मुगाबे के उत्तराधिकारी ने किया नौकरियों का वादा

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ज़िम्बाब्वे के अगले नेता एमरसन म्नांगगवा ने विदेश से लौटने के बाद वादा किया है कि वो देश के भीतर नई नौकरियां पैदा करेंगे और ज़िम्बाब्वे की माली हालत सुधारेंगे.
उन्होंने हरारे में अपने समर्थकों को बताया, "हम अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना चाहते हैं. हम शांति चाहते हैं, हमें नौकरियां चाहिए... बहुत सारी नौकरियां."
कुछ अनुमानों के अनुसार ज़िम्बाब्वे में करीब 90 फ़ीसदी लोग बेरोज़गार हैं. देश के दो तिहाई लोग एक दिन में करीब 356 रुपयों से गुज़ारा करते हैं.

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सरकारी टीवी ने कहा है कि दो हफ़्ते पहले दक्षिण अफ़्रीका भागे म्नांगगवा को शुक्रवार को देश का अगला राष्ट्रपति बनाया जाएगा.
म्नांगगवा की बर्ख़ास्तगी के बाद ही सत्तारूढ़ दल और सेना ने हस्तक्षेप किया था, जिसके बाद रोबर्ट मुगाबे के 37 साल के राज का अंत हुआ था.

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नए लोकतंत्र का आगाज़
म्नांगगवा ने सत्तारूढ़ पार्टी ज़ानू-पीएफ़ के मुख्यालय में अपने समर्थकों को बताया कि देश में एक नए लोकतंत्र का आगाज़ हो रहा है.
उन्होंने ये भी कहा कि उनकी हत्या करने की कई साज़िशें रची गईं. म्नांगगवा ने मुगाबे को शांतिपूर्ण तरीके से हटाने के लिए सेना का शुक्रिया अदा किया.
सत्तारूढ़ पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा है कि 71 वर्षीय म्नांगगवा मुगाबे के बचे हुए कार्यकाल को पूरा करेंगे और फिर अगले साल सितंबर में चुनाव करवाए जाएंगे.
सरकारी टीवी ने भी कहा है कि शुक्रवार को शपथ समारोह का सीधा प्रसारण किया जाएगा.

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मगरमच्छ के नाम से मशहूर
अपनी सियासी चालों के लिए मशहूर म्नांगगवा को क्रोकोडाइल यानि मगरमच्छ बुलाया जाता है. वो ज़िम्मबाब्वे लौटने से पहले दक्षिण अफ़्रीका के राष्ट्रपति जैकब ज़ूमा से भी मिले थे.
ज़िम्बाब्वे के संविधान के अनुसार राष्ट्रपति के इस्तीफ़े के मद्देनज़र उपराष्ट्रपति को सत्ता मिलनी चाहिए. फ़ेलेकेज़ेला एमफोको उप-राष्ट्रपति हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया है और वो इस वक्त देश से ग़ायब हैं.
संसद के स्पीकर ने बताया कि सत्तारूढ़ पार्टी ने एमरसन म्नांगगवा को राष्ट्रपति पद के लिए मनोनीत कर दिया है.

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निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव
एमरसन म्नांगगवा 1980 के दशक में देश के सुरक्षा प्रमुख थे. आज़ादी के बाद के इस दौर में हज़ारों लोगों की मौत हुई थी. हालांकि वो उन मौतों में शामिल होने की बात नकारते रहे हैं.
ज़िम्बाब्वे के कद्दावर विपक्षी नेता मॉर्गन त्सावेंगिराई ने बीबीसी को बताया है कि उन्हें ज़िम्बाब्वे के नई राह पर चलने की उम्मीद है जहां निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव करवाए जाएंगे.
एक अन्य विपक्षी नेता डेविड कोल्टार्ट ने ट्वीट किया है, 'हमने तानाशाह को हटाया लेकिन तानाशाही अब भी मौजूद है.'
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