भूकंप के बाद ईरान में अब मौसम की मार

ईरान-इराक़ भूकंप में टूटी सड़क इमारत
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7.3 तीव्रता वाले भूकंप ने ईरान-इराक़ के सीमावर्ती गांवों में भारी तबाही मचाई है. कुछ ही पलों में बेघर हुए हज़ारों लोग खुले में सर्द रातें बिताने को मजबूर हैं.

12 नवंबर को स्थानीय समय के हिसाब से रात को 9 बजकर 18 मिनट पर आए इस भूकंप ने अब तक 440 लोगों की जान ले ली है और क़रीब 7000 लोग घायल हैं.

सबसे ज़्यादा नुक़सान ईरान के करमनशाह प्रांत में हुआ है जहां हज़ारों घर तबाह हो गए हैं.

राष्ट्रपति रूहानी का दौरा
इमेज कैप्शन, सरपोल-ए-ज़हाब में दौरा करते ईरान के राष्ट्रपति रूहानी. पीछे दिख रही इमारतों से सरकारी और निजी घरों को हुए नुक़सान का अंदाज़ा लगाया जा सकता है.

निजी घर बच गए, सरकारी इमारतें गिर गईं

इलाक़े का दौरा कर रहे राष्ट्रपति हसन रूहानी ने बताया कि निजी बिल्डरों के मुक़ाबले सरकारी घरों को ज़्यादा नुक़सान हुआ है और इन घरों को बनाने के लिए ज़िम्मेदार लोगों से जवाब तलब किया जाएगा.

सरपोल-ए-ज़हाब में बोलते हुए रूहानी ने पूछा ''इसके लिए किसे ज़िम्मेदार ठहराया जाए? हमारे इंजीनियरों को?''

इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ((IRGC) के मेजर जनरल मोहम्मद अली जाफ़री ने सरकारी टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि ''नई बनी हुई इमारतें भूकंप झेल गईं लेकिन पुराने घर पूरी तरह तबाह हो गए.''

ईरान-इराक़ भूकंप में टूटी इमारत

मौसम की मार

अली जाफ़री के मुताबिक़ लोगों को तुरंत रहने के लिए टेंट और खाना-पानी मुहैया कराने की ज़रूरत है.

खुले में रहने को मजबूर लोगों पर मौसम की मार भी पड़ रही है. दो रोज़ से करमनशाह में रात का तापमान लगातार गिरता जा रहा है.

टूटा घर देखता व्यक्ति

बच्चों का बुरा हाल

कस्र-ए-शिरीन गांव में भूकंप से भारी नुक़सान हुआ है. 42 साल के अली गुलानी ने बीबीसी को बताया, ''हम लोग टेंट में रह रहे हैं. हमारे पास पूरा खाना और पानी नहीं है. आप बच्चों के रोने की आवाज़ सुन सकते हैं. बहुत ठंड पड़ रही है. बच्चे मां-बाप से चिपककर गर्म रहने की कोशिश कर रहे हैं, बुरा हाल है.''

ईरान-इराक़ भूकंप

अब तक 200 झटके

अली गुलानी के मुताबिक़ भूकंप के बाद हर घंटे औसतन तीन बड़े झटके आ रहे थे जिनसे अफ़रातफ़री और बढ़ी.

इस भूकंप को दुनिया में इस साल आए सबसे तेज़ और ख़तरनाक भूकंपों में से एक माना जा रहा है. भूकंप के बाद भी तक़रीबन 200 झटके महसूस किए गए.

भूकंप में टूटे घर

12 हज़ार इमारतें ज़मींदोज़

ईरान की रेड क्रिसेंट सोसायटी की मंसूरी बघेरी ने बीबीसी को बताया कि क़रीब 12 हज़ार रिहायशी इमारतें ज़मींदोज़ हो गई हैं.

उनके मुताबिक़ बचाव का काम ख़त्म हो गया है. अब मदद पहुंचाने का काम चल रहा है.

अली गुलानी ने बताया कि उनके गांव के लोगों तक कोई मदद नहीं पहुंची है. गांव के लोग दूसरी तरफ़ बने एक टैंक से पानी लाने को मजबूर हैं.

ईरान के सरकारी टीवी ने भी कहा कि हज़ारों लोग दो रात से अस्थायी टैंटों या खुले में रह रहे हैं.

शव के पास बिलखती महिला

मदद के लिए तैयार है संयुक्त राष्ट्र

सरपोल-ए-ज़हाब में सबसे ज़्यादा मौतें हुई हैं, वहां बेघर हुई एक महिला ने ख़बरिया एजेंसी रायटर्स से बात करते हुए कहा कि ''रात को बहुत सर्दी होती है... हमें मदद चाहिए. हमें हर चीज़ की ज़रूरत है. अधिकारियों को मदद पहुंचाने में तेज़ी दिखानी चाहिए.''

एक सहायता एजेंसी के मुताबिक़ 70 हज़ार लोग बेघर हुए हैं. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि अगर ज़रूरत पड़ी तो वह मदद के लिए तैयार है.

भूकंप में टूटे घर

ईरान की सरकारी न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़ इस भूकंप के चलते मरने वालों में से 430 लोग ईरान के और 10 इराक़ के हैं.

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