जयललिता के फ़ैसलों से मुश्किलें बढ़ेंगी या घटेंगी?

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
- प्रकाशित
तमिलनाडु में लगातार दूसरी बार सत्ता में लौटकर, जयललिता ने अपने गुरु एमजी रामचंद्रन के 32 साल पुराने रिकार्ड की बराबरी की है.
जयललिता ने शपथ ग्रहण के तुरंत बाद, अपने पांच चुनावी वादों को पूरा करते हुए, आधिकारिक फ़ैसला लिया है.
लेकिन जयललिता के सामने कई चुनौतियाँ हैं, जो राजनीतिक भी हैं और आर्थिक भी.
जानकारों के मुताबिक़ उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती, आय से अधिक संपत्ति का 22 साल पुराना मामला है. अब भी इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.
वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक मलान ने बीबीसी को बताया, "इस मामले पर जुलाई में फ़ैसला आने की संभावना है और हर कोई इस पर अपने हिसाब से फ़ैसले की आस लगाकर बैठा है."

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मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ़ डेवलपमेंट स्टडीज़ के प्रोफ़ेसर सी लक्ष्मणन का कहना है, "आय से अधिक संपत्ति का मामला उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी, पिछले कार्यकाल में उनके सामने कोई मज़बूत विपक्ष नहीं था, जबकि इस बार उन्हें डीएमके से बड़ा विरोध झेलना होगा."
रुख़ जयललिता के शपथ ग्रहण के तत्काल बाद लिए गए फ़ैसलों की करें, तो उन्होंने राज्य में शराब की 500 सरकारी दुकानों को बंद करने और और बाक़ी दुकानों के खुले रहने के समय में कटौती करने का आदेश दिया है.
मुख्यमंत्री के इस फ़ैसले का राज्य की अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा.
मद्रास यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर आर श्रीनिवासन ने बीबीसी को बताया, "इस फ़ैसले से राज्य को शराब की बिक्री से मिलने वाले राजस्व कोई असर नहीं पड़ेगा."
शराब बिक्री से तमिलनाडु को 30,000 करोड़ रुपए की आय होती है, जो मुख्य रूप से अम्मा ब्रांड के नाम से चल रही तमाम कल्याणकारी योजनाओं पर ख़र्च होता है. इनमें अम्मा कैंटीन, अम्मा पेय जल, अम्मा सीमेंट, अम्मा फ़ार्मेसी और बाक़ी कई योजनाएं शामिल हैं

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शपथ लेने के तुरंत बाद, जयलिलिता ने सबसे पहले सरकारी स्कूलों में बच्चों क मुफ़्त नाश्ता देने का आदेश जारी किया. उसके बाद शराब की 500 दुकानों को बंद करने और बाक़ी दुकानों के दोपहर 12 बजे दिन से रात 10 बजे तक खुले रहने का आदेश दिया. इससे पहले ये दुकानें सुबह 10 बजे से रात के 10 बजे तक खुली रहती थीं.
इसके अलावा ग़रीब महिलाओं को शादी में मंगलसूत्र के लिए आठ ग्राम सोना देने, किसानों की कर्ज़ माफ़ी और बुनकरों को 750 युनिट बिजली मुफ़्त देने का आदेश भी दिया गया है.
राजनीतिक विश्लेषक मलान के मुताबिक़, "राज्य सरकार पहले ही 9000 करोड़ रुपए के घाटे में चल रही है, ऊपर से किसानों का कुल कर्ज़ क़रीब 5000 करोड़ रुपए का है."
जयललिता को सदन के भीतर डीएमके से मिलने वाली चुनौती पर मलान का कहना है, "उन्हें सदन में कड़ा विरोध झेलने में कोई परेशानी नहीं होगी. उन्हें ज़्यादातर विधेयकों को पारित कराने में किसी के समर्थन की ज़रूरत नहीं होगी. उन्हें परेशानी तब होगी, अगर वो अपने मेनिफ़ेस्टो के मुताबिक़ लोकायुक्त विधेयक को सदन में लाएंगी. "

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मलान कहते हैं, "लेकिन लोकायुक्त विधेयक के मामले पर भी डीएमके विरोध नहीं करेगा, क्योंकि इससे डीएमके को भ्रष्ट बताया जा सकता है. इस मामले पर शोर तो बहुत होने वाला है, लेकिन मुझे इसके पारित होने में कोई रूकावट नहीं दिखती है."
जयललिता के लिए आर्थिक मोर्चे पर बड़ी चुनौतियाँ होंगीं. प्रोफ़ेसर श्रीनिवासन के मुताबिक़, "हाँ सरकार का राजस्व घाटा 9000 करोड़े रुपए का है, लेकिन इसे बेहतर किया जा सकता है. अगर इस साल मानसून अच्छा रहा तो औद्योदिक निवेश और नए माहौल से चीज़े बेहतर होंगीं. अगर अर्थव्यवस्था में तेज़ी आती है तो वो ज़्यादा कर्ज़ ले सकती हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में टैक्स से होने वाली कमाई भी बढ़ेगी.
प्रोफ़ेसर श्रीनिवासन बिजली खपत करने वाली कंपनियों के ऊपर कर्ज़ को बड़ी चुनौती मानते हैं.
वो कहते हैं, "उन पर कुल एक लाख़ करोड़ रुपए का कर्ज़ है. सरकार को ये कर्ज़ अपने ऊपर लेना पड़ेगा, ताकि कंपनियाँ अपना निवेश बढ़ा सकें. यह देखना होगा कि जयललिता इस मामले को किस तरह से लेती हैं."
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