अमरीका में इतनी ख़ूंखार हत्याएं क्यों?

लास वेगस में मास शूटिंग के बाद शोकाकुल परिजन
    • Author, तारा मैकेल्वी
    • पदनाम, व्हाइट हाउस रिपोर्टर
  • प्रकाशित

आधुनिक अमरीकी इतिहास की पांच सबसे जघन्य गोलीबारी की घटनाएं बीते 16 महीनों में हुई हैं.

इसकी शुरुआत 1949 में न्यू जर्सी के कैमडन में हुई घटना से हुई थी, जिसमें 13 लोग मारे गए थे. एक पूर्व सैनिक हॉवर्ड अनरू ने अपने पड़ोसियों पर गोलियां बरसा दी थीं.

इसके बाद के कई दशकों में यह संख्या बढ़ती गई. ऐसी ही घटनाओं में 1966 में टेक्सस के ऑस्टिन में 16 और 1984 में कैलिफोर्निया के सैन इसाइड्रो में 21 लोगों की मौत हो गई.

लेकिन बीते कुछ महीने ख़ास तौर से कठोर रहे हैं. इस बीच दो हमले हुए. लास वेगस में 58 लोगों की जान चली गई और टेक्सस के सदरलैंड स्प्रिंग्स इलाक़े में 26 लोगों की मौत हो गई. इससे पहले जून 2016 में ऑरलैंडो नाइटक्लब में हुई गोलीबारी में 49 लोग मारे गए थे.

इस तरह की घटनाओं के कारण कई हैं और जटिल हैं. अमरीका और बाकी दुनिया के लोग इस तरह की हिंसा को समझने के लिए संघर्ष कर रही है. यहां विश्लेषक उन कारकों पर बात कर रहे हैं जो इस विकट रूप से बढ़ती मौतों की संख्या की वजह हो सकते हैं:

हथियार अब ज़्यादा ताक़तवर हैं

अब ताक़तवर बंदूकें आ गई हैं

इस तरह के हमलावर अब ऐसी बंदूकें इस्तेमाल कर रहे हैं जिनकी मैगज़ीन की क्षमता कहीं ज़्यादा होती है. इससे वे दर्जनों राउंड गोलियां बिना रिलोड किए चला पाते हैं.

हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डेविड हेमेनवे के मुताबिक, "कम समय में ज़्यादा लोगों पर गोली चलाई जा रही है और उन पर कहीं ज़्यादा गोलियां दागी जा रही हैं."

2012 में कनेक्टिकट के न्यूटाउन में 26 लोगों की जान लेने वाले एडम लांज़ा और कोलरैडो के ऑरोरा में 12 लोगों की हत्या करने वाले जेम्स होल्म्स ने इसी फीचर वाले हथियार इस्तेमाल किये थे. आंकड़े बताता है- असॉल्ट राइफ़लों के इस्तेमाल से हमले में मरने वालों की संख्या बढ़ जाती है.

विरोध प्रदर्शन

शोधकर्ताओं ने क़ानूनों का अध्ययन भी किया. बड़ी मैगज़ीन वाले सेमीऑटोमैटिक असॉल्ट हथियारों पर 1994 में प्रतिबंध लगा दिया गया था. लेकिन 2004 में यह प्रतिबंध हटा लिया गया.

जानकारों का मानना है कि प्रतिबंध हटने के बाद ही इन सामूहिक हत्याओं का नया दौर आया. इन हथियारों से हमलावर जल्दी जल्दी और काफ़ी देर तक गोलियां दाग सकते थे और इस तरह ज़्यादा लोगों की जान ले सकते थे.

इसके साथ ही प्रांतों के अपने अलग कानून भी थे. 2012 की घटना के बाद कनेक्टिकट प्रांत ने एक कानून पास करके सेमीऑटोमैटिक राइफलों को बैन कर दिया.

