नुसरत मिर्ज़ा ने हामिद अंसारी से मुलाक़ात के बारे में बीबीसी से क्या कहा

नुसरत मिर्ज़ा
    • Author, विनीत खरे
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता
  • प्रकाशित
  • पढ़ने का समय: 5 मिनट

भारत में बीते कुछ दिनों से लगातार चर्चा में बने पाकिस्तान के कॉलमनिस्ट नुसरत मिर्ज़ा ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी से मुलाक़ात के सवाल पर कहा है कि उनकी अंसारी से कभी कोई सीधी मुलाक़ात नहीं हुई.

मिर्ज़ा ने बीबीसी से कहा, "मैं भी इनकार करता हूं कि (मुलाक़ात) नहीं हुई है."

मिर्ज़ा ने दावा किया है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री खुर्शीद कसूरी के साथ उन्होंने जो दस्तावेज साझा किए थे, उसका 'भारत से कोई लेना देना नहीं था. वो डोक्यूमेंट रूस के बारे में थे' जिनमें रूस ने पाकिस्तान पर उसे तोड़ने के लेकर आरोप लगाए थे. उन्होंने ये भी दावा किया ये दस्तावेज 2005 की सेमिनार से जुड़े थे.

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी नुसरत मिर्ज़ा से पहचान होने से इनकार कर चुके हैं. उन्होंने दफ़्तर की ओर से शुक्रवार को भी इस मामले में स्पष्टीकरण दिया गया था.

इसके पहले नुसरत मिर्ज़ा ने पाकिस्तान के पत्रकार शकील चौधरी को दिए एक इंटरव्यू में दावा किया कि जब 'हामिद अंसारी भारत के उप-राष्ट्रपति थे तब उन्हें एक सेमिनार के लिए भारत बुलाया गया और उन्होंने भारत यात्रा के दौरान इकट्ठा की गई जानकारी को आईएसआई के साथ साझा किया.'

मिर्ज़ा ने उस इंटरव्यू ये भी दावा किया उन्होंने पांच बार भारत की यात्रा की, और कई शहरों जैसे बेंगलुरु, चेन्नई, चंडीगढ़, कोलकाता, पटना, लखनऊ गए.

केंद्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी नुसरत मिर्ज़ा के बयान को लेकर हामिद अंसारी और कांग्रेस पर हमलावर है. बीबीसी ने नुसरत मिर्ज़ा से बात की और उनके इंटरव्यू को लेकर हो रहे विवाद के बारे में पूछा.

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इंटरव्यू पर विवाद से जुड़े सवाल

हामिद अंसारी से मुलाक़ात के बारे में नुसरत मिर्ज़ा ने कहा, "ये सेमिनार था, इसमें ज़ाहिर कि वो चीफ़ गेस्ट के तौर पर आए और चले गए. इन्होंने उस बिचारे को पकड़ लिया. "

उन्होंने कहा, "दो गुनाह हैं बिचारे के. वो मुस्लिम हैं और कांग्रेस से हैं. जो इनकी राजनीतिक कश्मकश चल रही है, बीजेपी और कांग्रेस के बीच में (उसमें ) उनको पकड़ लिया."

मिर्ज़ा ने बताया कि उस सेमिनार में कई देशों के राजदूत मौजूद थे. उन्होंने कहा, "आप देख सकते हैं कि इसमें कितने एंबेसडर हैं, हाई कमिश्नर हैं, हमारा हाई कमिश्नर भी है."

"उन्होंने (हामिद अंसारी ने) ख़ुद जवाब दे दिया कि भई मैं कभी नहीं मिला, उन्हें याद ही नहीं होगा, बस हाथ मिलाया था. इस तरह तो मैं मनमोहन सिंह से भी मिला 2005 में चंडीगढ़ के अंदर."

नुसरत मिर्ज़ा ने कहा, "सेमिनार में कोई आदमी हाथ मिला ले और उसे मुलाक़ात कहते हैं तो मिल लिए उनसे. इस लिहाज से तो (पूर्व प्रधानमंत्री) मनमोहन (सिंह) से भी मुलाक़ात हुई 2005 की चंडीगढ़ की सेमिनार में. हेलो हाय की."

नुसरत मिर्ज़ा

कौन से दस्तावेज साझा किए?

भारत आकर जुटाई गई जानकारी को पाकिस्तान में शेयर करने के दावा को लेकर नुसरत मिर्ज़ा ने आरोप लगाया कि उनके इंटरव्यू के साथ तकनीकी छेड़छाड़ की गई थी.

उन्होंने कहा, "(इंटरव्यू में) ये टुकड़ा है जो जोड़ा गया है, ये अलग से है वो अलग है, जिस आदमी ने भी इंटरव्यू किया उसने आख़िरी जुमले को जोड़ा है.कहीं और का है, वहां से लेकर यहां जोड़ दिया है."

