समुद्री तट कब बने सैर सपाटे के केंद्र ?

इमेज स्रोत, Wikipedia 1808 10
- Author, जैसन फारागाओ
- पदनाम, बीबीसी कल्चर
- प्रकाशित
आपको शायद लगता होगा कि समुद्री तट हमेशा से ही यूरोपीय लोगों की ज़िंदगी और कलाकारों, ख़ासकर पेंटरों की दिलचस्पी का विषय रहा होगा. लेकिन ऐसा नहीं है. दरअसल 19वीं शताब्दी से पहले कुछ यूरोपीय कलाकारों ने ही समुद्र तट की तरफ़ ध्यान दिया.
कैस्पर डेविड फ़्रेड्रिक, द मंक बाय द सी, 1808-10
पश्चिमी कला में समुद्र तट और समुद्री किनारा आधुनिक समय में शामिल हुए हैं. इसे जानकर अचरज नहीं होना चाहिए कि पहले सी-साइड की पेंटिंग में कामकाजी मछुआरों, मालवाहक जहाज़ों के वर्किंग क्लास लोगों को ही चित्रित किया जाता था.
नीदरलैंड की गोल्डन एज में सोलमोन वान रूज़डायल ने समुद्र तट पर काम किया था और ऐसे ही दृश्य कैनवस पर उतारे थे.
रोमांटिक काल में जेएमडब्ल्यू टर्नर और कैसपर डेविड फ़्रेड्रिक ने समुद्री तट की ओर रुख किया. ऊपर दिख रही तस्वीर डेविड फ़्रेड्रिक की है. हालांकि आधुनिक यूरोपीय के लिए समुद्र हमेशा से रहस्यमयी संसार रहा है.
यूजीन बाउडिन, ट्रोविल बीच सीन, 1863

इमेज स्रोत, National Gallery of Art Washington 1863
18वीं शताब्दी में समुद्र तट के रिज़ार्ट्स में स्पॉ का चलन भी बढ़ा. इसमें इलाज के लिए अमीर यूरोपीय लोग पहुंचते थे.
19वीं शताब्दी के मध्य में यूरोप में पूंजीपतियों की बढ़ती आबादी और रेलवे के विकास से समुद्र तटीय इलाकों को भी फ़ायदा हुआ.
मध्यकालीन दौर के पेंटर यूजीन बाउडिन ने ट्रोविल समुद्रीतट को चित्रित करते हुए ये कलाकृति तैयार की.
लंबे लंबे हैट वाले पुरुष और भारी भरकम पेटीकोट पहने महिलाएं इसमें नजर आ रही हैं. दरअसल अमीर लोगों ने समुद्री तट की तलाश मौज मस्ती के लिए की थी.
क्लौड मोनेट, ट्रोविल बीच, 1870

इमेज स्रोत, National Gallery London 1870
19वीं शताब्दी की फ्रांसीसी कलाकृतियों में बदलते दौर का परिवेश झलकता है. विकसित होती रेलवे लाइन, शहर से सटे इलाकों में बदलती जीवनशैली और सैर सपाटे की संस्कृति पर कलाकारों ने काम शुरू किया था.
बाउडिन से शिक्षा लेने वाले पेंटर क्लौड मोनेट ने इन दो महिलाओं की तस्वीर बनाई (इन्हें लोग पेंटर की पत्नी भी मानते हैं). यह पेंटिंग परंपा से दूर दिखाई देती है. एक ओर दोनों महिलाएँ बैठी हुई है और दूसरी ओर समुद्र तट पेंटिंग के केंद्र में है.
बैर्ट मौरिज़ु, इन ए विला एट सीसाइड, 1874

इमेज स्रोत, Norton Simon Art Foundation 1874
यूरोपीय लोगों के लिए 19वीं शताब्दी के आते आते समुद्री तट केवल स्पॉ की जगह नहीं रहे. बल्कि समुद्री तट फैशन, सामाजिक मेल मिलाप, और अभिजात्य लोगों की पहचान से जुड़ गया. बैर्ट मौरिज़ु ने अपनी पेंटिंग में किसी अमीर परिवार को चित्रित करने की कोशिश की.
पेंटिंग में नजर आ रही महिला काफी महंगे कपड़े पहने हुए नज़र आ रही है और वह होटल के प्राइवेट टैरेस से समुद्र की ओर देख रही हैं. मौरिज़ु ने अपनी इस तस्वीर के माध्यम से समुद्र तट पर छुट्टियों के चलन को रेखांकित किया है.
विलियम मेरिटे चेज़, एट सीसाइट 1892
औद्योगिककरण और शहरीकरण की वो ताकतें जिन्होंने अमीर परिवारों के लिए फ्रांसीसी समुद्री तटों को फैशनेबल बनाया, उन्ही ताकतों ने 19वीं शताब्दी के उतरार्ध में अमरीका में भी ऐसा ही किया.

