इसराइल-फ़लस्तीनी मुलाकात 10 साल बाद, क्या कोई रंग लाएगी?

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फ़लस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने इसराइली रक्षा मंत्री बेनी गंट्ज़ से आधिकारिक मुलाकात की है.
पिछले 10 वर्षों से ज़्यादा समय में यह फ़लस्तीनी राष्ट्रपति की किसी वरिष्ठ इसराइली मंत्री के साथ पहली आधिकारिक मुलाक़ात है.
इस बातचीत के लिए बेनी गंट्ज़ रविवार रात को वेस्ट बैंक में स्थित फ़लस्तीनी नेशनल अथॉरिटी की प्रशासनिक राजधानी रामल्ला की यात्रा पर गए थे.
बताया गया है कि दोनों नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था के अलावा आर्थिक मुद्दों पर भी चर्चा की.
बेनी गंट्ज़ ने महमूद अब्बास से कहा कि इसराइल फ़लस्तीनी अर्थव्यवस्था को मज़बूत करने के लिए काम करना चाहेगा.

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इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि वो चाहते हैं कि दोनों पक्ष अपने रिश्तों में सुधार लाएं. साल 2014 में शांति वार्ता की पिछली असफल रही थी.
गंट्ज़ के रामल्ला दौरे से पहले शुक्रवार को व्हाइट हाउस ने इसराइल के नए प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बैनेट से 'फ़लस्तीनियों की ज़िंदगी सुधारने और उनके लिए बड़े आर्थिक मौके पैदा करने के लिए कदम उठाने' को कहा था.
बाइडन ने यह भी दोहराया था इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष के दूरगामी हल के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत और समझौता ही एकमात्र व्यावहारिक रास्ता है.
इसराइल के एक सूत्र ने ज़ोर देकर कहा है कि रविवार की इस मुलाकात को ख़ुद प्रधानमंत्री बैनेट ने मंज़ूरी दी थी.
सूत्र के मुताबिक़ बेनी गंट्ज़ ने अब्बास के साथ शांति वार्ता के बारे में कोई चर्चा नहीं की.
इसराइली सरकार के सूत्र ने बीबीसी से कहा, "फ़लस्तीनियों और इसराइल में कोई कूटनीतिक प्रक्रिया नहीं हुई है और न आगे होगी."
वहीं, वरिष्ठ फ़लस्तीनी अधिकारी हसन अल-शेख़ ने कहा कि ''इस चर्चा में सभी पहलुओं पर बात हुई.''

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बीबीसी के मध्य पूर्व संवाददाता टॉम बेटमेन का विश्लेषण
ऐसी मुलाकातों से औपचारिक सम्बन्धों में बदलाव आते हैं.
इसराइल की नई सरकार का दायरा काफ़ी बड़ा है. इसमें वामपंथियों से लेकर अरब पार्टियाँ तक शामिल हैं जिससे फ़लस्तीन के साथ ऐसे संपर्क महत्वपूर्ण हो जाते हैं.
हालाँकि इस मुलाकात के पीछे अमेरिकी दबाव भी बड़ी वजह हो सकती है. जो बाइडन प्रशासन चाहता है इसराइल और अंतरराष्ट्रीय समर्थन वाले फ़लस्तीनी नेतृत्व के बीच रिश्तों की बर्फ पिघले.
फ़लस्तीनी इस समय आर्थिक संकट में हैं और डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने उन्हें पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया था.
फ़लस्तीनी आधिकारियों ने इस मुलाकात के बारे में बताते हुए आर्थिक कदमों पर ज़ोर दिया जिससे कुछ फ़लस्तीनी असहज हो सकते हैं.
यह इसराइल के राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री नेफ़्टाली बेनेट के लिए भी एक दुविधा है. क्योंकि ऐसी मुलाकात और चर्चाओं से उनके दक्षिणपंथी बेस को बहुत ज़्यादा फ़ायदा नहीं होने वाला है.
नेफ़्टाली बेनेट का कार्यालय इस मुलाकात को सिर्फ़ सुरक्षा मामलों से जुड़ा बता रहा है और कह रहा है कि फ़लस्तीनियों के साथ इसराइल के कोई कूटनीतिक रिश्ते नहीं होंगे.

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फ़लस्तीनी अथॉरिटी ने इसराइल के साथ पिछले साल तक सम्बन्ध बरक़रार रखे थे. लेकिन बिन्यामिन नेतन्याहू की वेस्ट बैंक पर कब्ज़ा करने की योजना सामने आने के बाद ये रिश्ते खटाई में पड़ गए थे.
फ़लस्तीनी वेस्ट बैंक और ग़ज़ा पट्टी को भविष्य में एक स्वतंत्र देश की स्थापना के लिए चाहते हैं.
लेकिन पिछल साल नंवबर में नेतन्याहू ने वेस्ट बैंक पर कब्ज़े की योजना को रोक दिया था जिसके बाद दोनों के बीच रिश्ते फिर क़ायम हो गए थे.
दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी माने जाने वाले बैनेट ने वामपंथी, मध्यमार्गी, अरब और अन्य दक्षिणपंथी पार्टियों के साथ मिलकर एक गठबंधन सरकार बनाई.
नेफ़्टाली बैनेट इसराइल के साथ अलग फ़लस्तीनी राष्ट्र की धारणा को ख़ारिज़ करते हैं. उन्होंने कहा था कि उनकी गठबंधन सरकार न तो वेस्ट बैंक पर कब्ज़ा करने की कोशिश करेगी और न ही फ़लस्तीनियों के साथ शांति समझौता करने की कोशिश.
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