'कश्मीर फ़्रांस नहीं, कपड़े पहनना निजी हक़ है'

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भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में सरकार ने एक महिला टीचर के अबैया पहनने के कारण 'नौकरी से निकाले जाने' पर कड़ा रुख़ अपनाया है.
हाल में श्रीनगर के बाहरी इलाक़े में स्थित डीपीएस तांताचौक स्कूल की एक महिला टीचर को कथित तौर पर कहा गया था कि यदि वो अबैया पहनना चाहती हैं तो वो स्कूल में पढ़ा नहीं सकती हैं.
अबैया काले रंग का पारंपरिक लिबास है. यह एक लंबा गाउन है जिससे चेहरा छिपा रहता है और केवल आंखे नज़र आती हैं.
शुक्रवार को स्कूल के छात्रों और कई अध्यापकों ने क्लासों का बहिष्कार किया था और स्कूल प्रशासन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था. उनका आरोप था कि महिला को नौकरी से निकाला गया है.
श्रीनगर से स्थानीय पत्रकार माजिद जहाँगीर के अनुसार, मामला सामने आने के बाद राज्य के शिक्षा मंत्री नईम अख़्तर ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर फ़्रांस नहीं है, जहाँ सरकार और निजी संगठन फ़ैसला करें कि कैसे कपड़े पहने जाने चाहिए.
नईम अख़्तर ने कहा, "जम्मू-कश्मीर फ़्रांस नहीं है...हर व्यक्ति को ये आज़ादी हासिल है कि वह अपनी पसंद का मज़हब, संस्कृति और लिबास चुने."

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शिक्षा मंत्री ने भरोसा दिलाया है कि सरकार दो दिन पहले हुई घटना की पूरी सच्चाई सामने लाएगी और स्कूल मैनेजमेंट से बात करेगी.
जब स्थानीय पत्रकार माजिद जहांगीर ने डीपीएस सोसाइटी के चेयरमैन विजय धर से फ़ोन पर बात की तो उन्होंने कहा कि स्कूल की प्रिंसिपल ही इस मुद्दे पर बात करेंगी.
स्कूल की प्रिंसिपल से संपर्क नहीं हो पाया है.
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