इमेज स्रोत, Metropolitan Museum of Art 1892
अमरीकी अमीर तबके ने न्यूपोर्ट और बार हॉर्बर में समुद्री तटों पर रिजॉर्ट विकसित किए.
न्यूयार्क सिटी का नया नया मिडल क्लास तबका गर्मियों की छुट्टियों में इन समुद्री तटों पर पहुंचने लगा. हैंम्पटन के विलियम मेरिट चेज़ ने अपनी पेंटिंग में महिलाओं को समुद्री तटों पर आराम करते दिखाय है. लाल रंग का छाता जापानी अंदाज का दिखता है.
पॉल गौगैन, फटाटा ते मिटी, 1892

इमेज स्रोत, National Gallery of Art Washington 1892
1880 के दशक में पॉल गौगैन को पेरिस छोड़ना पड़ा. वे फ़्रांस के उत्तर-पश्चिमी इलाक़े ब्रिटेनी चले गए. वहां उन्होंने काफी कलाकृतियां बनाईं लेकिन इसके बाद वे टाहिटी चले गए.
वैसे उनकी इस कलाकृति की ख़ूब आलोचना भी हुई थी. क्योंकि इसमें महिलाएं अर्धनग्न अवस्था में समुद्री तटों पर नहाती दिख रही हैं.
आंद्रे डेरिन, फिशिंग बोट्स, कोलीउर, 1905
डेरिन तब 20-21 साल के रहे होंगे जब वे पेरिस से स्पेन की सीमा पर बसे कोलीउर की ओर रवाना हुए. वे अपने दोस्त हेनरी माटिसे के साथ थे.
स्पेन के कैटालोनिया इलाके में सूर्य की रोशनी और समुद्री तट का ऐसा असर हुआ कि उन्होंने ये कलाकृति बना दी.
इस तस्वीर से अंदाजा होता है कि अब समुद्री तटों पर सैर सपाटे के लिए जाना केवल अमीरों का ही शगल नहीं रहा.
एलएस लॉरी, यॉट्स, 1959

इमेज स्रोत, The Lowry Collection Salford 1959
एलएस लॉरी ब्रिटेन में घर-घर में मशहूर नाम हैं खासकर औद्योगिक उत्तर इंग्लैंड के चित्रण के लिए. उत्पादन करती फैक्ट्रियां, खचाखच भरे फुटबॉल स्टेडियम और शहरी संस्कृति.
ये सब उनकी कला में शामिल थे. ब्रिटिश समुद्री तट की ये तस्वीर एक साथ काफी कुछ दर्शाती है. देश युद्ध और उद्योग धंधों से कितना बदल गया है, ये भी ज़ाहिर होता है.
हिरोशी सुगीमोतो, सी ऑफ़ जापान, 1986

इमेज स्रोत, Metropolitan Museum of Art 1986
जापानी पेंटर हिरोशी सुगीमोतो की इस तस्वीर ने दुनिया भर के समुद्री तटों को नए अंदाज में पेश किया.
इसमें क्षितिज के अलावा कुछ नजर नहीं आता. आसमान और समुद्र कहीं दूर आपस में एक दूसरे में समाते हुए दिख रहे हैं.
जोहाना बिलिंग, हाउ वी वॉक ऑन द मून, 2007
19वीं शताब्दी में यूरोपीय लोगों के लिए आधुनिक जीवन का अनुभव लेने के लिए समुद्र अत्यंत ज़रूरी था. 21वीं शताब्दी में, जो समुद्र के करीब ही जीवन यापन करते हैं, उन्होंने भी इस पर ध्यान नहीं दिया.

इमेज स्रोत, Kavi Gupta 2007
लेकिन स्वीडिश कलाकार और संगीतकार जोहाना बिलिंग ने एडिनबरा में ये असाधारण वीडियो, दिस इज हाउ वी वॉक ऑन द मून तैयार किया.
जोहाना ने उन संगीतकारों को इसके लिए आमंत्रित किया था, जिनका पानी से कोई नाता नहीं था, लेकिन इस कोशिश ने कई कलाकारों को जन्म दिया.
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