मध्य-पूर्व संकट का हल ढूंढने के लिए जुटे 70 देश
फ़्रांस की राजधानी पेरिस में इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच दो-राष्ट्र समाधान नीति के समर्थन में 70 देशों का सम्मेलन आयोजित किया गया है. हालांकि इस बैठक में इसराइल और फ़लस्तीन दोनों ने ही हिस्सा नहीं लिया है.
फ़्रांसीसी आयोजकों का कहना है कि भविष्य में शांति समझौता दो-राष्ट्र समाधान नीति पर ही हो सकता है.
इस बैठक में अमरीका की वजह से एक किस्म की अनिश्चितता भी है. अब अमरीकी सत्ता डोनल्ड ट्रंप संभालने की तैयारी कर रहे हैं. इसराइल को लेकर ट्रंप की नीति ओबामा के उलट है.

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इस बीच फ़्रांसीसी विदेश मंत्री ज्यां मार्क ऐरो ने कहा है कि डोनल्ड ट्रंप के नियंत्रण में आने वाला अमरीकी प्रशासन अपना दूतावास तेल अवीव से येरुशलम ले जाता है तो भड़काऊ क़दम होगा और इसके गंभीर नतीजे होंगे. फ़्रांसीसी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी पेरिस में मध्य पूर्व पर शांति समझौते को लेकर शुरू हुए सम्मेलन के ठीक बाद आया है.
ट्रंप ने चुनाव जीतने के बाद से इसराइल से समर्थन में बयान दिए हैं. कहा जा रहा है कि अमरीका अपने दूतावास को येरुशलम ले जाता है तो इससे शांति प्रक्रिया को धक्का लगेगा.
इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने इस सम्मेलन को 'अतीत का अवशेष' करार दिया है.
इस सम्मेलन के ज़रिए इसराइल और फ़लस्तीनियों के बीच शांतिवार्ता शुरू कराने की कोशिश की जा रही है. दोनों देशों के दशकों पुराने इस संघर्ष के समाधान के लिए सम्मेलन में आए 70 देशों के प्रतिनिधि दो-राष्ट्र समाधान की नीति पर मुहर लगा सकते हैं.

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फ़लस्तीनियों ने इस बैठक का स्वागत किया है जबकि इसराइल ने इसे खारिज कर दिया है. इसराइल ने कहा कि यह सम्मेलन उसके ख़िलाफ़ है.
अप्रैल 2014 में आई कड़वाहट के बाद सीधी शांतिवार्ता का आख़िरी दौर किसी नतीजे पर पहुंचे बिना ही ख़त्म हो गया था. इस बैठक के निष्कर्षों को सुनने के लिए इसराइल और फ़लस्तीनियों को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन ये इस सम्मेलन में शरीक नहीं हो रहे हैं.

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हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसराइल के ख़िलाफ़ क़ब्जे वाली ज़मीन पर बस्तियों को बसाने के ख़िलाफ़ प्रस्ताव पारित किया था.
यूएन ने इसराइल के इस क़दम की निंदा की थी. इसके बाद से विश्व समुदाय और इसराइल के बीच तनाव और बढ़ गया है. ऐसे माहौल में ही पेरिस में यह सम्मेलन हो रहा है.
इसराइल ने ओबामा प्रशासन को यूएन के प्रस्ताव के लिए जिम्मेदार ठहराया था. अमरीका ने इस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ सुरक्षा परिषद में वीटो नहीं किया था. हालांकि व्हाइट हाउस ने इस प्रस्ताव में अपनी मिलीभगत से इनकार किया था.

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इस सम्मेलन के मसौदे की रिपोर्ट में इसराइल और फ़लस्तीनियों से अपील की गई है कि वे दो-राष्ट्र समाधान की नीति पर अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराएं. इसके साथ ही दोनों पक्षों से एकतरफ़ा क़दम नहीं उठाने की अपील की गई है.
इसराइल के बगल में फ़लस्तीनियों के लिए एक देश पर दोनों पक्षों की सहमति है, लेकिन फ़लस्तीनियों का देश कैसा होगा इसे लेकर दोनों के बीच भारी मतभेद है. इसराइल ने शांति प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप को सिरे से खारिज कर दिया है. इसराइल का कहना है कि समझौता सीधी बातचीत के ज़रिए ही होगा.
इसराइली प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने पेरिस कॉन्फ्रेंस को धोखा बताया है. उन्होंने कहा कि इस कॉन्फ्रेंस में जो भी फ़ैसला लिया जाएगा, उसे इसराइल मानने के लिए बाध्य नहीं होगा.
नेतन्याहू ने इसे इसराइल विरोधी कॉन्फ़्रेंस बताया है और कहा है कि इससे शांति प्रक्रिया और पीछे जाएगी.
अमरीकी विदेश विभाग ने कहा है कि विदेश मंत्री जॉन केरी इस बैठक में मौजूद रहेंगे. विभाग के प्रवक्ता मार्क टोनर ने कहा, ''अमरीका नहीं चाहता है कि इसराइल पर कुछ भी थोपा जाए."
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