उन्होंने कहा, "असल में हुआ ये था कि जो सेमिनार था, (उसमें) दुनिया भर की इंटेलिजेंट बिरादरी (ख़ुफ़िया विभाग के लोग) थी, उसको बुलाया गया था. मैं 2005 की कॉन्फ्रेंस का ज़िक्र कर रहा हूं."

मिर्ज़ा ने कहा, "इस कॉन्फ्रेंस में केजीबी का 40 आदमी का जत्था था, इसराइली मोसाद के आदमी भी थे. जब हमारी तकरीर ख़त्म हो गई तो फिर इसराइलियों ने बोला, उसके बाद रूसियों का नंबर आया."

मिर्ज़ा ने दावा किया, "उसमें एक रूसी खातून (महिला) ने ये कहा कि यूएसएसआर जो टूटा है, वो पाकिस्तान ने तोड़ा है. (उन्होंने) पेपर पढ़ा. ये पेपर मौजूद है राइटिंग में मेरे पास."

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मिर्ज़ा ने कहा, "मैं प्रतिनिधिमंडल का लीडर था, मैंने कहा कि मिस्टर प्रेसिडेंट ये ग़लत है. हमारी ऐसी कोई योजना नहीं है. उसने कहा कि 'मिस्टर मिर्ज़ा भरोसा कीजिए कि ये सच है. सच है."

नुसरत मिर्ज़ा ने सेमीनार को लेकर कहा, "मैं वो डॉक्यूमेंट लेकर आया. मैंने वो (पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री) खुर्शीद कसूरी को दे दिया. ये 2005 की बात है. उसने कहा कि ये (आईएसएसआई के तब के अधिकारी) कयानी को दे दो, मैंने कहा कि नहीं, मैं उन्हें नहीं जानता."

"वो तक़रीरों का हिस्सा था कि साहब वो हम पर इल्ज़ाम लगा रहे हैं कि हमने उनका मुल्क तोड़ा है."

उन्होंने बताया कि इन दस्तावेजो में रूसी लोगों की तक़रीरें थीं. कुछ रिसर्च पेपर थे. "कोई रेड बुक थी जो वो लेकर आए थे, हमने तो पढ़ा नहीं, हमने उन्हें वैसे ही दे दिया."

भारत से हासिल सूचनाओं को आईएसआई के साथ साझा करने को लेकर इंटरव्यू में किए गए दावे पर नुसरत मिर्ज़ा ने कहा, "ये ग़लत बात है. ये बात हमने नहीं कही है."

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पाकिस्तान पर लगे आरोपों के वजह से साझा किए दस्तावेज

नुसरत मिर्ज़ा ने पाकिस्तानी पत्रकार शकील चौधरी से इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें किसी आदमी ने फ़ोन किया है और कहा कि ऐसी जानकारी और मिले तो अच्छा है. बीबीसी ने उनसे पूछा कि उन्होंने ये बात क्या हिंदुस्तान से आने के बाद नहीं कही थीं?

इस पर नुसरत मिर्ज़ा ने कहा कि बात 2005 की थी जब उन्होंने दस्तावेज़ पूर्व विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी को दिए, वो भी इसलिए क्योंकि उसका ताल्लुक पाकिस्तान पर लगने वाले इल्ज़ाम से था, लेकिन उसके बाद उन्होंने किसी को कोई दस्तावेज़ नहीं दिए.

हमने सवाल किया कि मामला 2005 का हो या बाद का वक़्त से क्या फर्क पड़ता है, इस पर उन्होंने कहा, "फर्क ये पड़ता है कि उसके बाद तो कोई डोक्यूमेंट नहीं दिए न किसी को."

कसूरी से नजदीकी के सवाल पर उन्होंने कहा, "कसूरी साहब के तो बाप (पिता) को भी जानता हूं. जब मैं स्टुडेंट लीडर था तब वो लॉ मिनिस्टर थे (जुल्फ़िक़ार अली) भुट्टो साहब के तब मैं उनसे जाकर उनसे मिलता था."

नुसरत मिर्ज़ा का इंटरव्यू लेने वाले पाकिस्तानी पत्रकार शकील चौधरी के मुताबिक नुसरत अपने कॉलमों में दावा कर चुके हैं कि पाकिस्तान में भूकंप और जापान में सूनामी के पीछे अमरीका का हाथ था.

'कॉन्सप्रेसी थ्योरीज़' फैलाने के आरोप पर नुसरत मिर्ज़ा ने कहा, "आप पढ़ लें. (मेरी) 18 किताबें हैं, आप पढ़ लें."

क्या वो आईएसआई या किसी दूसरी इंटेलिजेंस एजेंसी को इनपुट देते थे, इस सवाल पर नुसरत मिर्ज़ा ने कहा, "बिल्कुल नहीं. बिल्कुल झूठ बात है. मैं एक घूमने वाला आदमी हूं, सारी दुनिया घूमी है. इंडिया मेरी जन्मभूमि है, जहां मैं पैदा हुआ, उसको मैं देखना चाहता था, बस हो गया ये."

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