url href="http://www.bbc.com/hindi/india/2016/04/160424_kanhaiyya_aircraft_incident_dil.shtml" platform="highweb"/></link> के बिगड़ते स्वास्थ्य पर भूख हड़ताल पर बैठीं श्वेता राज ने बताया, “उनका रक्तचाप कम हो गया है. बुधवार को ही उनकी तबीयत खराब थी लेकिन गुरुवार को उनकी तबीयत गंभीर हो गई.”

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वाइस चांसलर के साथ गुरुवार को छात्रों की मुलाकात हुई थी. गुरुवार को जेएनयू शिक्षक संघ के सदस्यों ने भी वाइस चांसलर से मुलाकात की.
जेएनयू शिक्षक संघ सचिव विक्रमादित्य ने बताया, “वाइस चांसलर ने हमसे अपील की है कि हम छात्रों से बात करें, जो अपील हम (छात्रों से) पहले ही कर चुके हैं. हमने साफ़ कहा है कि संघर्ष ज़रूरी है लेकिन इसके लिए बलिदान देने की ज़रूरत नहीं है. हमने छात्रों से कहा है कि वो शरीर के अंगों को नुकसान न पहुंचने दें. न्याय के लिए लड़ने के लिए ज़रूरी है कि आप स्वस्थ रहें.”

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जेएनयू, इलाहाबाद विश्वविद्यालय सहित दूसरे शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रों के प्रदर्शन पर प्रोफ़ेसर जगदेश कुमार ने कहा कि नई तकनीक के कारण विद्यार्थियों के बीच बहस होती है, जिससे लोग अपने विचार कायम करते हैं और फिर वो अपने विचारों को सबके सामने रखते हैं.
उन्होंने कहा, “आप सोचते हैं कि बहुत ज़्यादा हो गया, लेकिन मेरी सोच है ये कि स्वाभाविक है. गुस्से से अपनी भावनाओं को व्यक्त करना भी बेहद स्वाभाविक है.”
उन्होंने दोहराया कि जेएनयू में सभी को अपनी बात रखने की आज़ादी है और उसे कभी भी दबाया नहीं गया लेकिन “कोई भी ऐसी बात जो ग़ैरकानूनी हो और संवैधानिक दायरे से बाहर हो उसे बढ़ावा नहीं देना चाहिए.”

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जेएनयू में दिल्ली पुलिस के आने पर प्रोफ़ेसर जगदेश कुमार ने कहा, “ये पहली बार नहीं है कि पुलिस जेएनयू में आई हो."
उन्होंने कहा, “पुलिस ने हमसे किसी बात के लिए जानकारी मांगी, हमने उन्हें अनुमति दी कि उन्हें जो भी जानकारी चाहिए वो ले सकते हैं. हमारे मन में भी ये नहीं था कि कोई गिरफ़्तारी होगी... जेएनयू ने पुलिस को नहीं बुलाया. हमने पुलिस से कहा कि आपको जानकारी चाहिए तो आ सकते हैं, क्योंकि कानून के मुताबिक पुलिस कहीं भी जा सकती है... कानून के अनुसार अगर पुलिस आना चाहे तो हमें रोकने की कोई शक्ति नहीं है.”
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