हालांकि बाक़ी प्रांतों ने अपने बंदूक क़ानून और लचीले कर लिए. उदाहरण के तौर पर जॉर्जिया में एक क़ानून लाया गया, जिसके बाद स्कूलों की कक्षाओं, नाइटक्लब और ऐसी कई जगहों पर हथियार लाए जा सकते थे. गिफोर्ड्स लॉ सेंटर टू प्रिवेंट गन वॉयलेंस के विशेषज्ञों ने लिखा है कि बंदूक कानूनों पर बेहतर नियंत्रण वाले प्रांतों में अपेक्षाकृत तौर पर कम हिंसा हुई है.

हमले की जगह

बंदूक हमले के बाद

अब हमले ऐसी जगहों पर हो रहे हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद होते हैं. मसलन लास वेगस के कॉन्सर्ट वाली जगह पर करीब 22 हज़ार लोग थे. यूनिवर्सिटी ऑफ़ सेंट्रल फ्लोरिडा के जे कॉर्ज़ीन कहते हैं, "इस तरह की भीड़ हो तो हमलावर को निशाना भी नहीं लगाना पड़ता."

इस तरह के हमलों का अध्ययन करने वाले 'होमिसाइड स्टडीज़' का कहना है कि ऐसे ज़्यादातर हमलावर अब बहुत ध्यान से हमले की योजना बनाते हैं.

कॉर्ज़ीन बताते हैं, "वे अपना होमवर्क करते हैं."

यूनिवर्सिटी ऑफ अलाबामा के एडम लैंकफोर्ड बताते हैं कि 2012 में कोलरैडो के ऑरोरा में बैटमैन की स्क्रीनिंग के दौरान गोलियां बरसाने वाले हमलावर को लगा था कि एक फिल्म थियेटर में गोलियां बरसाकर वह ज़्यादा लोगों की जान ले सकता है.

मीडिया कवरेज

लास वेगस में शूटिंग के बाद घटनास्थल की तस्वीर
इमेज कैप्शन, अक्टूबर 2017 में लास वेगस में शूटिंग के बाद घटनास्थल की तस्वीर

इस तरह के नरसंहार की मीडिया कवरेज भी हाल के वर्षों में बढ़ी है. कई बार हमलावरों ने हमले से पहले और हमले के दौरान भी सोशल मीडिया पर इस बारे में लिखा.

कई पत्रकार अक्सर हमलावर केंद्रित कहानियां सामने लाते हैं. उनके ज़िंदग़ी की कहानी और ब्यौरे के बारे में लिखा जाता है और अनजाने में ही कभी-कभी हमलावरों का महिमा-मंडन हो जाता है.

हालांकि कुल मिलाकर जानकारों को नहीं लगता कि मीडिया कवरेज से ऐसी हत्याओं में इज़ाफा हुआ है.

कॉर्ज़ीन कहते हैं, "मैं देख रहा हूं कि बीते 25 साल से मीडिया ऐसी घटनाओं की बड़ी कवरेज कर रहा है, लेकिन हत्याओं में इज़ाफा बहुत हाल ही में हुआ है."

हालांकि शिकागो की संस्था क्योर वॉयलेंस के संस्थापक गैरी स्लटकिन मानते हैं कि मास शूटिंग की घटनाएं संक्रामक होती हैं. उनके मुताबिक, "दूसरे लोग जो करते हैं, बाकी उन्हें देखते हैं और कई बार वैसा करने भी लगते हैं."

हमलावरों की आपसी प्रतियोगिता

1999 में कोलरैडो के कोलंबीन हाईस्कूल में हुई घटना के हमलावरों में से एक डायलान क्लेबोल्ड ने अपना मक़सद बताते हुए कहा था, "अमरीकी इतिहास में सबसे ज़्यादा मौतें...ऐसी हमें उम्मीद है."

लैंकफोर्ड बताते हैं, "यह बदनामी में मशहूर होने की दौड़ है. आपसे पहले आए हत्यारों से बड़ा और बेहतर हत्यारा बनने की होड़."

स्लटकिन कहते हैं, "हम सब चाहते हैं कि मरने के बाद हमें लोग जानें. इससे पता चलता है कि यह जाल कितना मज़बूत है."

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